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सुहाग नगरी की रामलीला फोटो - धार्मिकता के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ा है रामलीला महोत्सव
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रामलीला मैदान स्थित अयोध्या पर तैयारी करते कर्मचारी
- फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी का रामलीला मेला महोत्सव धार्मिकता के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ा हुआ है। रामलीला परिसर में सालों से कई स्थायी शिविर बने हुए हैं। परशुराम शिविर, क्षत्रिय मंडल, लक्ष्मण शिविर का अलग ही महत्व है। रामलीला कमेटी के मुख्य कार्यालय का नाम अयोध्या जी है।
150 साल रामलीला मेला महोत्सव से कई दशकों से कुछ संस्थाएं जुड़ी हुई हैं। तिलक क्लब, तुलसी समिति, लक्ष्मण शिविर, परशुराम शिविर, क्षत्रीय मंडल से दशकों से जुडे़ हैं। तुलसी समिति की ओर से मेला में खयाल सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। क्षत्रीय मंडल ने करीब 25 वर्ष से रामलीला में जलशाला की सेवा दी है। लक्ष्मण शिविर और परशुराम शिविर से जुडे़ लोग मेला महोत्सव में आने वाले हजारों लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करते हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से कई बच्चे बाल्टी और मग लेकर लीला का मंचन देखने वालों को पानी पिलाते हैं। तिलक क्लब में शहर के प्रमुख लोग शामिल थे। पंडित बाल बिहारी लाल शर्मा, पीके तैलंग, कामरेड राम नरायन अग्रवाल जैसे कई प्रमुख लोग क्लब से जुडे़ हैं।
रामलीला मैदान में करीब पचास वर्ष पूर्व लक्ष्मण शिविर की स्थापना की गई थी। लक्ष्मण शिविर से जुडे़ बच्चे भी रामलीला में जलसेवा करते हैं। शिविर पर बने एक कक्ष में लक्ष्मण की प्रतिमा स्थापित है। चौडरे वाली देवी की प्रतिमा भी यहां स्थापित है।
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तिलक क्लब के संयोजक मनोज बंसल लल्ला बताते हैं कि क्लब का गठन 1925 में हुआ था। रामलीला मेला महोत्सव में हर साल कैंप लगाया जाता है। रामलीला मेला में तिलक क्लब की करीब बीस दिन गद्दी लगती थी। इस गद्दी पर शहर के सभी वर्ग और समाज के प्रबुद्धजन, समाजसेवी और उद्योगपति आकर बैठते थे और रामलीला का मंचन देखा करते थे। बताते हैं कि एमजी कॉलेज की योजना भी रामलीला परिसर में लगने वाले तिलक क्लब के शिविर में बनी थी।
जिला ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष संदीप तिवारी बताते हैं कि वर्ष 1972-73 में परशुराम शिविर की स्थापना रामलीला परिसर में हुई थी। 250 साल पुराना यहां पीपल का पेड़ है। उस समय यहां टीला हुआ करता था।
रामलीला कमेटी के सदस्य भूरी सिंह यादव बताते हैं कि रामलीला परिसर में रामलीला कमेटी का कार्यालय बना है। इस कार्यालय को अयोध्या जी के नाम से जाना जाता है। काफी पुरानी पद्यति से यह कार्यालय बना है।
प्राइवेट चिकित्सक संगठन रामलीला मेेला में पिछले 28 वर्ष से लगातार चिकित्सा शिविर लगा रहा है। मेला में आए लोगों को नि:शुल्क इलाज दिया जाता है। प्राइवेट चिकित्सक संगठन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार बताते हैं कि वर्ष 1991 में डॉ. सत्यकांत सिंह ने शिविर की शुरूआत की थी।
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150 साल रामलीला मेला महोत्सव से कई दशकों से कुछ संस्थाएं जुड़ी हुई हैं। तिलक क्लब, तुलसी समिति, लक्ष्मण शिविर, परशुराम शिविर, क्षत्रीय मंडल से दशकों से जुडे़ हैं। तुलसी समिति की ओर से मेला में खयाल सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। क्षत्रीय मंडल ने करीब 25 वर्ष से रामलीला में जलशाला की सेवा दी है। लक्ष्मण शिविर और परशुराम शिविर से जुडे़ लोग मेला महोत्सव में आने वाले हजारों लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करते हैं। इन संस्थाओं के माध्यम से कई बच्चे बाल्टी और मग लेकर लीला का मंचन देखने वालों को पानी पिलाते हैं। तिलक क्लब में शहर के प्रमुख लोग शामिल थे। पंडित बाल बिहारी लाल शर्मा, पीके तैलंग, कामरेड राम नरायन अग्रवाल जैसे कई प्रमुख लोग क्लब से जुडे़ हैं।
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रामलीला मैदान में करीब पचास वर्ष पूर्व लक्ष्मण शिविर की स्थापना की गई थी। लक्ष्मण शिविर से जुडे़ बच्चे भी रामलीला में जलसेवा करते हैं। शिविर पर बने एक कक्ष में लक्ष्मण की प्रतिमा स्थापित है। चौडरे वाली देवी की प्रतिमा भी यहां स्थापित है।
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तिलक क्लब के संयोजक मनोज बंसल लल्ला बताते हैं कि क्लब का गठन 1925 में हुआ था। रामलीला मेला महोत्सव में हर साल कैंप लगाया जाता है। रामलीला मेला में तिलक क्लब की करीब बीस दिन गद्दी लगती थी। इस गद्दी पर शहर के सभी वर्ग और समाज के प्रबुद्धजन, समाजसेवी और उद्योगपति आकर बैठते थे और रामलीला का मंचन देखा करते थे। बताते हैं कि एमजी कॉलेज की योजना भी रामलीला परिसर में लगने वाले तिलक क्लब के शिविर में बनी थी।
जिला ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष संदीप तिवारी बताते हैं कि वर्ष 1972-73 में परशुराम शिविर की स्थापना रामलीला परिसर में हुई थी। 250 साल पुराना यहां पीपल का पेड़ है। उस समय यहां टीला हुआ करता था।
रामलीला कमेटी के सदस्य भूरी सिंह यादव बताते हैं कि रामलीला परिसर में रामलीला कमेटी का कार्यालय बना है। इस कार्यालय को अयोध्या जी के नाम से जाना जाता है। काफी पुरानी पद्यति से यह कार्यालय बना है।
प्राइवेट चिकित्सक संगठन रामलीला मेेला में पिछले 28 वर्ष से लगातार चिकित्सा शिविर लगा रहा है। मेला में आए लोगों को नि:शुल्क इलाज दिया जाता है। प्राइवेट चिकित्सक संगठन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार बताते हैं कि वर्ष 1991 में डॉ. सत्यकांत सिंह ने शिविर की शुरूआत की थी।