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गुरुजी बने दूधिया, मैडम ने पकाए चावल-कोफ्ते
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Wed, 29 Jul 2015 09:43 PM IST
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फीरोजाबाद। गुरुजी को बुधवार को फिर रसोइया बनना पड़ा। मैडम स्कूल पहुंचते ही एमडीएम रसोई में कोफ्ता-चावल बनाने में जुट गईं तो सर दूध तलाशने के लिए गांवों की खाक छानते रहे। पाठशाला में पढ़ाई से ज्यादा ध्यान गुरुजी ने खाना पकाने में दिया। नगर क्षेत्र में भी एमडीएम में दूध-कोफ्ता का वितरण किया गया।
शासन ने गुरुजी के लिए बुधवार का दिन अब थोड़ा मुश्किल बना दिया है। घर की रसोई से ज्यादा गुरुजी को एमडीएम रसोई की चिंता होती है। गांव में दूध नहीं मिलने पर गुरुजी को शहरी क्षेत्रों की ओर दौडना पड़ा। शहरी क्षेत्रों से ग्रामीणों में जाने वाले गुरुजी दूधिया बनकर स्कूल पहुंचे। मैडम भी हाजिरी रजिस्ट्रर में हस्ताक्षर करने के बाद रसोइयाओं के साथ एमडीएम रसोई में जुट गई। नगर क्षेत्र के स्कूलों में दूध का वितरण किया गया।
एमडीएम रसोइयों में मिट्टी के चूल्हे पर पकता है भोजन
स्कूलों की एमडीएम रसोइयों का हाल बेहाल है। कई स्कूल ऐसे हैं, जहां गैस कनेक्शन नहीं है। मजबूरन स्कूलों में मिट्टी के चूल्हे बनाकर भोजन पकाना पड़ता है। धुएं के बीच पढ़ना नौनिहालों की मजबूरी बन जाता है। उच्च प्राथमिक विद्यालय गांगनी में चूल्हे पर खाना पकता नजर आया। रसोइया ने बताया कि पहले लकड़ी बीनकर लानी पड़ती है। गैस नहीं होने से मिट्टी के चूल्हे पर भोजन पकाना पड़ता है। सुबह छह बजे से भोजन बनाना शुरू कर दिया था।
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दूध पीते ही बच्चों को होने लगीं उल्टियां
दूध पीते ही बच्चों को स्कूल में उल्टियां होने लगीं। मामला प्राथमिक विद्यालय नगला हरिशचंद्र का है। शिक्षिका ने कहा कि उल्टियां बच्चों को खाली पेट दूध पीने की वजह से हुईं हैं।
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शासन ने गुरुजी के लिए बुधवार का दिन अब थोड़ा मुश्किल बना दिया है। घर की रसोई से ज्यादा गुरुजी को एमडीएम रसोई की चिंता होती है। गांव में दूध नहीं मिलने पर गुरुजी को शहरी क्षेत्रों की ओर दौडना पड़ा। शहरी क्षेत्रों से ग्रामीणों में जाने वाले गुरुजी दूधिया बनकर स्कूल पहुंचे। मैडम भी हाजिरी रजिस्ट्रर में हस्ताक्षर करने के बाद रसोइयाओं के साथ एमडीएम रसोई में जुट गई। नगर क्षेत्र के स्कूलों में दूध का वितरण किया गया।
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एमडीएम रसोइयों में मिट्टी के चूल्हे पर पकता है भोजन
स्कूलों की एमडीएम रसोइयों का हाल बेहाल है। कई स्कूल ऐसे हैं, जहां गैस कनेक्शन नहीं है। मजबूरन स्कूलों में मिट्टी के चूल्हे बनाकर भोजन पकाना पड़ता है। धुएं के बीच पढ़ना नौनिहालों की मजबूरी बन जाता है। उच्च प्राथमिक विद्यालय गांगनी में चूल्हे पर खाना पकता नजर आया। रसोइया ने बताया कि पहले लकड़ी बीनकर लानी पड़ती है। गैस नहीं होने से मिट्टी के चूल्हे पर भोजन पकाना पड़ता है। सुबह छह बजे से भोजन बनाना शुरू कर दिया था।
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दूध पीते ही बच्चों को होने लगीं उल्टियां
दूध पीते ही बच्चों को स्कूल में उल्टियां होने लगीं। मामला प्राथमिक विद्यालय नगला हरिशचंद्र का है। शिक्षिका ने कहा कि उल्टियां बच्चों को खाली पेट दूध पीने की वजह से हुईं हैं।