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सेटेलाइट कंट्रोलर के हाथ में होगी नान स्टॉपेज ट्रेनों की कमान
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 01 May 2015 11:17 PM IST
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दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग पर दौड़ने वाली नॉन स्टॉपेज सुपरफास्ट ट्रेनों को अब सेटेलाइट सिस्टम से कंट्रोल किया जाएगा। विभाग ने इसकी कवायद तेज कर दी है। टूंडला में सेटेलाइट ट्रैफिक कंट्रोल बनाया जाएगा। इसके तहत नान स्टॉप ट्रेन बिना अवरोधक दौडे़गी। अब रूट के बीच ऐसी ट्रेनों की मॉनिटरिंग स्टेशन मास्टरों को नहीं करनी होगी। यह अधिकार अब सिर्फ कंट्रोलर के पास होगा। योजना के अनुरूप इससे रेलवे हादसों में कमी आएगी, वहीं स्टेशन मास्टर पर वर्क लोड कम होगा। इसको लेकर फरवरी माह में किया गया ट्रायल सफल हो चुका है।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो दिल्ली से हावड़ा जाने वाली दर्जनों ट्रेन ऐसी है, जिनका स्टॉप दिल्ली से सीधा कानपुर सेंट्रल है। इसके बाद ये ट्रेेन कानपुर से इलाहाबाद और फिर हावड़ा रुकती हैं। ऐसे में इन ट्रेनों को स्टेशन मास्टर द्वारा ट्रैक खाली न होने एवं अन्य स्थितियों में ग्रीन सिग्नल न देकर रोक लिया जाता था। इसकी जानकारी कंट्रोलर को नहीं होती थी। इससे चलते ट्रेन लेट होने के साथ ही यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ता था। वहीं सुपर फास्ट और एक्सप्रेस ट्रेन भी अपने निर्धारित समय से लेट हो जाती थी। इस समस्या के समाधान के लिए अब ऐसी ट्रेनों को सेटेलाइट कंट्रोलर से कंट्रोल किया जाएगा। इसके लिए रेल अधिकारियों द्वारा फरवरी माह में टूंडला से बलरई तक ट्रायल भी किया गया, जो सफल हुआ। ट्रायल सफल होते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने कवायद तेज कर दी है। बता दें कि अभी तक ट्रेन पास कराने के साथ ही इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर द्वारा समीप के स्टेशन मास्टर को दी जाती थी। इससे अगले स्टेशन मास्टर को ट्रेन आने की जानकारी हो सके, लेकिन नई योजना के अमलीजामा पहनने के बाद ऐसा नहीं होगा। समीप के स्टेशन मास्टर को नानस्टाप ट्रेनों की कोई जानकारी नहीं होगी
टूंडला कंट्रोलर का क्षेत्र
गाजियाबाद से रूरा तक नॉन स्टापेज वाली ट्रेनों की मॉनिटरिंग टूंडला कंट्रोलर द्वारा की जाएगी। वहीं रूरा से इलाहाबाद तक की जिम्मेदारी कानपुर कंट्रोलर की होगी। सुपर फास्ट, एक्सप्रेस, पैसेंजर, मालगाड़ियों के संचालन की जिम्मेदारी प्रत्येक स्टेशन मास्टर की होगी।
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टूंडला पर सेटेलाइट ट्रैफिक कंट्रोल की स्थापना की जाएगी। इसके लिए किया गया ट्रायल सफल रहा है।
विजय कुमार, सीपीआरओ
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विभागीय अधिकारियों की मानें तो दिल्ली से हावड़ा जाने वाली दर्जनों ट्रेन ऐसी है, जिनका स्टॉप दिल्ली से सीधा कानपुर सेंट्रल है। इसके बाद ये ट्रेेन कानपुर से इलाहाबाद और फिर हावड़ा रुकती हैं। ऐसे में इन ट्रेनों को स्टेशन मास्टर द्वारा ट्रैक खाली न होने एवं अन्य स्थितियों में ग्रीन सिग्नल न देकर रोक लिया जाता था। इसकी जानकारी कंट्रोलर को नहीं होती थी। इससे चलते ट्रेन लेट होने के साथ ही यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ता था। वहीं सुपर फास्ट और एक्सप्रेस ट्रेन भी अपने निर्धारित समय से लेट हो जाती थी। इस समस्या के समाधान के लिए अब ऐसी ट्रेनों को सेटेलाइट कंट्रोलर से कंट्रोल किया जाएगा। इसके लिए रेल अधिकारियों द्वारा फरवरी माह में टूंडला से बलरई तक ट्रायल भी किया गया, जो सफल हुआ। ट्रायल सफल होते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने कवायद तेज कर दी है। बता दें कि अभी तक ट्रेन पास कराने के साथ ही इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर द्वारा समीप के स्टेशन मास्टर को दी जाती थी। इससे अगले स्टेशन मास्टर को ट्रेन आने की जानकारी हो सके, लेकिन नई योजना के अमलीजामा पहनने के बाद ऐसा नहीं होगा। समीप के स्टेशन मास्टर को नानस्टाप ट्रेनों की कोई जानकारी नहीं होगी
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टूंडला कंट्रोलर का क्षेत्र
गाजियाबाद से रूरा तक नॉन स्टापेज वाली ट्रेनों की मॉनिटरिंग टूंडला कंट्रोलर द्वारा की जाएगी। वहीं रूरा से इलाहाबाद तक की जिम्मेदारी कानपुर कंट्रोलर की होगी। सुपर फास्ट, एक्सप्रेस, पैसेंजर, मालगाड़ियों के संचालन की जिम्मेदारी प्रत्येक स्टेशन मास्टर की होगी।
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टूंडला पर सेटेलाइट ट्रैफिक कंट्रोल की स्थापना की जाएगी। इसके लिए किया गया ट्रायल सफल रहा है।
विजय कुमार, सीपीआरओ