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Firozabad News: मेटा से मिला अलर्ट, आत्महत्या कर रहे फाइनेंसकर्मी को पुलिस ने मौत के मुंह से खींचा
Wed, 12 Nov 2025 12:11 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Wed, 12 Nov 2025 12:11 AM IST
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मेटा पर अलर्ट मिलने के बाद युवक की जान बचाने को पहुंची थाना रामगढ़ की पुलिस टीम। स्रोत: पुलिस
- फोटो : मेटा पर अलर्ट मिलने के बाद युवक की जान बचाने को पहुंची थाना रामगढ़ की पुलिस टीम। स्रोत: पुलिस
मेटा से मिला अलर्ट, आत्महत्या कर रहे फाइनेंसकर्मी को पुलिस ने मौत के मुंह से खींचा
- मेटा अलर्ट की गूंज लखनऊ तक पहुंची, रामगढ़ पुलिस ने किया सोमवार मध्यरात्रि सुपरफास्ट रेस्क्यू ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। थाना रामगढ़ पुलिस ने मेटा कंपनी (फेसबुक/इंस्टाग्राम की पेरेंट) के एक लाइफ-सेविंग अलर्ट पर सिर्फ 10 मिनट के भीतर कार्रवाई करते हुए अवसाद में डूबे 22 वर्षीय फाइनेंसकर्मी को मौत के मुहाने से वापस खींच लिया।
मामला थाना रामगढ़ क्षेत्र के संतोष नगर इलाके का है। यहां के रहने वाले 22 वर्षीय युवक, जो कि बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र है और एक फाइनेंस कंपनी में काम करता है। उसने सोमवार रात करीब 11:45 बजे, कर्ज के बोझ और कंपनी के असहनीय दबाव से टूटने का जिक्र करते हुए कपूर की गोली खाकर आत्महत्या करने का वीडियो सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया। वीडियो में वह कपूर की गोली खाते हुए दिख रहा था और कैप्शन में लिखा था, देखते हैं कल सुबह तक जिंदा रहा तो... बस मरने का इंतजार है।
साइबर मॉनिटरिंग में जुटी मेटा कंपनी ने इस खतरनाक पोस्ट को तुरंत फ्लैग किया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए, पुलिस महानिदेशक मुख्यालय, लखनऊ को ई-मेल के माध्यम से एक रेड-अलर्ट भेजा। यह सूचना हाईटेक पुलिसिंग के तहत बिजली की गति से रामगढ़ थाना तक पहुंची।
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सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर संजीव दुबे अपनी टीम के साथ महज 10 मिनट में युवक के घर पर पहुंच गए, जहां उन्हें युवक दर्द और अवसाद की स्थिति में मिला।
पुलिस ने तत्काल परिजनों की मदद से उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। इंस्पेक्टर ने न केवल पूछताछ की तो युवक ने बताया कि वह फाइनेंस कंपनी द्वारा बनाए जा रहे असहनीय वसूली दबाव से तंग आ गया था।
हाईटेक पुलिसिंग की जीत
एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इंस्पेक्टर संजीव दुबे ने इस हाई-स्पीड रेस्क्यू ऑपरेशन को कर साबित किया है कि यह हाईटेक पुलिसिंग की जीत है। मुख्यालय से मिली सटीक और त्वरित सूचना के कारण पुलिस समय रहते युवक की जिंदगी बचा पाई। भविष्य में ऐसी कोई गलती न हो, इसके लिए युवक की गहन काउंसलिंग की गई है।
बेटे के हाथ में नौकरी, घर में कर्ज का अंधेरा
- फाइनेंसकर्मी के डिजिटल सुसाइड नोट ने खोली वित्तीय दबाव की पोल
- युवक के पिता ने कहा, बेटे ने जिक्र तो किया था, पर ध्यान नहीं दिया, घटना के बाद परिवार ने चुकाए 40 हजार रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। फाइनेंसकर्मी युवक के डिजिटल सुसाइड नोट ने उसके कपड़े की दुकान चलाने वाले परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
युवक के पिता ने बताया कि वह एक कपड़े की दुकान चलाते हैं। परिवार में दो बेटे हैं। बड़ा बेटा उनके काम में हाथ बंटाता है, जबकि छोटे बेटे ने नौकरी की थी।
पिता ने दबी आवाज में स्वीकार किया, बेटे ने कर्ज के बारे में जिक्र तो किया था, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया। पता ही नहीं चल पाया कि नौकरी में रहते हुए उसने इतना बड़ा कर्ज कैसे कर लिया। पुलिस की काउंसलिंग में युवक ने बताया था कि कर्ज चुकाने के लिए फाइनेंस कंपनी द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था, जिसके कारण उसने किसी से पैसे भी उधार ले लिए थे। वह व्यक्ति भी रुपए मांगने लगा था। इससे वह गहरे अवसाद में चला गया। इधर, पिता ने मंगलवार को सबसे पहले एक व्यक्ति के 40 हजार रुपये वापस कराए।
