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सात बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
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सात बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
फिरोजाबाद। नारखी क्षेत्र के गांव फतेहपुरा निवासी रामेश्वर की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों की माने तो रामेश्वर की माली हालत ठीक नहीं है। रामेश्वर के सात बच्चे है। एक बेटे की शादी रामेश्वर ने कर दी है, जबकि छह बच्चे अविवाहित हैं।
परिजनों नेबताया कि रामेश्वर के पास मात्र दस बीघा ही जमीन थी, जबकि 15 बीघा बटाई पर लेकर वह खेती करता था। एक सप्ताह पूर्व बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल बर्बाद होने से वह मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। परिजनों ने काफी समझाया, लेकिन वह चुपचाप ही रहता था। ज्यादातर खेतों पर फसलों को ही देखता रहता। प्रशासन द्वारा खराब फसलों का सर्वे भी कराया गया था। नुकसान के मुकाबले मुआवजे मिलने की गुंजाइश कम होने के कारण वह रामेश्वर आहत दिखाई दे रहा था।
परिजनों ने बताया कि जब रात तक भी रामेश्वर नहीं लौटा तो उन्होंने व अन्य ग्रामीणों ने काफी खोजबीन की। रिश्तेदारों के पास भी फोन कर पूछा, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। सुबह एक किसान के खेत पर जाने रामेश्वर की मौत का पता चला। रामेश्वर की मौत से परिजनों का रो रोकर बुराहाल है। वहीं दिनभर लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचते रहे।
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फिरोजाबाद। नारखी क्षेत्र के गांव फतेहपुरा निवासी रामेश्वर की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों की माने तो रामेश्वर की माली हालत ठीक नहीं है। रामेश्वर के सात बच्चे है। एक बेटे की शादी रामेश्वर ने कर दी है, जबकि छह बच्चे अविवाहित हैं।
परिजनों नेबताया कि रामेश्वर के पास मात्र दस बीघा ही जमीन थी, जबकि 15 बीघा बटाई पर लेकर वह खेती करता था। एक सप्ताह पूर्व बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल बर्बाद होने से वह मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। परिजनों ने काफी समझाया, लेकिन वह चुपचाप ही रहता था। ज्यादातर खेतों पर फसलों को ही देखता रहता। प्रशासन द्वारा खराब फसलों का सर्वे भी कराया गया था। नुकसान के मुकाबले मुआवजे मिलने की गुंजाइश कम होने के कारण वह रामेश्वर आहत दिखाई दे रहा था।
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परिजनों ने बताया कि जब रात तक भी रामेश्वर नहीं लौटा तो उन्होंने व अन्य ग्रामीणों ने काफी खोजबीन की। रिश्तेदारों के पास भी फोन कर पूछा, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। सुबह एक किसान के खेत पर जाने रामेश्वर की मौत का पता चला। रामेश्वर की मौत से परिजनों का रो रोकर बुराहाल है। वहीं दिनभर लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचते रहे।
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