विज्ञापन

होली की ठिठोली 18-22-34

Varanasi Bureauवाराणसी ब्यूरो Updated Sun, 17 Mar 2019 11:06 PM IST
ख़बर सुनें
ताजपुर डेहमा। होली का त्योंहार नजदीक आता जा रहा है। बावजूद इसके गांवों में ढोलक की थाप एवं झाल, मंजीरे पर फगुआ के गीत सुनाई नहीं दे रहे हैं। पहले फागुन माह में दिन ढलते ही गांवों की गलियों में हारमोनियम झाल -मंजीरें तथा ढोलक की थाप से गूंजने लगती थी। बोलो सा रा... रा... रा... के बोल के साथ ही जोगीरा तीन ताल, चौ ताल, फाग होरी आदि गीत फिजाओं में तैरने लगते थे। गांवों में कई जगहों पर इन गीतों के आयोजन होते थे जिसमें ग्रामिणों की भारी भीड़ एकत्रित होती थी । अपने सहन व दलानों में इस प्रकार का आयोजन करना शान की बात समझी जाती थी। सामूहिक रूप से भांग तथा गुड़ का सेवन कर गीत गाए जाते थे । परिवर्तन के इस दौर में इस परम्परा ने दम तोड़ दिया है ।अब गांवों में न तो झाल बजते है और न ही ढोलक की धम धम।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव के हृदय नारायण राय का कहना है कि हम बचपन में कई कई दिन तक रंगीन ही रहते थे। न खाने की सुध न सोने की। बस होली आते ही एक दूसरे के साथ फगुआ गाना, मस्ती लेना और रंग डालना। लोगों में एक दूसरे के प्रति सम्मान औऱ भाई चारा था। इस त्योहार के प्रति एक अलग ही जोश खरोश दिखाई देती थी । उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी और शिवरात से ही लोगों पर फगुआ चढ़ जाता था। होली का मिजाज बनने लगता। जगह -जगह फाग गीत के साथ लोक गीत , लोक नृत्य का आयोजन प्रतिस्पर्धा के रुप में महिनों तक चलता। इसी क्रम में बुजुर्ग महेंद्र राय तो आज भी अपने जमाने की होली को याद कर जवान हो उठते है। फाग के गीत गाने लगते है। संवत जलावन से लेकर कब होली बीत जाता था पता ही नहीं चलता था। मिल जुल कर चन्दे आदि वसूल कर लकड़ी जुटा कर होलिका बनाते. इस बीत कई लोगों को चिढ़ाते भी थे और होलिका जलते ही जैसे सभी जोगीरा की धुन में रम जाते। देर तक फाग गाया जाता। रात हो जाती थी। कुच मनबढ़ महिलाएं रात को भी रंग तथा पानी फेंक कर देवर भौजाई के रंग को जमाती। अब इस त्यौहार की औपचारिकता भी ही रह गयी हैं। लोगों की व्यस्तता और आपसी होड़ ने होली की मिठास को कम कर दिया है।

Recommended

क्या आप अपने करियर को लेकर उलझन में हैं ? समाधान पायें हमारे अनुभवी ज्योतिषिचर्या से
ज्योतिष समाधान

क्या आप अपने करियर को लेकर उलझन में हैं ? समाधान पायें हमारे अनुभवी ज्योतिषिचर्या से

जानें क्यों होता है बार-बार आर्थिक नुकसान? समाधान पायें हमारे अनुभवी ज्योतिषिचर्या से
ज्योतिष समाधान

जानें क्यों होता है बार-बार आर्थिक नुकसान? समाधान पायें हमारे अनुभवी ज्योतिषिचर्या से

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Ghazipur

लोकसभा चुनाव: गाजीपुर सीट जीतना भाजपा के लिए चुनौती-AZAMGARH

लोकसभा चुनाव: गाजीपुर सीट जीतना भाजपा के लिए चुनौती-AZAMGARH

24 मार्च 2019

विज्ञापन

फतेहपुर में एक दिन का पीएम बनने पर लोग सबसे पहले करेंगे ये काम

अमर उजाला का चुनावी रथ फतेहपुर पहुंचा। यहां पर लोगों ने एक दिन के पीएम बनने पर कहा रोजगार और गरीबी मिटाने पर करेंगे काम।

23 मार्च 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election