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- मेटा अलर्ट की गूंज लखनऊ तक पहुंची, रामगढ़ पुलिस ने किया सोमवार मध्यरात्रि सुपरफास्ट रेस्क्यू ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। थाना रामगढ़ पुलिस ने मेटा कंपनी (फेसबुक/इंस्टाग्राम की पेरेंट) के एक लाइफ-सेविंग अलर्ट पर सिर्फ 10 मिनट के भीतर कार्रवाई करते हुए अवसाद में डूबे 22 वर्षीय फाइनेंसकर्मी को मौत के मुहाने से वापस खींच लिया।
मामला थाना रामगढ़ क्षेत्र के संतोष नगर इलाके का है। यहां के रहने वाले 22 वर्षीय युवक, जो कि बीएससी द्वितीय वर्ष का छात्र है और एक फाइनेंस कंपनी में काम करता है। उसने सोमवार रात करीब 11:45 बजे, कर्ज के बोझ और कंपनी के असहनीय दबाव से टूटने का जिक्र करते हुए कपूर की गोली खाकर आत्महत्या करने का वीडियो सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया। वीडियो में वह कपूर की गोली खाते हुए दिख रहा था और कैप्शन में लिखा था, देखते हैं कल सुबह तक जिंदा रहा तो... बस मरने का इंतजार है।
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साइबर मॉनिटरिंग में जुटी मेटा कंपनी ने इस खतरनाक पोस्ट को तुरंत फ्लैग किया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए, पुलिस महानिदेशक मुख्यालय, लखनऊ को ई-मेल के माध्यम से एक रेड-अलर्ट भेजा। यह सूचना हाईटेक पुलिसिंग के तहत बिजली की गति से रामगढ़ थाना तक पहुंची।
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सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर संजीव दुबे अपनी टीम के साथ महज 10 मिनट में युवक के घर पर पहुंच गए, जहां उन्हें युवक दर्द और अवसाद की स्थिति में मिला।
पुलिस ने तत्काल परिजनों की मदद से उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया। इंस्पेक्टर ने न केवल पूछताछ की तो युवक ने बताया कि वह फाइनेंस कंपनी द्वारा बनाए जा रहे असहनीय वसूली दबाव से तंग आ गया था।
हाईटेक पुलिसिंग की जीत
एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि इंस्पेक्टर संजीव दुबे ने इस हाई-स्पीड रेस्क्यू ऑपरेशन को कर साबित किया है कि यह हाईटेक पुलिसिंग की जीत है। मुख्यालय से मिली सटीक और त्वरित सूचना के कारण पुलिस समय रहते युवक की जिंदगी बचा पाई। भविष्य में ऐसी कोई गलती न हो, इसके लिए युवक की गहन काउंसलिंग की गई है।
बेटे के हाथ में नौकरी, घर में कर्ज का अंधेरा
- फाइनेंसकर्मी के डिजिटल सुसाइड नोट ने खोली वित्तीय दबाव की पोल
- युवक के पिता ने कहा, बेटे ने जिक्र तो किया था, पर ध्यान नहीं दिया, घटना के बाद परिवार ने चुकाए 40 हजार रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। फाइनेंसकर्मी युवक के डिजिटल सुसाइड नोट ने उसके कपड़े की दुकान चलाने वाले परिवार को झकझोर कर रख दिया है।
युवक के पिता ने बताया कि वह एक कपड़े की दुकान चलाते हैं। परिवार में दो बेटे हैं। बड़ा बेटा उनके काम में हाथ बंटाता है, जबकि छोटे बेटे ने नौकरी की थी।
पिता ने दबी आवाज में स्वीकार किया, बेटे ने कर्ज के बारे में जिक्र तो किया था, लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया। पता ही नहीं चल पाया कि नौकरी में रहते हुए उसने इतना बड़ा कर्ज कैसे कर लिया। पुलिस की काउंसलिंग में युवक ने बताया था कि कर्ज चुकाने के लिए फाइनेंस कंपनी द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा था, जिसके कारण उसने किसी से पैसे भी उधार ले लिए थे। वह व्यक्ति भी रुपए मांगने लगा था। इससे वह गहरे अवसाद में चला गया। इधर, पिता ने मंगलवार को सबसे पहले एक व्यक्ति के 40 हजार रुपये वापस कराए।