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सरस्वती प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे कारीगर
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गाजीपुर। विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा के पर्व बसंत पंचमी में गिनती के दिन ही शेष रह गए हैं। इसको लेकर शहर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस क्रम में कारीगर भी रात-दिन एक कर मां सरस्वती की प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हुए हैं। जिले में कई स्थानों पर पंडाल सजाकर प्रतिमाओं को स्थापित कर विधिवत पूजन अर्चन किया जाता है।
जिले में बसंत पंचमी का पर्व 10 फरवरी को मनाया जाएगा। इस पर्व पर शहर तथा ग्रामीण में क्षेत्रों में विभिन्न पूजन समितियों की ओर से आकर्षक पंडाल सजाया जाता है। इनमें मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजन-अर्चन किया जाता है। कुछ स्थानों पर अखंड मानस पाठ का भी आयोजन किया जाता है। रात भर जागरण किया जाता है। इस पूजन को लेकर हर जगह तैयारियां जोरों पर हैं। छोटे-बड़े पंडालों को बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। आयोजनकर्ताओं ने कारीगरों को प्रतिमाओं के लिए पहले से ही आर्डर दिया हुआ है। इसको लेकर कारीगर भी काफी गंभीरता से प्रतिमाओं को तैयार कर रहे हैं। मूर्ति के रंग-रोगन का काम का काम चल रहा है। शहर के रौजा स्थित कारीगर छोटेलाल ने बताया कि विभिन्न आकार की मूर्तियों की अलग-अलग कीमत है। कम से कम दो हजार तथा सबसे अधिक कीमत की उनके यहां अठारह हजार की प्रतिमा है। बताया कि पर्व के दिन ही अधिकतर श्रद्धालु मूर्तियों को पंडाल में ले जाते हैं।
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जिले में बसंत पंचमी का पर्व 10 फरवरी को मनाया जाएगा। इस पर्व पर शहर तथा ग्रामीण में क्षेत्रों में विभिन्न पूजन समितियों की ओर से आकर्षक पंडाल सजाया जाता है। इनमें मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजन-अर्चन किया जाता है। कुछ स्थानों पर अखंड मानस पाठ का भी आयोजन किया जाता है। रात भर जागरण किया जाता है। इस पूजन को लेकर हर जगह तैयारियां जोरों पर हैं। छोटे-बड़े पंडालों को बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। आयोजनकर्ताओं ने कारीगरों को प्रतिमाओं के लिए पहले से ही आर्डर दिया हुआ है। इसको लेकर कारीगर भी काफी गंभीरता से प्रतिमाओं को तैयार कर रहे हैं। मूर्ति के रंग-रोगन का काम का काम चल रहा है। शहर के रौजा स्थित कारीगर छोटेलाल ने बताया कि विभिन्न आकार की मूर्तियों की अलग-अलग कीमत है। कम से कम दो हजार तथा सबसे अधिक कीमत की उनके यहां अठारह हजार की प्रतिमा है। बताया कि पर्व के दिन ही अधिकतर श्रद्धालु मूर्तियों को पंडाल में ले जाते हैं।
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