{"_id":"62489b48b0de754ae736e943","slug":"yoga-amar-ujala-abhiyan-education-firozabad-news-agr529024997","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतियोगिता, योग और संवाद के सहारे बढ़ाया जा रहा बच्चों का मनोबल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतियोगिता, योग और संवाद के सहारे बढ़ाया जा रहा बच्चों का मनोबल
विज्ञापन
प्रतियोगिता, योग और संवाद के सहारे बढ़ाया जा रहा बच्चों का मनोबल
तनाव दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिकों से भी कराई जा रही काउंसलिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिकोहाबाद(फिरोजाबाद)। कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्ष तक बच्चों ने विकल्प के तौर पर ऑनलाइन शिक्षा ली। इससे उन पर मानसिक तनाव हावी हो गया। कई विद्यार्थी अवसाद में भी आ गए। बिना परीक्षाओं के विद्यार्थी अगली कक्षाओं में प्रमोट कर दिए गए। अब स्कूल खुलने के बाद पढ़ाई संबंधी कई दिक्कतें सामने आ रहीं हैं। इसे देखते हुए स्कूल संचालक प्रतियोगिता, योगाभ्यास और संवाद के सहारे बच्चों का मनोबल बढ़ाने में जुटे हैं। तनाव दूर करने के लिए काउंसलिंग का भी सहारा लिया जा रहा है।
सेंट जेबी ग्लोबल एकेडमी के प्रबंध निदेशक डॉ. रामकैलाश यादव ने बताया कि बच्चों में आए बदलावों को दूर करने व आत्म विश्वास जगाने के लिए अध्यापकों के साथ प्रधानाचार्य बच्चों से संवाद करते हैं। प्रार्थना के समय उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है। योगाभ्यास, प्राणायाम भी कराया जा रहा है। लिखने और पढ़ने की ललक पैदा करने के लिए कई प्रतियोगिताएं कराईं जा रही हैं। जिससे उनका मनोबल बढ़े। कुछ बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई जा रहीं हैं।
- ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क की भी समस्या रहती थी। 10 से 15 मिनट बाद आता तो इतनी देर बैठे बोर हो जाते थे। ऑफलाइन में समय से कक्षाएं चल रहीं हैं। जो प्रश्न नहीं आता है, उसे पूछकर समस्या का समाधान कर लेते हैं।
विज्ञापन
- अभिषेक कुमार छात्र
- ग्रामीण अंचल में नेटवर्क की समस्या अधिक है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे ऑन लाइन पढ़ाई का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। ऑफ लाइन क्लास में सभी बच्चे आकर समय से अध्ययन कर रहे हैं। अपनी जिज्ञासा को भी शांत कर रहे हैं।
- जयंत यादव, छात्र
- ऑनलाइन पढ़ाई में सबसे बड़ी समस्या होती थी कि जो विषय उन्हें समझ में नहीं आया, तो उसे अध्यापक से पूछने में दिक्कत होती थी। ऑफलाइन में यह समस्या नहीं आती है। कोरोना काल में आईं कमियों को शिक्षक दूर कर रहे हैं।
- सौम्या कक्षा, छात्रा
- ऑनलाइन कक्षा में अकेले बैठ कर पढ़ाई करनी पड़ती थी। साथ ही घर में शोर के कारण और नेटवर्क कारण पढ़ाई बाधित होती थी। अब स्कूल आने पर पुराने साथियों से भी बैठ कर जो विषय नहीं आता है, उस पर एक दूसरे से वार्ता कर समझ लिया जाता है।
- डौली बघेल, छात्रा
- कोरोना महामारी के चलते दो साल ऑनलाइन पढ़ाई हुई। अब शिक्षक उनमें आई कमियों को दुरुस्त करने में जुटे हैं। शिक्षक बच्चों से बात कर रहे हैं, जिससे छात्र-छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। जल्दी ही पुराने दिनों को भूल कर नये माहौल में समायोजित हो जाएंगे।
- लक्ष्मी, छात्रा
