{"_id":"58f229ab4f1c1b791ecf902a","slug":"mercury-reached-43-degrees-now-water-is-only-prop","type":"story","status":"publish","title_hn":"43 डिग्री पर पहुंचा पारा, अब पानी ही सहारा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
43 डिग्री पर पहुंचा पारा, अब पानी ही सहारा
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Sat, 15 Apr 2017 11:34 PM IST
विज्ञापन
गर्मी के कारण मुंह छिपाकर चलती युवतियां।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अप्रैल माह में ही गर्मी के मौसम ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। पारा 43 डिग्री सेंटीग्रेड पर पहुंच गया है। गर्मी से लोग व्याकुल हो रहे हैं। वहीं, दोपहर के समय लोग जरूरी काम से ही निकल रहे हैं। उधर, पुलिस और प्रशासन कार्यालयों में भी दोपहर को लोग कम दिखाई दे रहे है। इस दौरान फ्रिज, कूलर और एसी का बजार गर्म है। गर्मी से बचाव के लिए लोग तेजी से इन्हें खरीद रहे हैं।
सुबह नौ बजते ही धूप असहनीय हो गई। हर कोई घर से बाहर गर्मी से बचाव का इंतजाम करके ही निकलने लगा। पुरुष जहां गमछा तथा महिलाएं व युवतियां भी ग्लब्स पहनने के साथ छाता को लेकर ही निकल रहीं है। पानी की बोतल रखना मजबूरी बन गया। सदर बाजार हो या स्टेशन रोड दोपहर के वक्त सन्नाटा से ही घिरे दिखाई देते हैं। घरेलू सामान की खरीददारी भी सुबह और शाम को करने लगे। गर्मी से बचाव के लिए बाजारों में कूलर, एसी का बाजार गर्म हो गया है। डिमांड के कारण बाजार में सबसे अधिक बिक्री हो रही है। बाजार में कोई कूलर तो कोई पंखा और एसी खरीद रहे हैं।
शीतल पेय, लस्सी की बढ़ी डिमांड
गर्मी के कारण बाजार में शीतलपेय और दही की लस्सी की डिमांड काफी बढ़ गई। हलवाइयों की दुकानों पर लस्सी की सबसे अधिक मांग रहती है। इसके कारण ही बाजारों में भी दही की लस्सी, गन्ने का रस, बेल का जूस, शिकंजी आदि की दुकानें सजी दिखाई देती हैं। गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं को हरा चारा कम मिलने के कारण ही दूध कम देना शुरू कर दिया। इसके कारण ही बाजारों में दूध की कीमत दो से तीन रुपया प्रति किलोग्राम तक बढ़ोत्तरी कर दी।
विज्ञापन
हरी सब्जियां भी हुईं गरम
चिल-चिलाती धूप के कारण ही मंडियों में हरी सब्जी कम आना शुरू हो गई। हरी सब्जी के भाव ऊंचे हो गए। धनियां व मिर्च के साथ टमाटर आदि की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो गई। किसानों का तर्क है गर्मी के कारण हरी सब्जियों की ही फसल में एक सप्ताह में दो बार पानी देना पड़ रहा है।
हैंडपंप छोड़ने लगे पानी, तालाब भी सूखे
तापमान बढ़ने के साथ ही हैंडपंप के जलस्तर भी गिरने लगे हैं। ग्रामीण अंचल में तालाबों का पानी सूख गया। हैंडपंपों का पानी नीचे उतर जाने के ही कारण पशुओं को पानी पिलाने का संकट खड़ा हो गया। कई गांव में पशुओं के लिए ट्यूबवेल चलाकर पानी पिलाने की व्यवस्था करने को विवश हैं।
विज्ञापन
सुबह नौ बजते ही धूप असहनीय हो गई। हर कोई घर से बाहर गर्मी से बचाव का इंतजाम करके ही निकलने लगा। पुरुष जहां गमछा तथा महिलाएं व युवतियां भी ग्लब्स पहनने के साथ छाता को लेकर ही निकल रहीं है। पानी की बोतल रखना मजबूरी बन गया। सदर बाजार हो या स्टेशन रोड दोपहर के वक्त सन्नाटा से ही घिरे दिखाई देते हैं। घरेलू सामान की खरीददारी भी सुबह और शाम को करने लगे। गर्मी से बचाव के लिए बाजारों में कूलर, एसी का बाजार गर्म हो गया है। डिमांड के कारण बाजार में सबसे अधिक बिक्री हो रही है। बाजार में कोई कूलर तो कोई पंखा और एसी खरीद रहे हैं।
विज्ञापन
शीतल पेय, लस्सी की बढ़ी डिमांड
गर्मी के कारण बाजार में शीतलपेय और दही की लस्सी की डिमांड काफी बढ़ गई। हलवाइयों की दुकानों पर लस्सी की सबसे अधिक मांग रहती है। इसके कारण ही बाजारों में भी दही की लस्सी, गन्ने का रस, बेल का जूस, शिकंजी आदि की दुकानें सजी दिखाई देती हैं। गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं को हरा चारा कम मिलने के कारण ही दूध कम देना शुरू कर दिया। इसके कारण ही बाजारों में दूध की कीमत दो से तीन रुपया प्रति किलोग्राम तक बढ़ोत्तरी कर दी।
विज्ञापन
हरी सब्जियां भी हुईं गरम
चिल-चिलाती धूप के कारण ही मंडियों में हरी सब्जी कम आना शुरू हो गई। हरी सब्जी के भाव ऊंचे हो गए। धनियां व मिर्च के साथ टमाटर आदि की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो गई। किसानों का तर्क है गर्मी के कारण हरी सब्जियों की ही फसल में एक सप्ताह में दो बार पानी देना पड़ रहा है।
हैंडपंप छोड़ने लगे पानी, तालाब भी सूखे
तापमान बढ़ने के साथ ही हैंडपंप के जलस्तर भी गिरने लगे हैं। ग्रामीण अंचल में तालाबों का पानी सूख गया। हैंडपंपों का पानी नीचे उतर जाने के ही कारण पशुओं को पानी पिलाने का संकट खड़ा हो गया। कई गांव में पशुओं के लिए ट्यूबवेल चलाकर पानी पिलाने की व्यवस्था करने को विवश हैं।