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Firozabad News: 32 साल पुराने हत्याकांड में रिटायर्ड फौजी बरी
Wed, 01 Jul 2026 12:10 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 01 Jul 2026 12:10 AM IST
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सांकेतिक
- फोटो : सांकेतिक
फिरोजाबाद। थाना एका के ग्राम गींगना (हाल निवासी आगरा) में 1 जून 1994 को बच्चों के विवाद के बाद हुए एक हत्याकांड और जानलेवा हमले के मामले में सेशन कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास के चलते आरोपी रिटायर्ड फौजी विजेंद्र सिंह (69 वर्ष) को बरी कर दिया है। इस मामले में तीन सह-आरोपियों को साल 2001 में ही सजा हो चुकी थी, लेकिन घटना के वक्त विजेंद्र के फौज में होने के कारण गिरफ्तार न होने से उसके खिलाफ साल 2003 से अलग से सुनवाई चल रही थी।
आरोप था कि बच्चों के विवाद में विशेष कुमार और हरेंद्र के बीच हाथापाई के बाद विजेंद्र सिंह ने अपने भाइयों के साथ मिलकर फायरिंग की थी, जिसमें विशेष कुमार और उनकी भाभी रामढकेली घायल हो गए थे और रामढकेली की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस के नक्शे और वादी के बयानों में दिशाओं का भारी फेरबदल था। वादी का दावा था कि वह 24 फीट ऊंची छत पर था और आरोपी 14 फीट नीचे थे, ऐसे में नीचे से चली गोली से वादी की एड़ी में चोट लगना असंभव माना गया। मेडिकल और बैलिस्टिक रिपोर्ट के अनुसार वादी के शरीर पर गोली का कोई निशान नहीं था और मृतका के कपड़ों पर भी छर्रों के छेद नहीं मिले। इसके विपरीत, एक गवाह ने बयान दिया कि घटना के दिन असल में मृतका रामढकेली और वादी विशेष कुमार के बीच ही झगड़ा हुआ था। अदालत ने इन तमाम विरोधाभासों के चलते संदेह का लाभ देते हुए विजेंद्र सिंह को दोषमुक्त कर दिया।
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आरोप था कि बच्चों के विवाद में विशेष कुमार और हरेंद्र के बीच हाथापाई के बाद विजेंद्र सिंह ने अपने भाइयों के साथ मिलकर फायरिंग की थी, जिसमें विशेष कुमार और उनकी भाभी रामढकेली घायल हो गए थे और रामढकेली की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पुलिस के नक्शे और वादी के बयानों में दिशाओं का भारी फेरबदल था। वादी का दावा था कि वह 24 फीट ऊंची छत पर था और आरोपी 14 फीट नीचे थे, ऐसे में नीचे से चली गोली से वादी की एड़ी में चोट लगना असंभव माना गया। मेडिकल और बैलिस्टिक रिपोर्ट के अनुसार वादी के शरीर पर गोली का कोई निशान नहीं था और मृतका के कपड़ों पर भी छर्रों के छेद नहीं मिले। इसके विपरीत, एक गवाह ने बयान दिया कि घटना के दिन असल में मृतका रामढकेली और वादी विशेष कुमार के बीच ही झगड़ा हुआ था। अदालत ने इन तमाम विरोधाभासों के चलते संदेह का लाभ देते हुए विजेंद्र सिंह को दोषमुक्त कर दिया।
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