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वर्तमान समय में काव्य व्याकरण जैसी किताब की ही जरूरत
Updated Mon, 02 Oct 2017 11:31 PM IST
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दिलदानगर। छत्तीसगढ़ के पुुुलिस महानिदेशक अभियोजन मोहम्मद वजीर अंसारी ने कहा कि गजल व्याकरण की बहुत सी किताबें जगह-जगह से छप रही हैं। यह एक चलन सा हो गया है, लेकिन गजल के साथ-साथ हिंदी-उर्दू काव्य की सभी विधाओं के व्याकरण को शामिल करते हुए किसी पुस्तक का प्रकाशन अब तक नहीं हुआ था। इस जरूरत को महसूस करते हुए इम्तियाज अहमद गाजी ने ‘काव्य व्याकरण’ का संपादन करके प्रकाशित किया है। वर्तमान समय में ऐसी किताब की ही जरूरत है। इस जरूरत को समझते हुए ही इम्तियाज गाजी ने यह काम किया। इनके इस काम की जितनी तारीफ की जाए कम है। यह बातें उन्होंने ‘काव्य व्याकरण’ के विमोचन अवसर पर कही।
रविवार की देर शाम दिलदानगर थाना क्षेत्र के उसिया गांव स्थित अली अहमद अहाता में आयोजित कार्यक्रम में श्री अंसारी ने कहा कि इम्तियाज ग़ाजी ने यह काम कर जहां देश भर के नवजवानों का मार्गदर्शन किया है, वहीं गाजीपुर जिले में एक नए रूप से साहित्यिक अलख जगा दी है। उनके इस काम से जिले के लोगों को बहुत कुछ जानने-समझने का अवसर प्राप्त होगा। मशहूर शायर मिथिलेश गहमरी ने कहा कि व्याकरण का मतलब अनुशासन होता है, इस किताब के जरिए इम्तियाज गाजी ने लोगों को हिंदी-उर्दू पद्य साहित्य का अनुशासन जानने-समझने का मौका दिया है। शायर जुबैर दिलदानगरी ने कहा इस किताब में ग़जल के साथ-साथ दोहा, हाइकू, नात, हम्द, माहिया, रूबाई आदि विषयों की जानकारी बेहद आसान भाषा में समझाकर दी गई है। नवजवानों के लिए यह किताब बहुत ही काम की है। भोपाल से आए मक़बूल वाजिद ने कहा कि यह किताब बेहद ही उल्लेखनीय है। बिना व्याकरण की जानकारी के शेरो-शायरी के काम को ठीक ढंग से अंजाम नहीं दिया जा सकता। अध्यक्षता कर रहे मौलाना रियाज हुसैन ने कहा कि इम्तियाज गा़जी ने साहित्य के क्षेत्र में बेहतरीन काम करके गाजीपुर का नाम रोशन किया है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे इम्तियाज अहमद गाजी ने कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर एक अच्छा काम करने का प्रयास किया है। अगर लोगों का सहयोग रहा तो आगे और भी बेहतर काम किए जाएंगे। इस मौके पर कमसारनामा के लेखक सुहैल खां, कुंवर नसीम रजा खां, शहाब खां, मारकंडेय राय, करीम रजा खां, अतीक खां, जमालुद्दीन खां आदि उपस्थित थे।
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रविवार की देर शाम दिलदानगर थाना क्षेत्र के उसिया गांव स्थित अली अहमद अहाता में आयोजित कार्यक्रम में श्री अंसारी ने कहा कि इम्तियाज ग़ाजी ने यह काम कर जहां देश भर के नवजवानों का मार्गदर्शन किया है, वहीं गाजीपुर जिले में एक नए रूप से साहित्यिक अलख जगा दी है। उनके इस काम से जिले के लोगों को बहुत कुछ जानने-समझने का अवसर प्राप्त होगा। मशहूर शायर मिथिलेश गहमरी ने कहा कि व्याकरण का मतलब अनुशासन होता है, इस किताब के जरिए इम्तियाज गाजी ने लोगों को हिंदी-उर्दू पद्य साहित्य का अनुशासन जानने-समझने का मौका दिया है। शायर जुबैर दिलदानगरी ने कहा इस किताब में ग़जल के साथ-साथ दोहा, हाइकू, नात, हम्द, माहिया, रूबाई आदि विषयों की जानकारी बेहद आसान भाषा में समझाकर दी गई है। नवजवानों के लिए यह किताब बहुत ही काम की है। भोपाल से आए मक़बूल वाजिद ने कहा कि यह किताब बेहद ही उल्लेखनीय है। बिना व्याकरण की जानकारी के शेरो-शायरी के काम को ठीक ढंग से अंजाम नहीं दिया जा सकता। अध्यक्षता कर रहे मौलाना रियाज हुसैन ने कहा कि इम्तियाज गा़जी ने साहित्य के क्षेत्र में बेहतरीन काम करके गाजीपुर का नाम रोशन किया है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे इम्तियाज अहमद गाजी ने कहा कि उन्होंने अपने स्तर पर एक अच्छा काम करने का प्रयास किया है। अगर लोगों का सहयोग रहा तो आगे और भी बेहतर काम किए जाएंगे। इस मौके पर कमसारनामा के लेखक सुहैल खां, कुंवर नसीम रजा खां, शहाब खां, मारकंडेय राय, करीम रजा खां, अतीक खां, जमालुद्दीन खां आदि उपस्थित थे।
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