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महान विभूतियों को गाजीपुर लाए थे परशुराम राय
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गाजीपुर। देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले बाबू परशुराम राय का जन्म चार फरवरी 1883 को जिले के मलसा गांव में हुआ था। स्वतंत्रता की अलख जगाए रखने के साथ ही वह लगातार दो दशकों तक जिला कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वह कई बार जिला कारागार में निरुद्ध हुए तथा यातनाएं झेली। अंग्रेजी हकूमत के खिलाफ नेताजी सुभाषचंद्र बोस तथा अन्य विभूतियों को गाजीपुर लाकर सफल सभाएं कराई। उनकी कर्मठता के बारे में सभी बड़े नेताओं को जानकारी थी।
परशुराम राय की सक्रियता के कारण ही गाजीपुर को राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र माना जाता था। सुभाषचंद्र बोस के 1938 में ग़ाजीपुर में दिये गए भाषण का ही प्रभाव था कि द्वितीय विश्व युद्ध में पूर्वी उत्तर प्रदेश के ब्रितानिया फौज के कई सैनिकों ने आजाद हिंद फौज की ओर से फिरंगी सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी। पचास के दशक में जब नए भारत का निर्माण हो रहा था तब परशुराम राय ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत, लालबहादुर शास्त्री, हेमवती नंदन बहुगुणा, स्वामी सहजानंद सरस्वती आदि को ग़ाजीपुर आने का न्योता दिया था। इन नेताओं ने जिले की सभाओं में समय-समय पर शिरकत की जिससे जनता में एक नई ऊर्जा का सृजन होता गया। वह आजीवन समाजसेवा में लगे रहे। बाद में 18 नवंबर 1980 को पैतृक गांव में उनका निधन हो गया। उनके प्रपौत्र अंकुर राय ने बताया कि गाजीपुर शहर का रायगंज कालोनी उन्हीं के नाम पर बसाया गया।
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परशुराम राय की सक्रियता के कारण ही गाजीपुर को राजनीतिक सरगर्मियों का केंद्र माना जाता था। सुभाषचंद्र बोस के 1938 में ग़ाजीपुर में दिये गए भाषण का ही प्रभाव था कि द्वितीय विश्व युद्ध में पूर्वी उत्तर प्रदेश के ब्रितानिया फौज के कई सैनिकों ने आजाद हिंद फौज की ओर से फिरंगी सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी। पचास के दशक में जब नए भारत का निर्माण हो रहा था तब परशुराम राय ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत, लालबहादुर शास्त्री, हेमवती नंदन बहुगुणा, स्वामी सहजानंद सरस्वती आदि को ग़ाजीपुर आने का न्योता दिया था। इन नेताओं ने जिले की सभाओं में समय-समय पर शिरकत की जिससे जनता में एक नई ऊर्जा का सृजन होता गया। वह आजीवन समाजसेवा में लगे रहे। बाद में 18 नवंबर 1980 को पैतृक गांव में उनका निधन हो गया। उनके प्रपौत्र अंकुर राय ने बताया कि गाजीपुर शहर का रायगंज कालोनी उन्हीं के नाम पर बसाया गया।
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