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Firozabad News: न्यायालय में फर्जी दस्तावेज लगाकर जमानत दिलाने वाले तीन शातिर गिरफ्तार
Wed, 15 Apr 2026 07:39 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 15 Apr 2026 07:39 PM IST
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रसूलपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार फर्जी जमानत लेने वाले तीन शातिर आरोपी। स्रोतः पुलिस
- फोटो : रसूलपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार फर्जी जमानत लेने वाले तीन शातिर आरोपी। स्रोतः पुलिस
फिरोजाबाद। थाना रसूलपुर पुलिस ने कूटरचित दस्तावेज के आधार पर अपराधियों की जमानत कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बुधवार को तीन सदस्यों को मोढ़ा चौराहे से गिरफ्तार किया।
पकड़े गए आरोपियों में वीरेंद्र उर्फ वीके, वीरपाल और यादराम (तीनों निवासी नारखी क्षेत्र) शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने आर्म्स एक्ट में जेल में बंद अभियुक्त सुहैब उर्फ लाला को रिहा कराने के लिए होरीलाल नाम के व्यक्ति के दस्तावेज का दुरुपयोग किया और फोटो बदलकर फर्जी जमानतदार पेश किए।
इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस सत्यापन के लिए होरीलाल के घर पहुंची। पीड़ित की शिकायत पर 22 दिसंबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस अब इस प्रकरण में संबंधित अधिवक्ता और जेल में बंद सुहैब की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है।
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जांच के घेरे में अधिवक्ता और मुख्य आरोपी
पुलिस अब इस मामले में अधिवक्ता की संलिप्तता और जेल में बंद सुहैब की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं जो अदालती प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर रहे थे।
यह न्यायपालिका के साथ धोखाधड़ी का गंभीर मामला है। आरोपियों ने पहचान छिपाकर फर्जी दस्तावेज दाखिल किए। पकड़े गए आरोपियों में वीरपाल और यादराम का पहले से आपराधिक इतिहास है। अन्य आरोपियों और इसमें शामिल अन्य की भी जांच की जा रही है।
- प्रवीण कुमार तिवारी, सीओ सिटी
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पकड़े गए आरोपियों में वीरेंद्र उर्फ वीके, वीरपाल और यादराम (तीनों निवासी नारखी क्षेत्र) शामिल हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने आर्म्स एक्ट में जेल में बंद अभियुक्त सुहैब उर्फ लाला को रिहा कराने के लिए होरीलाल नाम के व्यक्ति के दस्तावेज का दुरुपयोग किया और फोटो बदलकर फर्जी जमानतदार पेश किए।
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इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार ने बताया कि मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस सत्यापन के लिए होरीलाल के घर पहुंची। पीड़ित की शिकायत पर 22 दिसंबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस अब इस प्रकरण में संबंधित अधिवक्ता और जेल में बंद सुहैब की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है।
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जांच के घेरे में अधिवक्ता और मुख्य आरोपी
पुलिस अब इस मामले में अधिवक्ता की संलिप्तता और जेल में बंद सुहैब की भूमिका की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं जो अदालती प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा कर रहे थे।
यह न्यायपालिका के साथ धोखाधड़ी का गंभीर मामला है। आरोपियों ने पहचान छिपाकर फर्जी दस्तावेज दाखिल किए। पकड़े गए आरोपियों में वीरपाल और यादराम का पहले से आपराधिक इतिहास है। अन्य आरोपियों और इसमें शामिल अन्य की भी जांच की जा रही है।
- प्रवीण कुमार तिवारी, सीओ सिटी