{"_id":"695c022cb3dec7118308f49c","slug":"the-funeral-processions-of-the-father-and-two-innocent-sons-were-raised-together-firozabad-news-c-169-1-sagr1030-164584-2026-01-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Firozabad News: एक साथ उठीं पिता और दो मासूम बेटों की अर्थियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Firozabad News: एक साथ उठीं पिता और दो मासूम बेटों की अर्थियां
Mon, 05 Jan 2026 11:55 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Mon, 05 Jan 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
एक साथ तीन शव आने से गांव में गूंजा करूण रूदन
- फोटो : एक साथ तीन शव आने से गांव में गूंजा करूण रूदन
सिरसागंज (फिरोजाबाद)। मैं, कुछ देर में पहुंच रहा हूं, बच्चों को तैयार रखना... यह आखिरी शब्द थे विनीत के, जो उसने अपनी पत्नी शिल्पी से फोन पर कहे थे। लेकिन किसे पता था कि यह मुलाकात अब संभव नहीं होगी। सोमवार शाम 4 बजे जब आगरा-इटावा हाईवे हादसे के शिकार विनीत और उसके दो मासूम बेटों के शव गांव कौरारी खेड़ा पहुंचे, तो पूरा गांव रो उठा।
करौरी खेड़ा, सिरसांगज निवासी विनीत कुमार (40) की पत्नी शिल्पी अपने 5 वर्षीय छोटे बेटे आयुष के साथ 1 जनवरी को ही अपने मायके भिडरुआ (सैफई) चली गई थी। रविवार को वहां उसके भाई के बेटे की छठी का उत्सव था। इसी खुशी में शामिल होने के लिए विनीत अपने दो बेटों मोहित (10) और निशांत (8) के साथ घर से निकला था। जमुनाबाग के पास एक अनियंत्रित ट्रक ने उनकी खुशियों को रौंद दिया। सोमवार शाम जब गांव में तीन शव एक साथ आए, तो कोहराम मच गया।
विनीत अपने तीन भाइयों (सौरभ और अंकित) में सबसे बड़ा था। वह अपने वृद्ध पिता शैतान सिंह और भाइयों के साथ संयुक्त परिवार में रहते थे। ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर विनीत ही पूरे परिवार की नैया पार लगा रहा था। परिवार के मुखिया और वंश के दो दीपकों के एक साथ बुझ जाने से वृद्ध पिता और भाइयों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
विज्ञापन
शिल्पी की करुण पुकार...भगवान ने कहीं का नहीं छोड़ा
हादसे के सदमे में डूबी शिल्पी बार-बार बेसुध हो रही थी। उसके मुंह से बस एक ही बात निकल रही थी कि भगवान ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा। विनीत ने निकलने से पहले फोन पर जल्द पहुंचने का वादा किया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अब शिल्पी के पास सिर्फ 5 साल का मासूम आयुष ही बचा है, जिसकी ओर देख हर सांत्वना देने वाले की आंखें भर आ रही थीं।
पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे ग्रामीण
कौरारी खेड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग इस दुख की घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे। मानवता और ग्रामीण संवेदना का आलम यह था कि सोमवार को पूरे गांव में किसी भी घर का चूल्हा नहीं जला। हर कोई विनीत के सरल स्वभाव और बच्चों की मासूमियत को याद कर रो रहा था। नम आंखों के बीच गमगीन माहौल में तीनों का अंतिम संस्कार किया गया।
विज्ञापन
करौरी खेड़ा, सिरसांगज निवासी विनीत कुमार (40) की पत्नी शिल्पी अपने 5 वर्षीय छोटे बेटे आयुष के साथ 1 जनवरी को ही अपने मायके भिडरुआ (सैफई) चली गई थी। रविवार को वहां उसके भाई के बेटे की छठी का उत्सव था। इसी खुशी में शामिल होने के लिए विनीत अपने दो बेटों मोहित (10) और निशांत (8) के साथ घर से निकला था। जमुनाबाग के पास एक अनियंत्रित ट्रक ने उनकी खुशियों को रौंद दिया। सोमवार शाम जब गांव में तीन शव एक साथ आए, तो कोहराम मच गया।
विज्ञापन
विनीत अपने तीन भाइयों (सौरभ और अंकित) में सबसे बड़ा था। वह अपने वृद्ध पिता शैतान सिंह और भाइयों के साथ संयुक्त परिवार में रहते थे। ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर विनीत ही पूरे परिवार की नैया पार लगा रहा था। परिवार के मुखिया और वंश के दो दीपकों के एक साथ बुझ जाने से वृद्ध पिता और भाइयों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
विज्ञापन
शिल्पी की करुण पुकार...भगवान ने कहीं का नहीं छोड़ा
हादसे के सदमे में डूबी शिल्पी बार-बार बेसुध हो रही थी। उसके मुंह से बस एक ही बात निकल रही थी कि भगवान ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा। विनीत ने निकलने से पहले फोन पर जल्द पहुंचने का वादा किया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अब शिल्पी के पास सिर्फ 5 साल का मासूम आयुष ही बचा है, जिसकी ओर देख हर सांत्वना देने वाले की आंखें भर आ रही थीं।
पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे ग्रामीण
कौरारी खेड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोग इस दुख की घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे। मानवता और ग्रामीण संवेदना का आलम यह था कि सोमवार को पूरे गांव में किसी भी घर का चूल्हा नहीं जला। हर कोई विनीत के सरल स्वभाव और बच्चों की मासूमियत को याद कर रो रहा था। नम आंखों के बीच गमगीन माहौल में तीनों का अंतिम संस्कार किया गया।