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विश्व गौरेया दिवस : पांच वर्षों के सतत् प्रयासों के बाद जिले में बढ़ी गौरैया की वंशावली

Fri, 19 Mar 2021 07:32 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 19 Mar 2021 07:32 PM IST
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घरेलू चिड़िया या गौरैया। - फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। घर के आंगन में गौरेया की कुदक-फूदक और चहचहाहट अब गायब हो गई है। गौरैया की चहचहाट को वापस लाने के लिए वन विभाग प्रयास कर रहा है। यमुना की तलहटी में गौरैया को संरक्षित करने के प्रयास रंग लाए हैं। पिछले वर्ष वन रेंज में करीब 39500 गौरैया होने की रिपोर्ट जिले से शासन को भेजी गई। हालांकि अब यह प्रयास शहर और गांव के आमजनों को भी करने होंगे। पेश है विश्व गौरया दिवस पर एक रिपोर्ट।
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विलुप्त होती जा रही गौरेया के संरक्षण के लिए जनपद की सीमा में बहने वाली यमुना नदी की तलहटी में बसे करीब 20 गांवों विशेष कार्य योजना तैयार की गई है। वन विभाग द्वारा तैयार की गई कार्य योजना के तहत गौरेया के आखेट पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। वर्ष 2015-16 से शुरू हुए घरेलू चिड़िया संरक्षण मिशन के तहत फसल कटाई के दौरान वन विभाग द्वारा जन जागरूकता के साथ ही विभागीय बजट एवं पक्षी प्रेमियों के जरिए पेड़ों पर घोंसला लगाने के साथ ही दाना-पानी की व्यवस्था की जा रही है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 में जिले में 5500 गौरैया होने की अनुमान लगाया गया। अभियान के उपरांत वन विभाग द्वारा गत वर्ष 2019-20 के दौरान कराए सर्वे के दौरान जिले में करीब 39500 गौरैया होने की रिपोर्ट निदेशक वन विभाग लखनऊ को प्रेषित की गई।
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शिक्षक के प्रयासों से कीठौत में चला विशेष अभियान
परिषदीय विद्यालय कीठौत में प्रधानाध्यापक पद पर कार्यरत मोहम्मद शाहिद गौरैया के संरक्षण के लिए पांच साल से सतत प्रयत्नशील हैं। शिक्षक ने स्कूल परिसर के अलावा कीठौत के बाग-बगीचा आदि में गौरेया के घोंसला स्थापित कराए। प्रतिदिन घोंसला में दाना-पानी डालना मोहम्मद शाहिद की दिनचर्या में शामिल है।
वृक्षों के निरंतर कटान से कम हुई संख्या
पेड़ों के निरंतर कटान से गौरैया जैसे पक्षियों के आशियाने उजड़ गए। कच्चे घरों क ा स्थान पक्के मकानों ने ले लिया। पर्यावरण की अनदेखी गौरैया के जीवन पर भारी पड़ रही है। वहीं , मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडीएशन ने भी इस घरेलू चिड़िया को क्षति पहुंचाई है।

आज आयोजित होंगे विशेष कार्यक्रम
विश्व गौरेया दिवस के अवसर पर जिले की सभी छह वन रेंज में शनिवार को जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही गोष्ठी आयोजित होंगी। इस दौरान प्रकृति प्रेमियों की मदद से धान बाहुल्य एवं यमुना तलहटी में बसे गांव में विशेष रूप से गौरेया का घोंसला वितरण आदि कराया जाएगा। -स्वतंत्र कुमार श्रीवास्तव, प्रभारी वनाधिकारी फिरोजाबाद।
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