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दोषी बचेंगे नहीं
Ghaziabad
Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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गरीबों के हकों पर ‘डाका’
गाजियाबाद। सरकारी मशीनरी को शासनादेश के खिलाफ कांशीराम और आईएचएसडीपी योजना के मकानों का आवंटन करना भारी पड़ गया है। आवंटन में धांधली का खुलासा होने के बाद प्रशासन एक्शन में आ गया है। एडीएम सिटी ने चार जांच टीमों का गठन कर दिया है। जांच अधिकारी की क्रास चेकिंग के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। कांशीराम आवासीय योजना और आईएचएसडीपी के मकानों के आवंटन में हुई धांधली की ‘अमर उजाला’ ने खुलासा किया तो प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम के आदेश पर एडीएम सिटी ने चार जांच टीमों का गठन कर दिया है। जांच अधिकारी नायब तहसीलदारों को बनाया गया है।
जांच अधिकारी की क्रास चेकिंग का पूरा इंतजाम किया गया है। प्रत्येक जांच टीम में मजिस्ट्रेट को पर्यवेक्षक बनाया गया है। इनमें डिप्टी कलेक्टर रीना सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट कर्मेन्द्र सिंह, एसडीएम सदर केशव कुमार और एसडीएम मोदीनगर मोनिका कुमारी शामिल हैं। सोमवार से जांच टीमें काम करना शुरू कर देंगी। बता दें कि कांशीराम आवासीय योजना और आईएचएसडीपी के मकान बगैर मूल निवास के दूसरे प्रदेश के लोगों के आवंटित कर दिए। जो शासनादेश के खिलाफ है।
मजिस्ट्रेट के आवंटन की जांच नायब को
कांशीराम और आईएचएसडीपी के मकान मजिस्ट्रेटों की निगरानी में आवंटित हुए थे। एक आवेदन की जांच भी कराई गई थी। अब मजिस्ट्रेटों की आवंटन प्रक्रिया की जांच नायब तहसीलदार करेंगे।
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पहली जांच में 24 मिले थे अपात्र
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर एडीएम सिटी ने 36 आवंटियों की जांच की थी। जिसमें से 24 व्यक्ति अपात्र पाए गए थे। इनमें अधिकांश दूसरे राज्यों के ही रहने वाले थे। एडीएम सिटी ने अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेज दी है।
कांशीराम और डूडा के मकानों की जांच के लिए चार टीमों का गठन कर दिया है। जो सोमवार से काम करना शुरू कर देंगी। जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।
-इंद्र विक्रम सिंह, एडीएम सिटी
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गाजियाबाद। सरकारी मशीनरी को शासनादेश के खिलाफ कांशीराम और आईएचएसडीपी योजना के मकानों का आवंटन करना भारी पड़ गया है। आवंटन में धांधली का खुलासा होने के बाद प्रशासन एक्शन में आ गया है। एडीएम सिटी ने चार जांच टीमों का गठन कर दिया है। जांच अधिकारी की क्रास चेकिंग के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। कांशीराम आवासीय योजना और आईएचएसडीपी के मकानों के आवंटन में हुई धांधली की ‘अमर उजाला’ ने खुलासा किया तो प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम के आदेश पर एडीएम सिटी ने चार जांच टीमों का गठन कर दिया है। जांच अधिकारी नायब तहसीलदारों को बनाया गया है।
जांच अधिकारी की क्रास चेकिंग का पूरा इंतजाम किया गया है। प्रत्येक जांच टीम में मजिस्ट्रेट को पर्यवेक्षक बनाया गया है। इनमें डिप्टी कलेक्टर रीना सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट कर्मेन्द्र सिंह, एसडीएम सदर केशव कुमार और एसडीएम मोदीनगर मोनिका कुमारी शामिल हैं। सोमवार से जांच टीमें काम करना शुरू कर देंगी। बता दें कि कांशीराम आवासीय योजना और आईएचएसडीपी के मकान बगैर मूल निवास के दूसरे प्रदेश के लोगों के आवंटित कर दिए। जो शासनादेश के खिलाफ है।
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मजिस्ट्रेट के आवंटन की जांच नायब को
कांशीराम और आईएचएसडीपी के मकान मजिस्ट्रेटों की निगरानी में आवंटित हुए थे। एक आवेदन की जांच भी कराई गई थी। अब मजिस्ट्रेटों की आवंटन प्रक्रिया की जांच नायब तहसीलदार करेंगे।
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पहली जांच में 24 मिले थे अपात्र
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर एडीएम सिटी ने 36 आवंटियों की जांच की थी। जिसमें से 24 व्यक्ति अपात्र पाए गए थे। इनमें अधिकांश दूसरे राज्यों के ही रहने वाले थे। एडीएम सिटी ने अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेज दी है।
कांशीराम और डूडा के मकानों की जांच के लिए चार टीमों का गठन कर दिया है। जो सोमवार से काम करना शुरू कर देंगी। जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।
-इंद्र विक्रम सिंह, एडीएम सिटी