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Firozabad News: ओलंपिक खेलों के लिए तैयार हो रही खिलाड़ियों की नर्सरी
Fri, 23 Jun 2023 01:52 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Fri, 23 Jun 2023 01:52 AM IST
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फिरोजाबाद। दाऊदयाल स्पोर्ट्स स्टेडियम ओलंपिक खेलों के लिए खिलाड़ियों की नर्सरी तैयार कर रहा है। बीते दस साल में इस बार सबसे ज्यादा कोच आए हैं। युवाओं का क्रिकेट को लेकर सबसे ज्यादा रुझान है। हालांकि कोच की तैनाती होने से ओलंपिक खेलों की ओर भी युवा आगे आ रहे हैं। वर्तमान में स्टेडियम में 235 खिलाड़ी हर रोज अपनी प्रतिभा निखारने आ रहे हैं। खास बात यह हैं कि इसमें बेटियों की संख्या 89 है।
कई ओलंपिक खेलों में सुहागनगरी के खिलाड़ियों से अछूते रह गए हैं। इन खेलों के कोच न होने से खिलाड़ियों का सपना अधूरा था। अब खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिल रहा है। इस बार समय से शासन ने बॉक्सिंग, बैडमिंटन, जिन्मास्टिक, पावरलिफ्टिंग, एथलेक्टिस, क्रिकेट के कोच तैनात कर दिए हैं। जहां बीते कई सालों से खिलाड़ी क्रिकेट में रुचि दिखाते थे, लेकिन कोच की तैनाती होने से इन ओलंपिक खेलों की ओर ध्यान भी बढ़ा है। खास बात है कि इन ओलंपिक खेलों की ओर बेटियां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 89 बेटियां स्टेडियम में अपनी प्रतिभा निखार रही हैं। बॉक्सिंग, पावरलिफ्टिंग, एथलेक्टिस खेलों में सबसे ज्यादा रुचि दिखा रही हैं।
-इन खेलों के नहीं हैं कोच
शासन ने करीब चार साल पूर्व स्टेडियम में हॉकी, फुटबॉल और तलबारबाजी खेलों के कोच तैनात किए थे। खेल सामग्री भी आ गई थी। यहां खिलाड़ियों ने इन खेलों में उत्साह दिखाया था। लेकिन दो साल से इन खेलों के खिलाड़ी नहीं आ रहे हैं। ऐसे में दो साल खिलाड़ियों ने कोच के साथ मिलकर पसीना बहाया था। वही खिलाड़ी कोच तैनात न किए जाने से अब घर बैठ गए हैं।
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-स्टेडियम में सुविधाएं मिलें तो खिलाड़ी निश्चित तौर पर ओलंपिक खेल जाएंगे। एथलेक्टिस में हमने नेशनल खेला है। सबसे मुख्य बात रहती है कि हर साल कोच बदल जाते हैं। कभी किसी खेल के तो कभी किसी खेल के कोच तैनात कर दिए जाते हैं। ऐसे में नियमित कोच न होने से निखरी प्रतिभा जमींदोज हो जाती है। स्टेडियम में नियमित कोच की तैनाती रहे।
मनोरमा, नेशनल एथलेक्टिस खिलाड़ी
-स्टेडियम में इस बार कोच होने से सहूलियत है। ओलंपिक खेलों के प्रति अब रुचि दिख रही है। मैं स्टेडियम से खेलकर राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुका हूं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कर रहा हूं। अपनी और कोच की मेहनत से निश्चित तौर पर ओलंपिक खेलूंगा। स्टेडियम में हर साल कोच समय से आ जाएं तो खिलाड़ियों में उत्साह रहता है।
आदित्य कुमार, नेशनल एथलेक्टिस खिलाड़ी
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वर्जन
-स्टेडियम से खेले कई खिलाड़ी दो सालों में राष्ट्रीय और मंडल स्तर पर खेल चुके हैं। खिलाड़ियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कोच की तैनाती शासन स्तर से होती है। इसलिए हर बार कोच बदल जाते हैं। फिर भी इस साल अन्य वर्षों की तुलना में ज्यादा कोच आए हैं। 235 खिलाड़ी नियमित स्टेडियम में अभ्यास करने आते हैं।
-राहुल चोपड़ा, जिला क्रीड़ाधिकारी
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कई ओलंपिक खेलों में सुहागनगरी के खिलाड़ियों से अछूते रह गए हैं। इन खेलों के कोच न होने से खिलाड़ियों का सपना अधूरा था। अब खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका मिल रहा है। इस बार समय से शासन ने बॉक्सिंग, बैडमिंटन, जिन्मास्टिक, पावरलिफ्टिंग, एथलेक्टिस, क्रिकेट के कोच तैनात कर दिए हैं। जहां बीते कई सालों से खिलाड़ी क्रिकेट में रुचि दिखाते थे, लेकिन कोच की तैनाती होने से इन ओलंपिक खेलों की ओर ध्यान भी बढ़ा है। खास बात है कि इन ओलंपिक खेलों की ओर बेटियां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 89 बेटियां स्टेडियम में अपनी प्रतिभा निखार रही हैं। बॉक्सिंग, पावरलिफ्टिंग, एथलेक्टिस खेलों में सबसे ज्यादा रुचि दिखा रही हैं।
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-इन खेलों के नहीं हैं कोच
शासन ने करीब चार साल पूर्व स्टेडियम में हॉकी, फुटबॉल और तलबारबाजी खेलों के कोच तैनात किए थे। खेल सामग्री भी आ गई थी। यहां खिलाड़ियों ने इन खेलों में उत्साह दिखाया था। लेकिन दो साल से इन खेलों के खिलाड़ी नहीं आ रहे हैं। ऐसे में दो साल खिलाड़ियों ने कोच के साथ मिलकर पसीना बहाया था। वही खिलाड़ी कोच तैनात न किए जाने से अब घर बैठ गए हैं।
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-स्टेडियम में सुविधाएं मिलें तो खिलाड़ी निश्चित तौर पर ओलंपिक खेल जाएंगे। एथलेक्टिस में हमने नेशनल खेला है। सबसे मुख्य बात रहती है कि हर साल कोच बदल जाते हैं। कभी किसी खेल के तो कभी किसी खेल के कोच तैनात कर दिए जाते हैं। ऐसे में नियमित कोच न होने से निखरी प्रतिभा जमींदोज हो जाती है। स्टेडियम में नियमित कोच की तैनाती रहे।
मनोरमा, नेशनल एथलेक्टिस खिलाड़ी
-स्टेडियम में इस बार कोच होने से सहूलियत है। ओलंपिक खेलों के प्रति अब रुचि दिख रही है। मैं स्टेडियम से खेलकर राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुका हूं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कर रहा हूं। अपनी और कोच की मेहनत से निश्चित तौर पर ओलंपिक खेलूंगा। स्टेडियम में हर साल कोच समय से आ जाएं तो खिलाड़ियों में उत्साह रहता है।
आदित्य कुमार, नेशनल एथलेक्टिस खिलाड़ी
वर्जन
-स्टेडियम से खेले कई खिलाड़ी दो सालों में राष्ट्रीय और मंडल स्तर पर खेल चुके हैं। खिलाड़ियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कोच की तैनाती शासन स्तर से होती है। इसलिए हर बार कोच बदल जाते हैं। फिर भी इस साल अन्य वर्षों की तुलना में ज्यादा कोच आए हैं। 235 खिलाड़ी नियमित स्टेडियम में अभ्यास करने आते हैं।
-राहुल चोपड़ा, जिला क्रीड़ाधिकारी