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माइट थिप्स रोग ने उड़ाई मिर्च उत्पादक किसानों की नींद
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नारखी क्षेत्र में मिर्च की फसल को लगा कीट के बाद खराब होती फसल
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। नारखी एवं टूंडला ब्लॉक के करीब 50 हजार मिर्च उत्पादक किसानों की नींद फसल में लगे माइट थिप्स (सिकोड़ा एवं ककोड़ा) रोग ने उड़ा दी। 90 दिन की हो चुकी मिर्च की फसल में नई कली नहीं बन पा रही है। इसका सीधा असर मिर्च की फसल के उत्पादन पर पड़ेगा। किसान इस रोग की रोकथाम के लिए दिन रात एक करके दवा लगाने में जुटे है। लेकिन कोई राहत नहीं मिल पा रही है।
जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर में मिर्च की फसल बोई जाती है। सर्वाधिक फसल नारखी और टूंडला ब्लॉक में होती है। यहां से मिर्च की दिल्ली, जयपुर, महाराष्ट्र, भोपाल के साथ पूर्वांचल की मंडियों में जाती है। किसानों का कहना है कि 90 दिन की हो चुकी मिर्च में फूल आने के साथ फली लगनी चाहिए। लेकिन कली खिलने के बजाय सिकड़ रही है। इस कारण मिर्च का उत्पादन होने की संभावना कम हो गई है। मिर्च में लगे माइट थिप्स रोग की रोकथाम के लिए कई दवाओं का प्रयोग किसान कर चुके हैं। लेकिन दवा का प्रयोग करने के बाद कोई राहत नहीं मिल रही है। किसानों का कहना है कि उद्यान विभाग की टीम कुशल वैज्ञानिकों को भेजे ताकि मिर्च की फसल में लगे वायरस को समझे और उसका उपचार हो।
- मिर्च की फसल पर ही हम लोग निर्भर रहते हैं। छह एकड़ में मिर्च की फसल बोई है। इस बार तो ऐसा रोग लगा की दवा लगाने पर भी सुधार नहीं हो रहा है।
यतेंद्रपाल सिंह, गढ़ी हंसराम
- पहली बार मिर्च में ऐसा रोग लगा है कि कीटनाशक दवा का स्प्रे करने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा है। इसका असर सीधे मिर्च के उत्पादन पर पड़ेगा।
कमलेश कुमार, जैतपुर
-मिर्च में इस तरह का रोग पहले कभी नहीं लगा। हम लोग दवा लेकर लगाते-लगाते परेशान हो गए। लेकिन मिर्च की कली नहीं खिलने के कारण फसल खराब हो रही है।
अतर सिंह, मोहम्मदपुर
- मेरे गांव ही नहीं बल्कि जिस गांव में जाओ मिर्च की बुवाई करने वाले किसान परेशान है। जिला प्रशासन को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
अतुल प्रताप सिंह, गढ़ी लोकी
- मिर्च की फसल को प्रभावित करने वाले रोग की रोकथाम के संबंध में कृषि वैज्ञानिकों से बात करके किसानों को निदान का रास्ता बताया जाएगा। ताकि मिर्च की फसल में लगे रोग की रोकथाम हो सके। विभाग के प्रयास रहेगा कि किसानों की मिर्च की फसल रोगमुक्त हो जाए।
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डॉ. संजीव कुमार वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी
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जिले में करीब 12 हजार हेक्टेयर में मिर्च की फसल बोई जाती है। सर्वाधिक फसल नारखी और टूंडला ब्लॉक में होती है। यहां से मिर्च की दिल्ली, जयपुर, महाराष्ट्र, भोपाल के साथ पूर्वांचल की मंडियों में जाती है। किसानों का कहना है कि 90 दिन की हो चुकी मिर्च में फूल आने के साथ फली लगनी चाहिए। लेकिन कली खिलने के बजाय सिकड़ रही है। इस कारण मिर्च का उत्पादन होने की संभावना कम हो गई है। मिर्च में लगे माइट थिप्स रोग की रोकथाम के लिए कई दवाओं का प्रयोग किसान कर चुके हैं। लेकिन दवा का प्रयोग करने के बाद कोई राहत नहीं मिल रही है। किसानों का कहना है कि उद्यान विभाग की टीम कुशल वैज्ञानिकों को भेजे ताकि मिर्च की फसल में लगे वायरस को समझे और उसका उपचार हो।
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- मिर्च की फसल पर ही हम लोग निर्भर रहते हैं। छह एकड़ में मिर्च की फसल बोई है। इस बार तो ऐसा रोग लगा की दवा लगाने पर भी सुधार नहीं हो रहा है।
यतेंद्रपाल सिंह, गढ़ी हंसराम
- पहली बार मिर्च में ऐसा रोग लगा है कि कीटनाशक दवा का स्प्रे करने के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा है। इसका असर सीधे मिर्च के उत्पादन पर पड़ेगा।
कमलेश कुमार, जैतपुर
-मिर्च में इस तरह का रोग पहले कभी नहीं लगा। हम लोग दवा लेकर लगाते-लगाते परेशान हो गए। लेकिन मिर्च की कली नहीं खिलने के कारण फसल खराब हो रही है।
अतर सिंह, मोहम्मदपुर
- मेरे गांव ही नहीं बल्कि जिस गांव में जाओ मिर्च की बुवाई करने वाले किसान परेशान है। जिला प्रशासन को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
अतुल प्रताप सिंह, गढ़ी लोकी
- मिर्च की फसल को प्रभावित करने वाले रोग की रोकथाम के संबंध में कृषि वैज्ञानिकों से बात करके किसानों को निदान का रास्ता बताया जाएगा। ताकि मिर्च की फसल में लगे रोग की रोकथाम हो सके। विभाग के प्रयास रहेगा कि किसानों की मिर्च की फसल रोगमुक्त हो जाए।
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डॉ. संजीव कुमार वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी