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पीएचसी: रंभा रही भैंस, जल रहे चूल्हे 

Sat, 05 Nov 2016 12:51 AM IST
अमर उजाला
अमर उजाला Updated Sat, 05 Nov 2016 12:51 AM IST
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PHC: Buffalo was Rambha, are burning stove
पीएचसी पर बंधी भ्‍ाैंस - फोटो : अमर उजाला
फोटो - 
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पीएचसी: रंभा रही भैंस, जल रहे चूल्हे 
स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ो रुपये खर्च , फिर भी जनता को नहीं मिल रहा इलाज

अमर उजाला ब्यूरो 
फीरोजाबाद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत जिले में संचालित स्वास्थ्य सेवाओं का हाल मत पूछिए। योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य केन्द्रों पर भैंस रंभा रही हैं। उपले थापे जा रहे हैं। भवन में गांव वाले चूल्हा बनाकर रोटी पका रहे हैं। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार को जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत पता की तो तस्वीर बड़ी डरावनी मिली। एनएचएम की टीम के दौरे से एक दिन पहले का यह हाल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की कड़वी सच्चाई बयां कर रहा है।

पीएचसी कायथा यानि भैंस, चूल्हा और भूसा  
उप स्वास्थ्य केंद्र का भवन जब से बना है, चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। बिल्डिंग को स्थानीय लोगों ने कब्जा लिया है। एक कमरे में मिट्टी का चूल्हा है तो फार्मासिस्ट कक्ष में भैंस बंधी हुई थी। दूसरे कमरों में भूसा भरा हुआ था। चारपाई भी बिछी हुई है यहां गांव वाले आराम फरमाते हैं। 
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सुनाव को डाक्टर नहीं मिला, भीतरी बना कूडाघर
सुनाव में स्वास्थ्य केंद्र जर्जर स्थिति में है। यहां आज तक चिकित्सक तैनात नहीं है। वहीं, स्वास्थ्य केंद्र भीतरी के बाहर क्षेत्रीय लोगों ने कूड़ा डालना शुरु कर दिया है। उपकेंद्र पर कूडे के ढेर नजर आते हैं।  
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जाटऊ कर रहा सीएचसी का इंतजार
2003 में बनी 30 बैड की सीएचसी आज तक शुरू नहीं हुई है। चुनावी माहौल में लाखों रूपये खर्च हुए, मगर इस बिल्डिंग का अभी तक लाभ मरीजों को नहीं मिला है।

अपूर्ण ही है, संपूर्णा क्लीनिक 
एनएचएम योजना के अंतर्गत महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की जांच सहित अन्य स्वास्थ्य परीक्षण के लिए संपूर्णा क्लीनिक खोला गया। नौ लाख रुपये का बजट मिला। यहां तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं है कि इसका मकसद क्या है। कर्मचारियों को ट्रेनिंग ही नहीं कराई गई। जांच के लिए उपकरण भी नहीं हैं।

स्वास्थ्य विभाग के आंकडे़
सीएचसी             7
ब्लाक पीएचसी         5
एडिशनल पीएचसी        52
एंबुलेंस 102        30
एंबुलेंस 108        20

चिकित्सकों की स्थिति
लेवल          स्वीकृत         कार्यरत        रिक्त
फर्स्ट        78        47        31
सेकेंड        11        15    
थर्ड        22        7        15
फोर्थ        14        09        05 


इन नवीन उपकेंद्रों पर डाक्टर ही नहीं
नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुशियारी, भौंडेला, चुल्हावली, कच्चा टूंडला, नगला सिंघी, रसूलपुर बझेरा, ओखरा, बसई मुहम्मदपुर, दबरई, कुर्रीकूपा, रींवा, हाथवंत, नगला गढूआ, पेंडत, उडेसर, पिलखतर, सुराया, सैफपुर, भनुपुरा, हुसैनपुर बैजुआ, करहरा, नगला गुलाल, बलीपुर, कठफोरी, आटेपुर, भांडरी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक ही नहीं हैं। 

क्या कहते हैं लोग 
कठफोरी नवीन स्वास्थ्य केंद्र पर आए भूपसिंह ने कहा कि तीन दिन से खांसी की दवा को आ रहे हैं। मगर यहां सीरप है ना ही गोली। 

श्रीकृष्ण ने कि यहां दवाएं मिलती ही नहीं हैं। मजबूरन झोलाछापों से इलाज कराना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाओं का यह हाल तो बाकी चीजों की कल्पना भी करना मुश्किल है।


क्या कहते हैं अधिकारी
हम सिर्फ चिकित्सक एवं स्टाफ की डिमांड शासन को भेज सकते हैं। स्वीकृति करना शासन का काम है। हमारे यहां स्टाफ की कमी है। बाकी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का हम कार्य करेंगे।
डॉ पुष्कर आनंद
मुख्य चिकित्साधिकारी
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