कोरोना काल में अध्यापक छात्रों को ऑन लाइन के माध्यम से पढ़ाई कराते रहे हैं। इसके लिए उन्हें पहले तैयारी करनी पड़ती थी और फिर बच्चों को पढ़ाना पड़ता था। इससे उन्हें काफी समय लग जाता था। कोरोना काल में बच्चों का शिक्षा के स्तर में काफी कमी आई थी। बच्चों को लिखने का अभ्यास कराने के साथ पढ़ाई का भी अभ्यास कराया जा रहा है।
- संध्या राजपूत, शिक्षिका
विज्ञापन
तनाव दूर करने के लिए मनोवैज्ञानिकों से भी कराई जा रही काउंसलिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिकोहाबाद(फिरोजाबाद)। कोरोना संक्रमण के कारण दो वर्ष तक बच्चों ने विकल्प के तौर पर ऑनलाइन शिक्षा ली। इससे उन पर मानसिक तनाव हावी हो गया। कई विद्यार्थी अवसाद में भी आ गए। बिना परीक्षाओं के विद्यार्थी अगली कक्षाओं में प्रमोट कर दिए गए। अब स्कूल खुलने के बाद पढ़ाई संबंधी कई दिक्कतें सामने आ रहीं हैं। इसे देखते हुए स्कूल संचालक प्रतियोगिता, योगाभ्यास और संवाद के सहारे बच्चों का मनोबल बढ़ाने में जुटे हैं। तनाव दूर करने के लिए काउंसलिंग का भी सहारा लिया जा रहा है।
सेंट जेबी ग्लोबल एकेडमी के प्रबंध निदेशक डॉ. रामकैलाश यादव ने बताया कि बच्चों में आए बदलावों को दूर करने व आत्म विश्वास जगाने के लिए अध्यापकों के साथ प्रधानाचार्य बच्चों से संवाद करते हैं। प्रार्थना के समय उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है। योगाभ्यास, प्राणायाम भी कराया जा रहा है। लिखने और पढ़ने की ललक पैदा करने के लिए कई प्रतियोगिताएं कराईं जा रही हैं। जिससे उनका मनोबल बढ़े। कुछ बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं भी लगाई जा रहीं हैं।
विज्ञापन
- ऑनलाइन पढ़ाई में नेटवर्क की भी समस्या रहती थी। 10 से 15 मिनट बाद आता तो इतनी देर बैठे बोर हो जाते थे। ऑफलाइन में समय से कक्षाएं चल रहीं हैं। जो प्रश्न नहीं आता है, उसे पूछकर समस्या का समाधान कर लेते हैं।
विज्ञापन
- अभिषेक कुमार छात्र
- ग्रामीण अंचल में नेटवर्क की समस्या अधिक है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे ऑन लाइन पढ़ाई का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। ऑफ लाइन क्लास में सभी बच्चे आकर समय से अध्ययन कर रहे हैं। अपनी जिज्ञासा को भी शांत कर रहे हैं।
- जयंत यादव, छात्र
- ऑनलाइन पढ़ाई में सबसे बड़ी समस्या होती थी कि जो विषय उन्हें समझ में नहीं आया, तो उसे अध्यापक से पूछने में दिक्कत होती थी। ऑफलाइन में यह समस्या नहीं आती है। कोरोना काल में आईं कमियों को शिक्षक दूर कर रहे हैं।
- सौम्या कक्षा, छात्रा
- ऑनलाइन कक्षा में अकेले बैठ कर पढ़ाई करनी पड़ती थी। साथ ही घर में शोर के कारण और नेटवर्क कारण पढ़ाई बाधित होती थी। अब स्कूल आने पर पुराने साथियों से भी बैठ कर जो विषय नहीं आता है, उस पर एक दूसरे से वार्ता कर समझ लिया जाता है।
- डौली बघेल, छात्रा
- कोरोना महामारी के चलते दो साल ऑनलाइन पढ़ाई हुई। अब शिक्षक उनमें आई कमियों को दुरुस्त करने में जुटे हैं। शिक्षक बच्चों से बात कर रहे हैं, जिससे छात्र-छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। जल्दी ही पुराने दिनों को भूल कर नये माहौल में समायोजित हो जाएंगे।
- लक्ष्मी, छात्रा
कोरोना काल में अध्यापक छात्रों को ऑन लाइन के माध्यम से पढ़ाई कराते रहे हैं। इसके लिए उन्हें पहले तैयारी करनी पड़ती थी और फिर बच्चों को पढ़ाना पड़ता था। इससे उन्हें काफी समय लग जाता था। कोरोना काल में बच्चों का शिक्षा के स्तर में काफी कमी आई थी। बच्चों को लिखने का अभ्यास कराने के साथ पढ़ाई का भी अभ्यास कराया जा रहा है।
- संध्या राजपूत, शिक्षिका