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आधुनिक चिकित्सा उपकरणों मेडिकल कॉलेज ने खर्च किए लाखों, संचालन के लिए नहीं हैं ऑपरेटर
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जिला अस्पताल स्थित पैथोलॉजी में बंद पड़ी खून जांच की मशीन
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुविधा के लिए तीन माह पहले आई 30 लाख रुपये से अधिक कीमत की सीबीसी मशीन शोपीस बन गई है। रक्त जांच क ी इस आधुनिक मशीन के लिए संरक्षक अनुपलब्ध है। इससे कोरोना के दौर में भी स्टाफ को पुराने तरीकों से ही रक्त जांच करनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन सरकारी धन से लगातार आधुनिक चिकित्सा उपकरण खरीद रहा है। लेकिन इनके मरीजों के लाभ के लिए प्रयोग में लाए जाने को लेकर स्वास्थ्य महकमा लापरवाह है। करीब तीन माह पूर्व आई फाइव स्टैप मशीन चालू नहीं हो सकी है। फाइव स्टैप मशीन रक्त जांच की आधुनिक मशीन है। मेनुअल टेस्ट में मशीन में रक्त जांच के लिए एक एक स्लाइड लगाई जाती है, जबकि इस मशीन में एक रैक में एक साथ 10 स्लाइड लगाई जा सकती हैं। मशीन से करीब आधे मिनट में रिपोर्ट मिल जाती है। आटोमेटिक सीबीसी मशीन फाइव पार्ट है। इसे थ्री पार्ट भी चलाया जा सकता है। इसमें एक साथ 25 टेस्ट की रिपोर्ट मिलती है। अस्पताल के कर्मचारी मशीन को चालू करने के लिए रेजेंट्स की उपलब्धता न होना बता रहे हैं।
मैंने कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। उपकरण चालू क्यों नहीं हैं, इसकी पूरी जानकारी कर रहा हूं। मशीन को चालू कराने का पूरा प्रयास किया जाएगा। -डॉ. हंसराज सिंह, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन सरकारी धन से लगातार आधुनिक चिकित्सा उपकरण खरीद रहा है। लेकिन इनके मरीजों के लाभ के लिए प्रयोग में लाए जाने को लेकर स्वास्थ्य महकमा लापरवाह है। करीब तीन माह पूर्व आई फाइव स्टैप मशीन चालू नहीं हो सकी है। फाइव स्टैप मशीन रक्त जांच की आधुनिक मशीन है। मेनुअल टेस्ट में मशीन में रक्त जांच के लिए एक एक स्लाइड लगाई जाती है, जबकि इस मशीन में एक रैक में एक साथ 10 स्लाइड लगाई जा सकती हैं। मशीन से करीब आधे मिनट में रिपोर्ट मिल जाती है। आटोमेटिक सीबीसी मशीन फाइव पार्ट है। इसे थ्री पार्ट भी चलाया जा सकता है। इसमें एक साथ 25 टेस्ट की रिपोर्ट मिलती है। अस्पताल के कर्मचारी मशीन को चालू करने के लिए रेजेंट्स की उपलब्धता न होना बता रहे हैं।
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मैंने कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। उपकरण चालू क्यों नहीं हैं, इसकी पूरी जानकारी कर रहा हूं। मशीन को चालू कराने का पूरा प्रयास किया जाएगा। -डॉ. हंसराज सिंह, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
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