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सुप्रीम संजीवनी: 43 इकाइयों में उत्पादन का पहिया घूमने की उम्मीद
Wed, 23 Apr 2025 11:31 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 23 Apr 2025 11:31 PM IST
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माउथ ब्लोइंग कारखाने में काम करते श्रमिक। संवाद
फिरोजाबाद। सुप्रीम कोर्ट का सकारात्मक रूख सुहागनगरी में औद्योगिक तरक्की व कामगारों के लिए आजीविका के नए द्वार खोलेगा। औपचारिकता पूरी करने के बाद बीते दस साल से गैस सप्लाई की आस में बैठीं 18 इकाइयाें में कांच की खनक गूंजने की उम्मीद हैं। वहीं 1996 में गैस आपूर्ति लेने से वंचित 25 अन्य इकाइयों को गैस सप्लाई की उम्मीद बंधी है।
वर्ष 1996 के दौरान कोयला चलित इकाइयों की सूची में शामिल 43 इकाइयां पुनर्चलन के लिए आज भी गैस सप्लाई की आस में हैं। इनमें से करीब 18 इकाइयों ने नेचुरल गैस सप्लाई के लिए गेल प्रशासन से आवश्यक औपचारिकता पूरी करने के साथ ही धरोहर राशि जमा करा दी। इन सभी 18 इकाइयों में अधिकांश इकाइयाें ने उत्पादन प्रक्रिया के मुहाने तक जरूरी व्यवस्थाएं भी पूरी करा ली हैं। गैस सप्लाई नहीं मिल पाने के कारण इन इकाइयों में लाखों की मशीन व बिल्डिंग आदि कंडम होने के कगार पर हैं। वहीं शेष 25 कांच इकाइयां टीटीजेड की बंदिशें हटने और गैस सप्लाई के लिए नए सिरे से आवेदन की आस में हैं।
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बीस हजार से ज्यादा कामगारों के लिए रोजगार सृजन के अवसर
औद्योगिक सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का रूख सकारात्मक रहा तो अरसे से बंद कांच इकाइयों में भी कांच की खनक गूंजेगी। इन इकाइयों में कांच आयटम व चूड़ी उत्पादन शुरू होने के बाद शहर के करीब 20000 कामगारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। वहीं 10 हजार अन्य श्रमिकों को भी आजीविका के साधन सुलभ होंगे।
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इन इकाइयों को दस साल से नेचुरल गैस सप्लाई का इंतजार-
वीरेंद्र कुमार-नन्नूमल, एम्पायर ग्लास, गोविंद ग्लास, हनुमान ग्लास, रामदूत ग्लास वर्क्स,
अभी सुप्रीम न्यायालय के आदेश की प्रति नहीं मिली है। आदेश की प्रति मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। हालांकि आवेदक इकाइयों को पुनर्चलन निश्चित रूप से कांच उद्योग व कामगारों के लिए सकारात्मक पहलु साबित होगा।
राजेंद्र प्रसाद, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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वर्ष 1996 के दौरान कोयला चलित इकाइयों की सूची में शामिल 43 इकाइयां पुनर्चलन के लिए आज भी गैस सप्लाई की आस में हैं। इनमें से करीब 18 इकाइयों ने नेचुरल गैस सप्लाई के लिए गेल प्रशासन से आवश्यक औपचारिकता पूरी करने के साथ ही धरोहर राशि जमा करा दी। इन सभी 18 इकाइयों में अधिकांश इकाइयाें ने उत्पादन प्रक्रिया के मुहाने तक जरूरी व्यवस्थाएं भी पूरी करा ली हैं। गैस सप्लाई नहीं मिल पाने के कारण इन इकाइयों में लाखों की मशीन व बिल्डिंग आदि कंडम होने के कगार पर हैं। वहीं शेष 25 कांच इकाइयां टीटीजेड की बंदिशें हटने और गैस सप्लाई के लिए नए सिरे से आवेदन की आस में हैं।
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बीस हजार से ज्यादा कामगारों के लिए रोजगार सृजन के अवसर
औद्योगिक सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का रूख सकारात्मक रहा तो अरसे से बंद कांच इकाइयों में भी कांच की खनक गूंजेगी। इन इकाइयों में कांच आयटम व चूड़ी उत्पादन शुरू होने के बाद शहर के करीब 20000 कामगारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। वहीं 10 हजार अन्य श्रमिकों को भी आजीविका के साधन सुलभ होंगे।
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इन इकाइयों को दस साल से नेचुरल गैस सप्लाई का इंतजार-
वीरेंद्र कुमार-नन्नूमल, एम्पायर ग्लास, गोविंद ग्लास, हनुमान ग्लास, रामदूत ग्लास वर्क्स,
अभी सुप्रीम न्यायालय के आदेश की प्रति नहीं मिली है। आदेश की प्रति मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। हालांकि आवेदक इकाइयों को पुनर्चलन निश्चित रूप से कांच उद्योग व कामगारों के लिए सकारात्मक पहलु साबित होगा।
राजेंद्र प्रसाद, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड