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अंग्रेजी सेना ने लगाए थे महात्मा गांधी के जयकारे
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पंडित भूप सिंह शर्मा, स्वतंत्रता सेनानी (फाइल फोटो)
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। ब्रिटिश हुकूमत के अत्याचार से प्रताड़ित देशवासियों के मन में आजादी की ज्वाला भड़क रही थी। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हर दिन अंग्रेजी सेना को परास्त करने की नई रणनीति तैयार की थी। क्रांतिकारी पंडित भूप सिंह शर्मा के नेतृत्व में फिरोजाबाद के हिरन गांव स्टेशन को जलाने की रणनीति तैयार की थी। क्रांतिकारियों ने न सिर्फ अंग्रेजी सेना के हथियारों को गिरवा लिया बल्कि महात्मा गांधी के जयकारे लगाने को मजबूर कर दिया था। हैदराबाद रेजीमेंट सेना की कई कंपनियों ने आजादी के दीवानों को पकड़कर आगरा जेल भेजा था।
सुहागनगरी के इतिहास के पन्नों को पलटें तो अंग्रेेजों का विरोध करने के लिए देशभक्त हिरनगांव स्टेशन को 17 अगस्त 1942 को फूंक चुके थे। इसमें स्वतंत्रता सेनानी भूपसिंह ने भी बड़ी क्रांति छेड़ी थी। अंग्रेजों के फैसले को कैसे डगमगाया जाए। इसकी अगली रणनीति गांव गुंदाऊ में तैयार हो रही थी। तभी तानाशाह दरोगा इमदाद खां और तहसीलदार अंग्रेजी सेना के साथ इन्हें पकड़ने को आ गए थे।
सेना की बड़ी टुकड़ी होने के साथ ही हथियार से लैस होकर पहुंची थी लेकिन देशभक्ति के जज्बे ने आखिर फिरंगियों के हथियारों को गिरवा लिया था। स्वतंत्रता सेनानी ने अंग्रेेजों से भी महात्मा गांधी की जय के नारे कई बार लगवाए थे। सेना की टीम के खाली हाथ लौटने की खबर गवर्नर जनरल को उस समय तार द्वारा दी गई। इसके बाद हैदराबाद रेजिमेंट सेना की कई कंपनियां आजादी के दीवानों को पकड़ने के लिए फिरोजाबाद भेजी गईं।
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काफी प्रयास के बाद स्वतंत्रता सेनानी भूपसिंह को अंग्रेजी सेना ने गिरफ्तार करके उन्हें आगरा की जेल में भेज दिया था। पहले स्वतंत्रता सेनानी भूपसिंह के नाम पर स्टेडियम का नाम रखा गया था। बाद में स्टेडियम से स्वतंत्रता सेनानी का नाम हटा दिया और दाऊदयाल स्टेडियम कर दिया गया।
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सुहागनगरी के इतिहास के पन्नों को पलटें तो अंग्रेेजों का विरोध करने के लिए देशभक्त हिरनगांव स्टेशन को 17 अगस्त 1942 को फूंक चुके थे। इसमें स्वतंत्रता सेनानी भूपसिंह ने भी बड़ी क्रांति छेड़ी थी। अंग्रेजों के फैसले को कैसे डगमगाया जाए। इसकी अगली रणनीति गांव गुंदाऊ में तैयार हो रही थी। तभी तानाशाह दरोगा इमदाद खां और तहसीलदार अंग्रेजी सेना के साथ इन्हें पकड़ने को आ गए थे।
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सेना की बड़ी टुकड़ी होने के साथ ही हथियार से लैस होकर पहुंची थी लेकिन देशभक्ति के जज्बे ने आखिर फिरंगियों के हथियारों को गिरवा लिया था। स्वतंत्रता सेनानी ने अंग्रेेजों से भी महात्मा गांधी की जय के नारे कई बार लगवाए थे। सेना की टीम के खाली हाथ लौटने की खबर गवर्नर जनरल को उस समय तार द्वारा दी गई। इसके बाद हैदराबाद रेजिमेंट सेना की कई कंपनियां आजादी के दीवानों को पकड़ने के लिए फिरोजाबाद भेजी गईं।
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काफी प्रयास के बाद स्वतंत्रता सेनानी भूपसिंह को अंग्रेजी सेना ने गिरफ्तार करके उन्हें आगरा की जेल में भेज दिया था। पहले स्वतंत्रता सेनानी भूपसिंह के नाम पर स्टेडियम का नाम रखा गया था। बाद में स्टेडियम से स्वतंत्रता सेनानी का नाम हटा दिया और दाऊदयाल स्टेडियम कर दिया गया।