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तत्वार्थसूत्र में सभी ग्रंथों का सार - मुनि विज्ञ सागर

Sat, 10 Sep 2016 12:01 AM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Sat, 10 Sep 2016 12:01 AM IST
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Tatwarthsutra essence of all texts - Muni Vigya Sagar
तत्वार्थसूत्र में सभी ग्रंथों का सार - मुनि विज्ञ सागर - फोटो : Amar Ujala

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पर्यूषण महापर्व पर जैन मंदिरों में भक्ति की धूम है। भोर होते ही मंदिरों में घंटे बजने लगते हैं। जिनाभिषेक और पूजन से स्वर गूंजने लगते हैं। पीत वस्त्र में भक्तों की टोलियां महामंत्र णमोकार का उच्चारण करते हुए जैन मंदिरों की ओर जाती दिखाई देती है। दस धर्मों का प्रवचन और दश धर्मों का पूजन विशेष रुप से किया जा रहा है।
शहर के प्रमुख श्री छदामी लाल जैन मंदिर में मुनि विनम्र सागर के ससंघ सानिध्य में सामूहिक पूजन भक्ति संगीत के साथ चल रहा है। गांधी नगर, नई बस्ती, घेरखोखल, इंदिरा कालोनी, जैन नगर खेड़ा, छोटी छपैटी, बड़ा मोहल्ला, अट्टा वाला मोहल्ला स्थित प्राचीन जैन मंदिरों में भक्ति की धूम है।
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चंद्र प्रभु जैन मंदिर में दोपहर में आयोजित धर्मसभा में मां सरस्वती के पूजन के बाद एक उपवास का फल देने वाले ग्रंथराज तत्वार्थसूत्र के दसों अध्याय का सरस वाचन पंडित राजेश जैन ने किया। चतुर्थ अध्याय की विस्तृत विवेचना करते हुए जैन मुनि विज्ञसागर महाराज ने कहा कि संसार में ऐसी बहुत सी चीजें है जिनकी व्याख्या शब्दों में नहीं की जा सकती, उन्हीं में से एक तत्वार्थसूत्र ग्रंथ भी है। तत्वार्थसूत्र भी सभी ग्रंथों का ऐसा सार है, जिसको पढ़ने मात्र से धर्म के सभी ग्रंथों का ज्ञान हो जाता है।
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लोभ से मुक्त होना ही शौच धर्म है - डा. कमलेश
चंद्रप्रभु जैन मंदिर में सायंकालीन धर्मसभा में उत्तम शौच धर्म पर बोलते काशी से पधारे जैन विद्वान डा. कमलेश कुमार जैन ने कहा कि लोभ से मुक्त होने पर जो पवित्रता आती है वही शौच धर्म है। लोभ असंतोष को जन्म देता है। ज्ञान से हर तरह के लोभ पर विजय प्राप्त की जा सकती है। धर्मसभा में अजय जैन एडवोकेट, ललित रपरिया, ललतेश जैन, वीरेंद्र रैमजा, अनूप चंद्र एडवोकेट, जितेंद्र ज्ैान मुन्ना, सुरेश चंद्र जैन, महावीर जैन मामा आदि उपस्थित थे। मंदिर समिति के निवर्तमान मंत्री कुलदीप मित्तल जैन एडवोकेट नेे जानकारी देते हुये बताया कि शनिवार को रात्रि 8 बजे से डा. कमलेश जैन महापर्व के पांचवें सत्य धर्म पर प्रवचन देंगे।



भगवान पुष्पदंत का निर्वाण लाढू चढ़ाया
विभव नगर स्थित शांतिनाथ जिनालय में सामूहिक पूजा का क्रम राजेंद्र प्रसाद जैन राजू के निर्देशन में चौथे दिन भी जारी रहा। सुबह अभिषेक पूजन के बाद पुष्पदंत भगवान का भावसहित निर्वाण लाड़ू चढ़ाया गया। विधान में राजेन्द्र प्रसाद राजू और कुलदीप मित्तल जैन एडवोकेट ने मूलनायक शांतिनाथ भगवान की शांतिधारा की। इस अवसर पर इंद्राणी जैन, वर्षा जैन, आशा जैन आदि ने भजन भी प्रस्तुत किए। पंडित अनुराग जैन शास्त्री ने दशलक्षण पर अपने प्रवचन भी दिए।
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