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Firozabad News: मौसम में बदलाव से दमा रोगियों की बढ़ी दिक्कत, फूल रही सांस
Mon, 14 Oct 2024 11:30 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Mon, 14 Oct 2024 11:30 PM IST
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फिरोजाबाद। मौसम में बदलता और दिवाली का त्योहार पास आते ही घरों में हो रही सफाई के चलते उड़ती धूल दमा रोगियों की सांसें फुला रही है। मेडिकल कॉलेज में ही रोजाना ऐसे 20 से 25 मरीज आ रहे हैं। जिन्हें भर्ती करके ऑक्सीजन देकर राहत दी जा रही है। चिकित्सकों के मुताबिक, दमा रोगियों की सांस नलियों में सिकुड़न और सूजन आने से परेशानी बढ़ गई है।मौसम में बदलाव का असर लोगों की सेहत पर पड़ रह है। एक्यूआई भी दिनों दिन बिगड़ता जा रहा है। घरों में हो रही सफाई से धूल के कण हवा में घूल रहे हैं। इससे मौसम सांस के मरीजों के लिए समस्या बढ़ गई है। टीबी वार्ड में मरीज फुल हो गए हैं। इधर, दमा रोगियों की संख्या भी अस्पताल में बढ़ गई है। पहले पांच से छह ही मरीज आते थे। अब 20 से 25 मरीज सांस से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। बाल रोगियों को नेबुलाइजर देने की जरूरत पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसन विभागध्यक्ष डाॅ. मनोज कुमार ने बताया कि दिवाली पर घरों में साफ-सफाई होती है। वहीं, सुबह-शाम की ठंड और दोपहर में धूप खिलने से गर्मी हो जाती है। साफ-सफाई या रंगाई-पुताई की वजह से धूल के कण सांस के जरिए फेफड़े तक पहुंच जाते हैं। चूंकि, सांस मरीजों की सांस की नलियां संवेदनशील होती हैं। यह परेशानी अधिक होने पर दमा रोगियों का ऑक्सीजन लेवल कम होने लगता है।
इन बातों का रखें ख्याल
-अस्थमा का अटैक आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
-सांस रोगी दवा की पर्याप्त खुराक लें।
-इनहेलर साथ रखें, नियमित उपयोग करें।
-धूल आदि होने पर मास्क लगाएं।
ऐसे करें बचाव
-पैदल चलें, नियमित योग करें।
-शरीरिक रूप से सक्रिय रहें।
-मौसमी फलों का सेवन करें।
जिन बच्चों की बार-बार सांस फूलती है, उनकी इस सीजन में सांस तेज चल रही है। सुबह मौसम में नमी होने की वजह से वायरल रोगी भी बढ़ गए हैं। इन मरीजों की भी सांस तेज चलने लगती है। प्रतिदिन 8 से 10 मरीज भर्ती हो रहे हैं।
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डाॅ. एलके गुप्ता, बालरोग विशेषज्ञ
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मेडिकल कॉलेज के मेडिसन विभागध्यक्ष डाॅ. मनोज कुमार ने बताया कि दिवाली पर घरों में साफ-सफाई होती है। वहीं, सुबह-शाम की ठंड और दोपहर में धूप खिलने से गर्मी हो जाती है। साफ-सफाई या रंगाई-पुताई की वजह से धूल के कण सांस के जरिए फेफड़े तक पहुंच जाते हैं। चूंकि, सांस मरीजों की सांस की नलियां संवेदनशील होती हैं। यह परेशानी अधिक होने पर दमा रोगियों का ऑक्सीजन लेवल कम होने लगता है।
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इन बातों का रखें ख्याल
-अस्थमा का अटैक आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
-सांस रोगी दवा की पर्याप्त खुराक लें।
-इनहेलर साथ रखें, नियमित उपयोग करें।
-धूल आदि होने पर मास्क लगाएं।
ऐसे करें बचाव
-पैदल चलें, नियमित योग करें।
-शरीरिक रूप से सक्रिय रहें।
-मौसमी फलों का सेवन करें।
जिन बच्चों की बार-बार सांस फूलती है, उनकी इस सीजन में सांस तेज चल रही है। सुबह मौसम में नमी होने की वजह से वायरल रोगी भी बढ़ गए हैं। इन मरीजों की भी सांस तेज चलने लगती है। प्रतिदिन 8 से 10 मरीज भर्ती हो रहे हैं।
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डाॅ. एलके गुप्ता, बालरोग विशेषज्ञ