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किसानों को दी जीरो ड्रिल विधि की जानकारी
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जमानिया। क्षेत्र के बरूईन गांव में गुरुवार को गेहूं विकास कार्यक्रम के तहत ई-चौपाल का आयोजन किया गया। इस मौके पर जीरो ड्रिल विधि के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए किसानों को कम लागत में बेहतरीन फसल पैदा करने की जानकारी दी गई।
चौपाल में आईटीसी के प्रोजेक्ट को-आर्डिनेटर सुनीता बेहरा एवं अरविंद कुमार मिश्र ने किसानों से खेत में की गई गेहूं की बोआई सहित किसानों से अन्य जानकारियां हासिल कीं। श्री मिश्र ने चौपाल में प्रगतिशील किसानों को आईटीसी की ओर से संचालित कार्यक्रमों और दी जाने वाली सुविधाओं को बताया। किसानों को जीरो ड्रिल से बुआई के बारे में बताया। सुनीता ने कहा कि जीरो ड्रिल की बुआई करने से पर्यावरण को लाभ तो है ही साथ ही किसान को भी इस प्रक्रिया से बुआई करने में समय की बचत के साथ अधिक पैदावार मिलता है। इसविधि में बिना जोत केबुआई होती है जिससे खेत को जोतने का खर्च बचता है। वहीं पानी, खाद आदि की खपत भी 30 प्रतिशत कम हो जाती है। फसल भी पहले तैयार होती है। उन्होंने बताया कि इस विधि में गेहूं की कटाई केदौरान जड़ की डंठल (ठुंट) को छोड़ दिया जाता है और सीधे जीरो ड्रिल से बुआई कर दी जाती है। ठूंठ छोड़ देने से कुछ दिन के बाद वह खाद में तब्दील हो जाती है। जिससे मृदा का स्वास्थ्य बना रहता है। वही मशीन से बुआई होने के वजह से बुआई का खर्च भी बचता है। उन्होंने किसानों को सीधी बुआई करने का सुझाव दिया। इस दौरान पप्पू सिंह, अभिषेक सिंह, अवध नरायण सिंह, बृजेश कुमार, राकेश, संतोष, राम विलास राय, सत्येन्द्र कुमार, मृत्युंजय सिंह, नरेन्द्र, मोती शर्मा, राम नौमी आदि उपस्थित रहे।
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चौपाल में आईटीसी के प्रोजेक्ट को-आर्डिनेटर सुनीता बेहरा एवं अरविंद कुमार मिश्र ने किसानों से खेत में की गई गेहूं की बोआई सहित किसानों से अन्य जानकारियां हासिल कीं। श्री मिश्र ने चौपाल में प्रगतिशील किसानों को आईटीसी की ओर से संचालित कार्यक्रमों और दी जाने वाली सुविधाओं को बताया। किसानों को जीरो ड्रिल से बुआई के बारे में बताया। सुनीता ने कहा कि जीरो ड्रिल की बुआई करने से पर्यावरण को लाभ तो है ही साथ ही किसान को भी इस प्रक्रिया से बुआई करने में समय की बचत के साथ अधिक पैदावार मिलता है। इसविधि में बिना जोत केबुआई होती है जिससे खेत को जोतने का खर्च बचता है। वहीं पानी, खाद आदि की खपत भी 30 प्रतिशत कम हो जाती है। फसल भी पहले तैयार होती है। उन्होंने बताया कि इस विधि में गेहूं की कटाई केदौरान जड़ की डंठल (ठुंट) को छोड़ दिया जाता है और सीधे जीरो ड्रिल से बुआई कर दी जाती है। ठूंठ छोड़ देने से कुछ दिन के बाद वह खाद में तब्दील हो जाती है। जिससे मृदा का स्वास्थ्य बना रहता है। वही मशीन से बुआई होने के वजह से बुआई का खर्च भी बचता है। उन्होंने किसानों को सीधी बुआई करने का सुझाव दिया। इस दौरान पप्पू सिंह, अभिषेक सिंह, अवध नरायण सिंह, बृजेश कुमार, राकेश, संतोष, राम विलास राय, सत्येन्द्र कुमार, मृत्युंजय सिंह, नरेन्द्र, मोती शर्मा, राम नौमी आदि उपस्थित रहे।
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