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तब किशो ी की हत्या से कांप उठे थे कंचनपुरवासी
Updated Fri, 24 Nov 2017 11:38 PM IST
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गाजीपुर/ दुल्लहपुर। बहुआरा गांव के पास छात्रा की चाकू गोदकर की गई निर्मम हत्या ने एक बार फिर उस घटना की याद ताजी कर दी है, जो एक साल पहले मटुकपुर गांव के पास स्थित गन्ने के खेत में हुई थी। तब एक किशोरी की अस्मत लूटने के बाद उसे रस्सी में बांधकर आग के हवाले कर दिया गया था। उस समय दरिंदों के उस कृत्य से क्षेत्र ही नहीं, पूरा जनपद कांप उठा था। 11वीं की छात्रा कुमारी अर्चना की हत्या के बाद एक बार फिर संजू के नृशंस हत्या का भयानक चेहरा लोगों की आंखों में तैरने लगा है।
दुल्लहपुर थाने के कंचनपुर निवासी संजू (14) को मार्च 2016 में बदमाशों ने मिलाकर एक युवती को एकांत में बुलाया था। फिर उसे मटुकपुर गांव के पास स्थित गन्ने के खेत में ले गए। वहां किशोरी का वीडियो बनाने और उसके साथ बलात्कार करना चाहते थे। तब किशोरी के प्रबल विरोध करने के बाद दरिंदों ने उसकी अस्मत लूटी थी और रस्सी में बांधकर शरीर पर मिट्टी तेल डालकर जिंदा जला दिया था। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए घटना को अंजाम देने वाले तीन हत्यारोपियों को चालान कर जेल भेज दिया था। लेकिन लोगों के दिलों से दहशत आज भी नहीं मिटा। घटना के बाद काफी दिनों तक महिला और युवतियों की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे। इलाके के लोग ऐसे दरिंदों को फांसी देने की मांग की थी। लेकिन आज भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। कंचनपुर तथा मटुकपुर गांवों के रहने वाले लोग आज भी संजू हत्याकांड की कहानी सुनाते हुए सिहर उठते हैं। उनकी जुबान लड़खड़ाने लगती है। आए दिन बेटियों के साथ घट रही घटनाओं के लिए पुलिस प्रशासन तथा अपने देश के लचर कानून व्यवस्था को दोषी मानते हैं। लोगों का कहना है कि इसके लिए कठोर कानून बनना जरूरी है, जिसमें दरिंदों को फांसी पर लटकाया जा सके। शुक्रवार को दिलदारनगर क्षेत्र में सरेराह की गई छात्रा कुमारी अर्चना की चाकू घोंप कर हत्या के बाद अब क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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दुल्लहपुर थाने के कंचनपुर निवासी संजू (14) को मार्च 2016 में बदमाशों ने मिलाकर एक युवती को एकांत में बुलाया था। फिर उसे मटुकपुर गांव के पास स्थित गन्ने के खेत में ले गए। वहां किशोरी का वीडियो बनाने और उसके साथ बलात्कार करना चाहते थे। तब किशोरी के प्रबल विरोध करने के बाद दरिंदों ने उसकी अस्मत लूटी थी और रस्सी में बांधकर शरीर पर मिट्टी तेल डालकर जिंदा जला दिया था। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए घटना को अंजाम देने वाले तीन हत्यारोपियों को चालान कर जेल भेज दिया था। लेकिन लोगों के दिलों से दहशत आज भी नहीं मिटा। घटना के बाद काफी दिनों तक महिला और युवतियों की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे। इलाके के लोग ऐसे दरिंदों को फांसी देने की मांग की थी। लेकिन आज भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। कंचनपुर तथा मटुकपुर गांवों के रहने वाले लोग आज भी संजू हत्याकांड की कहानी सुनाते हुए सिहर उठते हैं। उनकी जुबान लड़खड़ाने लगती है। आए दिन बेटियों के साथ घट रही घटनाओं के लिए पुलिस प्रशासन तथा अपने देश के लचर कानून व्यवस्था को दोषी मानते हैं। लोगों का कहना है कि इसके लिए कठोर कानून बनना जरूरी है, जिसमें दरिंदों को फांसी पर लटकाया जा सके। शुक्रवार को दिलदारनगर क्षेत्र में सरेराह की गई छात्रा कुमारी अर्चना की चाकू घोंप कर हत्या के बाद अब क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
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