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पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आगाज आज से

Thu, 05 Feb 2015 11:27 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद
ब्यूरो अमर उजाला फीरोजाबाद Updated Thu, 05 Feb 2015 11:27 PM IST
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Panckalyank Started by today in firozabad
दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर अतिशय क्षेत्र चतुर्थ तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ जिनालय के निर्माणोपरांत पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ छह फरवरी से होगा। 11 फरवरी तक आचार्य वसुनंदी मुनिराज के ससंघ सानिध्य में भव्य घटयात्रा के साथ शुक्रवार को पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू होगा।
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पंचकल्याणक महोत्सव समिति के महामंत्री कुलदीप मित्तल जैन एडवोकेट ने बताया बताया कि छह फरवरी को सुबह साढ़े छह बजे देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, प्रतिष्ठाचार्य निमंत्रण के साथ मांगलिक कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा। सुबह साढ़े सात बजे घटयात्रा चंद्रप्रभु जैन मंदिर से नसियाजी जैन मंदिर तक निकाली जाएगी। सवा नौ बजे विमल कुमार जैन द्वारा ध्वजारोहण से पंचकल्याण का सूत्रपात किया जाएगा। उद्घाटन राजेन्द्र प्रसाद जैन राजू द्वारा किया जाएगा। शैलेंद्र जैन, जीवन बाबू जैन द्वारा मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, वेदी शुद्धि, शांतिधारा अभिषेक बिंब स्थापना की क्रियाएं संपन्न होंगी। सांय पौने सात बजे सामूहिक आरती एवं जैन विद्धान अनुराग शास्त्री के प्रवचन होंगे। रात्रि आठ बजे से इंद्र दरबार तत्वचर्चा, कुबेर द्वारा रत्नवृष्टि, माता मरुदेवी की सेवा, सोलह स्वप्न दर्शन, गीत नृत्य एवं गर्भ कल्याणक की आंतरिक क्रियाएं होंगी।
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मेहनत की कमाई को कोई छीन नहीं सकता: वसुनंदी
फीरोजाबाद। पंचकल्याणक महोत्सव की पूर्व वेला पर रत्नत्रय नसियाजी जैन मंदिर में आचार्य वसुनंदी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि संसार का प्रत्येक प्राणी सुख शांति का अभिलाषी है लेकिन उसके लिए लोग समुचित पुरुषार्थ नहीं करते। आज व्यक्ति एमसीएक्स. जैसे साधनों से बिना मेहनत के कमाई करना चाहता हैं जो कभी रुकती नहीं। जो व्यक्ति मेहनत करके कमाता है उस कमाई को कोई छीन नहीं सकता। जैन मुनि जिनानंद महाराज ने कहा कि भूमि को जोतकर कितनी भी उर्वरा बनाओ लेकिन बिना बीज डाले उसमें फसल आ नहीं सकती, ऐसे ही आप कितने भी प्रवचन आदि सुन लो जब तक आप उन्हें अपने आचरण में नहीं उतारेंगे उसका फल मिलने वाला नहीं है। अशोक जैने, डा. महेंद्र जैन, अरविंद मित्तल, सतेंद्र, रमेश जैन, विजय देवता, मनोज, प्रवीन, शीतल जैन आदि थे। धर्मसभा से पूर्व राजेश जैन विधानाचार्य ने बारह भावना का महत्व बताया। प्रतिष्ठाचार्य पवन दीवान ने पंचकल्याण की बारीक क्रियाओं की जानकारी दी।
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