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जलभराव : खुद का आशियाना, फिर भी तीन महीने किराए के मकान में काटते जिंदगी
Thu, 13 Jul 2023 12:35 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Thu, 13 Jul 2023 12:35 AM IST
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फिरोजाबाद। जलभराव के कारण शहर की नई आबादी के मोहल्ला प्रेमनगर सैलई के सौ परिवार अपने घरों को छोड़कर जाने को मजबूर हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश की वजह से यहां की स्थिति खराब हो गई है। गलियों से लेकर मुख्य मार्ग पर पानी जमा है, जिसकी निकासी के कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में लोगों के घरों तक पानी में डूब गए हैं। इसकी वजह से कई मकानों में दरारें आ गई हैं। वहीं कई घरों में ताला लगाकर दूसरी कॉलोनियों में किराए पर या अपने रिश्तेदार के घर रहने को मजबूर हैं।
लगभग 20 साल पहले बसा वार्ड संख्य एक का मोहल्ला प्रेमनगर सैलई आज भी नगर निगम द्वारा शहरी क्षेत्र में कराए जा रहे विकास कार्यों से अछूता है। इस मोहल्ला व वार्ड में पेयजल, प्रकाश और नाली-खड़ंजा से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं पटरी से पूरी तरह उतरीं हैं। यही कारण है कि हर साल तीन माह के लिए इस मोहल्ला के करीब 100 परिवार अपने-अपने आशियानों में ताले लगाकर दूसरी जगह रहने चले जाते हैं। इलाकाई लोगों का कहना है कि वर्ष 2017 में नगर निगम बनने के बाद दलित और अति पिछड़ा वर्ग की लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस वार्ड से जुड़े मोहल्ला प्रेमनगर के वाशिंदाओं की दुश्वारियां कुछ ज्यादा ही हैं।
यहां सीवर लाइन तो डाली जा चुकी है, लेकिन गंदे पानी की निकासी को नाली-नाला बनाने की सुध किसी ने नहीं ली। यही कारण है कि इस मोहल्ला के करीब 100 परिवार हर साल वर्षाकाल (जुलाई, अगस्त और सितंबर) के बीच लाखों की लागत वाले अपने-अपने आशियानों (घरों) में ताले डालकर रिश्तेदारी या किराए के मकान में रहने चले जाते हैं।
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सैलई नाला निर्माण में हुई लापरवाही 15 साल से दे रही दर्द
क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि सैलई नाला को पक्का करते वक्त कार्यदायी संस्था के ठेकेदार ने हद दर्जे की लापरवाही बरती। तत्कालीन जन प्रतिनिधियों से भी शिकायत की गई, लेकिन सैलई नाले से जुड़ने वाली अधिकांश नालियों का ढलान सही नहीं किया गया। जब नाला में पानी बढ़ता है, तो समूचा पानी प्रेमनगर के आबादी क्षेत्र में ही आता है।
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50 से अधिक मकान हो चुके हैं धरासाई
प्रेमनगर के आबादी क्षेत्र में अलग-अलग वर्षों में ज्यादा निचले भूखंड़ों पर बनाए करीब 50 से अधिक मकान जलभराव क कारण गिर चुके हैं। भवन गिरने की शिकायतें भी सामने आईं। लेकिन इन शिकायतों को अनसुना कर दिया गया।
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मुख्य नाला सफाई के नाम पर हुई सिर्फ खानापूरी
क्षेत्रीय बुजुर्गों ने बताया कि जून माह में सैलई नाले की सफाई कराई गई। जेसीबी से कराई गई सफाई के दौरान महज खानापूरी की गई। नालों के तली में जमी सिल्ट को साफ नहीं कराया गया। नाला की सफाई भी ठीक से हो जाती। तो लोगों राहत मिलने की उम्मीदें थीं। यहां बिजली के पोल नहीं हैं, लोग झंपर डालकर दूर दराज से बिजली की सप्लाई लेते हैं। रात के वक्त बरसात में गली में बिछे बिजली तारों होने वाले फॉल्ट और जलभराव के कारण लोग किसी अनहोनी की आशंका से सहम जाते हैं।-- -
सांसद, विधायक, महापौर व पार्षद सभी लोगों की चौखट पर चक्कर काट चुके हैं, अब हिम्मत जवाब दे चुकी है। इनके सामने अपने दर्द बयां करने का भी कोई फायदा नहीं। खुद का मकान होने के बाद भी पास के मोहल्ले में किराए पर रहना मजबूरी है।कमला देवी
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20 साल हो गए, मोहल्ला में नाली-खड़ंजा बनवाने के लिए गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। सैलई नाला का पानी हमारे मोहल्ला में आता है। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अपने बच्चों के जीवन की चिंता है। इसलिए बारिश खत्म होने तक दूसरी जगह रहेंगे।
-संजय कुमार
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-प्रेमनगर सैलई में जलभराव की शिकायत मेरे सामने आई है। स्थानीय पार्षद के प्रस्ताव के साथ मैं खुद जाकर वहां की हकीकत देखूंगी। जो कुछ जल्द से जल्द हो सकता है, वह निगम द्वारा किया जाएगा। इससे किसी को घर न छोड़ना पड़े।
-कामिनी राठौर, महापौर
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लगभग 20 साल पहले बसा वार्ड संख्य एक का मोहल्ला प्रेमनगर सैलई आज भी नगर निगम द्वारा शहरी क्षेत्र में कराए जा रहे विकास कार्यों से अछूता है। इस मोहल्ला व वार्ड में पेयजल, प्रकाश और नाली-खड़ंजा से जुड़ी मूलभूत सुविधाएं पटरी से पूरी तरह उतरीं हैं। यही कारण है कि हर साल तीन माह के लिए इस मोहल्ला के करीब 100 परिवार अपने-अपने आशियानों में ताले लगाकर दूसरी जगह रहने चले जाते हैं। इलाकाई लोगों का कहना है कि वर्ष 2017 में नगर निगम बनने के बाद दलित और अति पिछड़ा वर्ग की लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस वार्ड से जुड़े मोहल्ला प्रेमनगर के वाशिंदाओं की दुश्वारियां कुछ ज्यादा ही हैं।
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यहां सीवर लाइन तो डाली जा चुकी है, लेकिन गंदे पानी की निकासी को नाली-नाला बनाने की सुध किसी ने नहीं ली। यही कारण है कि इस मोहल्ला के करीब 100 परिवार हर साल वर्षाकाल (जुलाई, अगस्त और सितंबर) के बीच लाखों की लागत वाले अपने-अपने आशियानों (घरों) में ताले डालकर रिश्तेदारी या किराए के मकान में रहने चले जाते हैं।
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सैलई नाला निर्माण में हुई लापरवाही 15 साल से दे रही दर्द
क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि सैलई नाला को पक्का करते वक्त कार्यदायी संस्था के ठेकेदार ने हद दर्जे की लापरवाही बरती। तत्कालीन जन प्रतिनिधियों से भी शिकायत की गई, लेकिन सैलई नाले से जुड़ने वाली अधिकांश नालियों का ढलान सही नहीं किया गया। जब नाला में पानी बढ़ता है, तो समूचा पानी प्रेमनगर के आबादी क्षेत्र में ही आता है।
50 से अधिक मकान हो चुके हैं धरासाई
प्रेमनगर के आबादी क्षेत्र में अलग-अलग वर्षों में ज्यादा निचले भूखंड़ों पर बनाए करीब 50 से अधिक मकान जलभराव क कारण गिर चुके हैं। भवन गिरने की शिकायतें भी सामने आईं। लेकिन इन शिकायतों को अनसुना कर दिया गया।
मुख्य नाला सफाई के नाम पर हुई सिर्फ खानापूरी
क्षेत्रीय बुजुर्गों ने बताया कि जून माह में सैलई नाले की सफाई कराई गई। जेसीबी से कराई गई सफाई के दौरान महज खानापूरी की गई। नालों के तली में जमी सिल्ट को साफ नहीं कराया गया। नाला की सफाई भी ठीक से हो जाती। तो लोगों राहत मिलने की उम्मीदें थीं। यहां बिजली के पोल नहीं हैं, लोग झंपर डालकर दूर दराज से बिजली की सप्लाई लेते हैं। रात के वक्त बरसात में गली में बिछे बिजली तारों होने वाले फॉल्ट और जलभराव के कारण लोग किसी अनहोनी की आशंका से सहम जाते हैं।
सांसद, विधायक, महापौर व पार्षद सभी लोगों की चौखट पर चक्कर काट चुके हैं, अब हिम्मत जवाब दे चुकी है। इनके सामने अपने दर्द बयां करने का भी कोई फायदा नहीं। खुद का मकान होने के बाद भी पास के मोहल्ले में किराए पर रहना मजबूरी है।कमला देवी
20 साल हो गए, मोहल्ला में नाली-खड़ंजा बनवाने के लिए गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। सैलई नाला का पानी हमारे मोहल्ला में आता है। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अपने बच्चों के जीवन की चिंता है। इसलिए बारिश खत्म होने तक दूसरी जगह रहेंगे।
-संजय कुमार
-प्रेमनगर सैलई में जलभराव की शिकायत मेरे सामने आई है। स्थानीय पार्षद के प्रस्ताव के साथ मैं खुद जाकर वहां की हकीकत देखूंगी। जो कुछ जल्द से जल्द हो सकता है, वह निगम द्वारा किया जाएगा। इससे किसी को घर न छोड़ना पड़े।
-कामिनी राठौर, महापौर