{"_id":"8b0cfde22823e071a9521a033ada5221","slug":"swine-flu-bird-flu-handling-a-25-team-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू से निपटने को 25 टीम गठित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू से निपटने को 25 टीम गठित
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 23 Jan 2015 11:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू जैसे रोगों की रोकथाम के लिए जिले में भी तैयारी शुरू कर दी गई। डीएम विजय किरन आनंद के निर्देश पर पशु चिकित्सा विभाग ने 25 टीमों का गठन किया है। यह टीमें शहरी क्षेत्र से गांव तक निगरानी रखेंगी। इसके साथ ही कहीं एक साथ पक्षियों की मरने की खबर लगे तो वह सूचना भी क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी को दे सकते हैं।
सीबीओ डा. सुनील सिंह ने कहा कि स्वाइन फ्लू शूकरों से फैलता है। शूकर पालने वालों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। शूकरों का उपचार करते समय दस्ताने पहनें और मास्क लगाएं। शूकरों के बाड़े में जाने के साथ ही सेवलोन का प्रयोग करें। बाड़े के आस-पास ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें। इसके साथ ही बर्ड फ्लू (एच-5-एन वन वायरस) से बचाव की जरूरत है। जिले में 25 टीमों का गठन किया है। यह टीम अपने-अपने क्षेत्र में निगरानी रखेंगी। सावधानी को सभी मुर्गी फार्म हाउस से ब्लड का सैंपल लेकर जांच को मंडलीय प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है। यदि आकस्मिक मुर्गियों की मौत होती है तो तुरंत ही इसकी सूचना क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारियों को दें। दोनों ही रोगों के बचाव को शीघ्र ही सभी पशु चिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, फार्मासिस्ट और मुर्गियों का पालन करने वालों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
सावधानी
- स्वाइन फ्लू से बचाव को मास्क का प्रयोग करें।
- हाथों को एल्होकल फेसवॉश से साफ करें।
- अपना तौलिया और नेपकिन अलग ही रखें।
- स्वाइन फ्लू से प्रभावित व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाएं।
- टैमीफ्लू टेबलेट चिकित्सक की सलाह से पांच से सात दिन तक सेवन करें।
- मुर्गी पालन केंद्र के आस-पास पानी को एकत्रित नहीं होने दें।
- ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करते रहें।
विज्ञापन
सीबीओ डा. सुनील सिंह ने कहा कि स्वाइन फ्लू शूकरों से फैलता है। शूकर पालने वालों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है। शूकरों का उपचार करते समय दस्ताने पहनें और मास्क लगाएं। शूकरों के बाड़े में जाने के साथ ही सेवलोन का प्रयोग करें। बाड़े के आस-पास ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें। इसके साथ ही बर्ड फ्लू (एच-5-एन वन वायरस) से बचाव की जरूरत है। जिले में 25 टीमों का गठन किया है। यह टीम अपने-अपने क्षेत्र में निगरानी रखेंगी। सावधानी को सभी मुर्गी फार्म हाउस से ब्लड का सैंपल लेकर जांच को मंडलीय प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है। यदि आकस्मिक मुर्गियों की मौत होती है तो तुरंत ही इसकी सूचना क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारियों को दें। दोनों ही रोगों के बचाव को शीघ्र ही सभी पशु चिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, फार्मासिस्ट और मुर्गियों का पालन करने वालों की कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
विज्ञापन
सावधानी
- स्वाइन फ्लू से बचाव को मास्क का प्रयोग करें।
- हाथों को एल्होकल फेसवॉश से साफ करें।
- अपना तौलिया और नेपकिन अलग ही रखें।
- स्वाइन फ्लू से प्रभावित व्यक्ति से हाथ नहीं मिलाएं।
- टैमीफ्लू टेबलेट चिकित्सक की सलाह से पांच से सात दिन तक सेवन करें।
- मुर्गी पालन केंद्र के आस-पास पानी को एकत्रित नहीं होने दें।
- ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करते रहें।