{"_id":"5a2c17824f1c1b97678c0a9e","slug":"171512839042-ghazipur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाले के गंदे पानी से गंगा के अस्तित्व पर संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाले के गंदे पानी से गंगा के अस्तित्व पर संकट
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:34 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजीपुर। रक्षत गंगा आंदोलन एवं गंगा मुक्ति मोर्चा की संस्थापक अध्यक्ष प्रख्यात संस्कृत कवयित्री प्रो. कमला पांडेय के नेतृत्व में शनिवार को एक टीम पहुंची। उन्होंने शहर के गंगा घाटों का निरीक्षण करने के साथ गिर रहे नालों को भी देखा। कहा कि विगत कई वर्षों से पूरे शहर का अवजल गंगा की धारा में सीधे गिराया जा रहा है। जो नदी के अस्तित्व को संकट में डाल रहा है। इस महान संकट का हल अगर नहीं खोजा गया तो आश्चर्य नहीं कि तो हम गंगा विहीन हो जाएंगे।
आंदोलन के संयोजक रामशंकर सिंह ने बताया कि गंगा मुक्ति मोर्चा के सचिव जल वैज्ञानिक प्रो. राम सागर दूबे ने गंगा परिशुद्धीकरण की स्वदेशी तकनीक का अविष्कार किया है। इस पद्धति का नाम सुजल तकनीकी है। इस तकनीक के माध्यम से स्वल्प साधनों द्वारा नालों के जल को रोककर, उसे स्वच्छ बनाकर मुख्य धारा में भेजा जा सकता है। वह दिन दूर नहीं जब पुन: मां गंगा स्वच्छ और निर्मल होकर भारत की धरती को सुजला-सुफला शस्य श्यामला बना पाएंगी। कहा कि केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजन तक-तक सफल नहीं हो सकती, जब-तक इसे जनता से नहीं जोड़ा जाएगा। टीम के सदस्यों ने गंगा में गिर रहे नालों के ट्रीटमेंट की अनिवार्य आवश्यकता है। इसके साथ ही भारतीय संस्कृति की प्रेरणाधारा मां गंगा के सांस्कृतिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विशाल जन-जागरण भी जरूरी है। टीम के सदस्यों ने शहर के ददरी घाट, शिव साई मंदिर घाट एवं कलक्टर घाटों का सर्वेक्षण किया। साथ ही टीम ने जिला प्रशासन से गंगा में निर्बाध मिल रहे नालों की ट्रीटमेंट की मांग की है।
विज्ञापन
आंदोलन के संयोजक रामशंकर सिंह ने बताया कि गंगा मुक्ति मोर्चा के सचिव जल वैज्ञानिक प्रो. राम सागर दूबे ने गंगा परिशुद्धीकरण की स्वदेशी तकनीक का अविष्कार किया है। इस पद्धति का नाम सुजल तकनीकी है। इस तकनीक के माध्यम से स्वल्प साधनों द्वारा नालों के जल को रोककर, उसे स्वच्छ बनाकर मुख्य धारा में भेजा जा सकता है। वह दिन दूर नहीं जब पुन: मां गंगा स्वच्छ और निर्मल होकर भारत की धरती को सुजला-सुफला शस्य श्यामला बना पाएंगी। कहा कि केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजन तक-तक सफल नहीं हो सकती, जब-तक इसे जनता से नहीं जोड़ा जाएगा। टीम के सदस्यों ने गंगा में गिर रहे नालों के ट्रीटमेंट की अनिवार्य आवश्यकता है। इसके साथ ही भारतीय संस्कृति की प्रेरणाधारा मां गंगा के सांस्कृतिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विशाल जन-जागरण भी जरूरी है। टीम के सदस्यों ने शहर के ददरी घाट, शिव साई मंदिर घाट एवं कलक्टर घाटों का सर्वेक्षण किया। साथ ही टीम ने जिला प्रशासन से गंगा में निर्बाध मिल रहे नालों की ट्रीटमेंट की मांग की है।
विज्ञापन