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बजहेरा दंगल में बराबर पर छूटी आखिरी कुश्ती
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 25 Apr 2016 11:08 PM IST
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कुश्ती दंगल का शुभारंभ कराते अतिथि
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कुश्ती हमारी प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है। कुश्ती मनोरंजन का साधन ही नहीं अपितु इससे मनुष्य का शारीरिक और मानसिक विकास होता है। यह बात गांव बजहेरा में आयोजित दंगल में पहलवानों का हाथ मिलाकर कुश्ती दंगल का शुभारंभ कराते समाजसेवी देवकरन दिलावर और जेपी बाबा ने संयुक्त रूप से कही। उन्होंने कहा कि एक समय था कि विदेशों से भी पहलवान कुश्तियां लड़ने आते थे, लेकिन बदलते परिवेश में यह परंपरा विलुप्त हो रही है। दंगल में कुंडौल आगरा से आए दया पहलवान ने महुआ खेड़ा के सोनू को पराजित किया। ईधोंन आगरा के संजय पहलवान ने इकतरा के रोहित को पटखनी दी। सांकुरी के बच्चू पहलवान और शमसाबाद के उमेश पहलवान की कुश्ती बराबरी पर छूटी। नगला कांस के लायक सिंह पहलवान को नगला गोकुल के विक्रम पहलवान ने चित किया। आखिरी कुश्ती भरतपुर के पहलवान भोला और अनवारा के हुशियार सिंह के बीच कराई गई। दोनों पहलवानों के बीच लंबी कुश्ती चली, जो अंत तक किसी निर्णय पर नहीं पहुंची। अंत में निर्णायक मंडल ने दोनों पहलवानों को बराबर पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर शंभूदयाल ठेकेदार, चंदन सिंह, लालता प्रसाद, राम अवतार सिंह, भागीरथ प्रधान, रामदास बाबा, बालक दास बाबा, लज्जाराम, विजेंद्र सिंह, अशोक कुमार, मनोहर लाल आदि उपस्थित थे।
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