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जनता को राहत पहुंचाने के लिए कवायद
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 03 Dec 2015 07:54 PM IST
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नगर निगम द्वारा जनता से मनमाने टैक्स वसूली को लेकर नगर विधायक प्रदेश स्तर पर दोहरी लड़ाई लड़ रहे रहे हैं। नगर विधायक की पहल यदि रंग लाई तो टैक्स के मामले में शहर की जनता को बड़ी राहत मिलेगी।
पालिका से नगर निगम बनने के बाद जनता से अनाप-शनाप दरों पर टैक्स वसूली शुरू कर दी गई। इसका आम जनता के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी विरोध किया। नगर विधायक मनीष असीजा ने आम जनता की लड़ाई को विधानसभा तक गंभीरता से उठाया। इसका परिणाम यह हुआ कि निगम प्रशासन 50 प्रतिशत तक टैक्स दरें कम करने को मजबूर हो गया। हालांकि वर्तमान टैक्स दरों को लेकर मामला हाईकोर्ट में है। लायर्स क्लब द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने नगर निगम से जवाब तलब कर लिया है।
इधर, नगर विधायक द्वारा आम जनता के हित में मनमाने टैक्स वसूली के खिलाफ दूसरी लड़ाई विधानसभा में शुरू कर दी है। नगर निगम द्वारा टैक्स में नियमानुसार छूट प्रदान की जाती है। नगर निगम द्वारा 10 साल पुराने मकान पर 25 प्रतिशत, 20 साल से अधिक पुराने मकान पर 32.50 प्रतिशत और 25 साल से ऊपर पर 40 प्रतिशत छूट का प्रावधान है। यदि किसी मकान पर कॉमर्शियल गतिविधि संचालित है तो छूट नहीं दी जाती। वहीं भवन स्वामी से तीन गुना टैक्स लिया जाता है। नगर विधायक का कहना है कि कोई गरीब परिवार छोटी-मोटी दुकान खोल कर किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है तो वह तीन गुना टैक्स कहां से देगा? दूसरा मामला नगर निगम द्वारा टैक्स वसूली को चार कैटेगिरी बनाई गई हैं, इसमें भी नगर निगम द्वारा मनमानी की जा रही है। कच्चे मकान को अन्य पक्का में दर्शाकर अधिक टैक्स वसूली की जा रही है। नगर विधायक ने बताया कि विधानसभा में कामर्शियल भवन पर तीन गुना टैक्स लेने व कच्चे मकान को अन्य पक्का में दर्शाकर वसूली करने की लड़ाई विधानसभा में लड़ी जा रही है। उम्मीद है कि इस लड़ाई में सफलता मिलेगी।
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हाईकोर्ट के निर्णय के बाद देंगे टैक्स, बैरंग लौटे टीसी
मनमाने रूप से टैक्स वसूली के मामले में हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी कर जवाब तलब किए जाने के बाद टैक्स वसूली में लगे कर संग्रहकर्ताओं के कदम ठिठक गए हैं। रामनगर, लेबर कालोनी, चंद्रवार गेट, हनुमान गंज, इंडस्ट्रियल एरिया सहित अन्य क्षेत्रों में भवन स्वामियों ने स्पष्ट कहा कि पहले तो गलत रूप से टैक्स लगाया है, उसे सही कराओ। हाईकोर्ट का निर्णय आने से पहले कोई टैक्स जमा नहीं करेंगे। क्षेत्र में वसूली को कर्मचारियों को जनता ने खरी-खोटी सुनाईं और कर संग्रहकर्ताओं को बैरंग लौटना पड़ा।
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पालिका से नगर निगम बनने के बाद जनता से अनाप-शनाप दरों पर टैक्स वसूली शुरू कर दी गई। इसका आम जनता के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी विरोध किया। नगर विधायक मनीष असीजा ने आम जनता की लड़ाई को विधानसभा तक गंभीरता से उठाया। इसका परिणाम यह हुआ कि निगम प्रशासन 50 प्रतिशत तक टैक्स दरें कम करने को मजबूर हो गया। हालांकि वर्तमान टैक्स दरों को लेकर मामला हाईकोर्ट में है। लायर्स क्लब द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने नगर निगम से जवाब तलब कर लिया है।
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इधर, नगर विधायक द्वारा आम जनता के हित में मनमाने टैक्स वसूली के खिलाफ दूसरी लड़ाई विधानसभा में शुरू कर दी है। नगर निगम द्वारा टैक्स में नियमानुसार छूट प्रदान की जाती है। नगर निगम द्वारा 10 साल पुराने मकान पर 25 प्रतिशत, 20 साल से अधिक पुराने मकान पर 32.50 प्रतिशत और 25 साल से ऊपर पर 40 प्रतिशत छूट का प्रावधान है। यदि किसी मकान पर कॉमर्शियल गतिविधि संचालित है तो छूट नहीं दी जाती। वहीं भवन स्वामी से तीन गुना टैक्स लिया जाता है। नगर विधायक का कहना है कि कोई गरीब परिवार छोटी-मोटी दुकान खोल कर किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा है तो वह तीन गुना टैक्स कहां से देगा? दूसरा मामला नगर निगम द्वारा टैक्स वसूली को चार कैटेगिरी बनाई गई हैं, इसमें भी नगर निगम द्वारा मनमानी की जा रही है। कच्चे मकान को अन्य पक्का में दर्शाकर अधिक टैक्स वसूली की जा रही है। नगर विधायक ने बताया कि विधानसभा में कामर्शियल भवन पर तीन गुना टैक्स लेने व कच्चे मकान को अन्य पक्का में दर्शाकर वसूली करने की लड़ाई विधानसभा में लड़ी जा रही है। उम्मीद है कि इस लड़ाई में सफलता मिलेगी।
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हाईकोर्ट के निर्णय के बाद देंगे टैक्स, बैरंग लौटे टीसी
मनमाने रूप से टैक्स वसूली के मामले में हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी कर जवाब तलब किए जाने के बाद टैक्स वसूली में लगे कर संग्रहकर्ताओं के कदम ठिठक गए हैं। रामनगर, लेबर कालोनी, चंद्रवार गेट, हनुमान गंज, इंडस्ट्रियल एरिया सहित अन्य क्षेत्रों में भवन स्वामियों ने स्पष्ट कहा कि पहले तो गलत रूप से टैक्स लगाया है, उसे सही कराओ। हाईकोर्ट का निर्णय आने से पहले कोई टैक्स जमा नहीं करेंगे। क्षेत्र में वसूली को कर्मचारियों को जनता ने खरी-खोटी सुनाईं और कर संग्रहकर्ताओं को बैरंग लौटना पड़ा।