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संस्कार, विचार की शुद्धता के लिए धर्म का होना जरूरी
Updated Tue, 11 Dec 2018 10:32 PM IST
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सुहवल। संत मानदास बाबा की तपोस्थली परिसर में धनुष यज्ञ मेला से पूर्व आयोजित श्री रामचरित मानस कथा महायज्ञ के नौवें दिन अयोध्या से आई कथा वाचिका सुश्री प्रीति उपाध्याय शास्त्री ने धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि घर एवं समाज की सफाई से पहले मन एवं विचारों की सफाई करें। संस्कार, विचार, व्यवहार की शुद्धता के लिए धर्म का होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि धर्म में चारों पुरुषार्थ की प्रधानता बताई गई है। इसी कारण ही समाज में आज भी सामंजस्य एवं संयुक्त परिवार की परंपरा है। कहा कि धर्म में चारों पुरुषार्थ की प्रधानता बताई है। पाश्चात्य संस्कृति अर्थ प्रधान है। अर्थ प्रधानता का खामियाजा हमेशा मानव को भुगतना पड़ा है। श्रद्धालुओं को भगवान राम के चरित्र को धारण करने का संदेश दिया। कहा कि रामकथा को केवल सुने नहीं, उसका अनुसरण भी करें। रामकथा का अनुसरण करने से जीवन सार्थक हो जाता है। भगवान राम के नाम का मनन करने वाला पावन हो जाता है। भगवान राम का संपूर्ण जीवन प्रेरणा का स्त्रोत है। उन्होंने पुरुषों के लिए मर्यादाएं निर्धारित की। मर्यादाओं में रह कर मनुष्य पुरुषों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर सकता है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। कहा कि मनुष्य के विचार शुद्ध होने चाहिए। विचार शुद्ध होने से जीवन वंदनीय हो जाता है। घर एवं समाज की सफाई से पहले मन और विचारों की सफाई करना अनिवार्य है। हमारे विचार हमारी पहचान बनते हैं। हमारा ईश्वर पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए। जब जीवन रूपी नैया डगमगाती है तो ईश्वर का स्मरण करें। ईश्वर स्वयं ही हमारी नैया को पार लगा देंगे। इस अवसर पर दुर्गा प्रसाद पांडेय, पूर्व प्रमुख अनिल राय बच्चन, ग्राम प्रधान सविता राय, रविशंकर राय, प्रभाषचंद्र राय, प्रभाकांत मिश्रा, अमर राय, अशोक यादव, अशोकानंद जी महराज, दीपक कुशवाहा, अजय शुक्ला, हरिवंश यादव, जीवेंद्र नारायण शुक्ला बाबा जी सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि धर्म में चारों पुरुषार्थ की प्रधानता बताई गई है। इसी कारण ही समाज में आज भी सामंजस्य एवं संयुक्त परिवार की परंपरा है। कहा कि धर्म में चारों पुरुषार्थ की प्रधानता बताई है। पाश्चात्य संस्कृति अर्थ प्रधान है। अर्थ प्रधानता का खामियाजा हमेशा मानव को भुगतना पड़ा है। श्रद्धालुओं को भगवान राम के चरित्र को धारण करने का संदेश दिया। कहा कि रामकथा को केवल सुने नहीं, उसका अनुसरण भी करें। रामकथा का अनुसरण करने से जीवन सार्थक हो जाता है। भगवान राम के नाम का मनन करने वाला पावन हो जाता है। भगवान राम का संपूर्ण जीवन प्रेरणा का स्त्रोत है। उन्होंने पुरुषों के लिए मर्यादाएं निर्धारित की। मर्यादाओं में रह कर मनुष्य पुरुषों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर सकता है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। कहा कि मनुष्य के विचार शुद्ध होने चाहिए। विचार शुद्ध होने से जीवन वंदनीय हो जाता है। घर एवं समाज की सफाई से पहले मन और विचारों की सफाई करना अनिवार्य है। हमारे विचार हमारी पहचान बनते हैं। हमारा ईश्वर पर पूर्ण विश्वास होना चाहिए। जब जीवन रूपी नैया डगमगाती है तो ईश्वर का स्मरण करें। ईश्वर स्वयं ही हमारी नैया को पार लगा देंगे। इस अवसर पर दुर्गा प्रसाद पांडेय, पूर्व प्रमुख अनिल राय बच्चन, ग्राम प्रधान सविता राय, रविशंकर राय, प्रभाषचंद्र राय, प्रभाकांत मिश्रा, अमर राय, अशोक यादव, अशोकानंद जी महराज, दीपक कुशवाहा, अजय शुक्ला, हरिवंश यादव, जीवेंद्र नारायण शुक्ला बाबा जी सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।
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