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उद्योगों का सर्वे कर लौटी नीरी की टीम
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 13 Aug 2015 11:19 PM IST
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फीरोजाबाद। सुहागनगरी में प्रदूषण के वास्तविक कारणों की जांच को नागपुर से आई नीरी की टीम पांच दिन तक कांच उद्योगों का सर्वे कर गुरुवार को वापस लौट गई। पांच दिन के सर्वे में नीरी की टीम ने सभी चूड़ी एवं ग्लास कांच इकाई से संबंधित आंकड़े जुटाए हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर नीरी की टीम आगे जांच बढ़ाएगी।
सुहागनगरी के कांच उद्योग पर बढ़ते प्रदूषण के मानक को लेकर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसके लिए पर्यावरण वन मंत्रालय, एनजीटी सहित अन्य स्थानों पर शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। टीटीजेड अथॉरिटी के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा प्रदूषण के वास्तविक कारण जानने को नागपुर की संस्था नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) से संपर्क किया है। शनिवार को डा. जार्ज के नेतृत्व में नीरी की टीम फीरोजाबाद आई थी। नीरी की चार सदस्यीय टीम ने फीरोजाबाद के सभी 200 कांच इकाइयों का सर्वे किया। इसमें टीम ने इकाई की लोकेशन, इकाई में कितनी चिमनी हैं, क्या आइटम बनता है, कितनी क्षमता है। कारखानों के गेट पर खड़े होकर गूगल मैप के लिए लोकेशन भी ट्रैस की। पांच दिन के सर्वे के बाद गुरुवार को नीरी की टीम वापस लौट गई।
इस संबंध में उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नीरी की टीम द्वारा पांच दिन में शहर की सभी इकाइयों का सर्वे कर आंकड़े एकत्रित किए गए हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार की नीरी आगे जांच करेगी।
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हर इकाई की डिटेल होगी ऑनलाइन
नीरी की टीम द्वारा पांच दिन तक किए गए सर्वे में सभी इकाइयों की डिटेल तैयार की गई। इसी डिटेल के आधार पर टीम ने जीआईएस मैपिंग कार्य पूर्ण कर लिया है। अब नीरी द्वार हर इकाई की डिटेल आनलाइन की जाएगी। इससे देश-विदेश में कहीं भी बैठकर कोई भी व्यक्ति किसी भी इकाई के संबंध में जानकारी हासिल कर सकेगा।
सितंबर माह से शुरू होगी विस्तार जांच
नीरी की टीम द्वारा अभी बरसात का मौसम होने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ाई जा सकती थी, बरसात के मौसम में प्रदूषण के वास्तविक कारण सामने नहीं आ सकते। उपायुक्त उद्योग ने बताया कि सितंबर माह में नीरी द्वारा विस्तृत रूप से जांच शुरू की जाएगी। सितंबर माह में काफी हद तक स्थिति साफ हो जाएगी।
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सुहागनगरी के कांच उद्योग पर बढ़ते प्रदूषण के मानक को लेकर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसके लिए पर्यावरण वन मंत्रालय, एनजीटी सहित अन्य स्थानों पर शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। टीटीजेड अथॉरिटी के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा प्रदूषण के वास्तविक कारण जानने को नागपुर की संस्था नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) से संपर्क किया है। शनिवार को डा. जार्ज के नेतृत्व में नीरी की टीम फीरोजाबाद आई थी। नीरी की चार सदस्यीय टीम ने फीरोजाबाद के सभी 200 कांच इकाइयों का सर्वे किया। इसमें टीम ने इकाई की लोकेशन, इकाई में कितनी चिमनी हैं, क्या आइटम बनता है, कितनी क्षमता है। कारखानों के गेट पर खड़े होकर गूगल मैप के लिए लोकेशन भी ट्रैस की। पांच दिन के सर्वे के बाद गुरुवार को नीरी की टीम वापस लौट गई।
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इस संबंध में उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नीरी की टीम द्वारा पांच दिन में शहर की सभी इकाइयों का सर्वे कर आंकड़े एकत्रित किए गए हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार की नीरी आगे जांच करेगी।
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हर इकाई की डिटेल होगी ऑनलाइन
नीरी की टीम द्वारा पांच दिन तक किए गए सर्वे में सभी इकाइयों की डिटेल तैयार की गई। इसी डिटेल के आधार पर टीम ने जीआईएस मैपिंग कार्य पूर्ण कर लिया है। अब नीरी द्वार हर इकाई की डिटेल आनलाइन की जाएगी। इससे देश-विदेश में कहीं भी बैठकर कोई भी व्यक्ति किसी भी इकाई के संबंध में जानकारी हासिल कर सकेगा।
सितंबर माह से शुरू होगी विस्तार जांच
नीरी की टीम द्वारा अभी बरसात का मौसम होने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ाई जा सकती थी, बरसात के मौसम में प्रदूषण के वास्तविक कारण सामने नहीं आ सकते। उपायुक्त उद्योग ने बताया कि सितंबर माह में नीरी द्वारा विस्तृत रूप से जांच शुरू की जाएगी। सितंबर माह में काफी हद तक स्थिति साफ हो जाएगी।