फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Firozabad News ›   Literary Banarsidas Chaturvedi had extended the respect of Suhagnagari across the country

साहित्यकार बनारसीदास चतुर्वेदी देशभर में बढ़ाया था सुहागनगरी का सम्मान

Tue, 10 Aug 2021 11:37 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 11:37 PM IST
विज्ञापन
Literary Banarsidas Chaturvedi had extended the respect of Suhagnagari across the country
रफ़रोजाबाद ! गांधी पार्क चौराहा स्थित लगी साहित्य महर्षि पं. बनारसीदास चतुर्वेदी की प्रतिमा - फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। शहर के चौबान मोहल्ला में जन्में साहित्यकार स्व. बनारसीदास चतुर्वेदी ने सुहागनगरी का सम्मान देश, दुनिया में बढ़ाया था। जनपद के एकमात्र व्यक्ति थे, जो पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित हुए। देश की आजादी के बाद प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने साहित्यकार के रूप में 12 साल के लिए दो बार राज्यसभा सांसद चुना था। गांधी पार्क चौराहे पर उनकी मूर्ति स्थापित है। वह स्मारक आज भी साहित्यकारों को नई ऊर्जा देता है। हर साल 24 दिसंबर को उनके जन्मतिथि पर लोग एकत्रित होकर उनकी यादों को सजोहते हैं।
विज्ञापन

वरिष्ठ अधिवक्ता अनूपचंद्र जैन बताते हैं कि पंडित बनारसीदास चतुर्वेदी प्रसिद्ध हिंदी लेखक एवं पत्रकार थे। उनके सम्पादकत्व में हिंदी में कोलकाता से विशाल भारत नामक हिंदी मासिक पत्रिका निकाली। उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1973 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने शहीद भगत सिंह, बिस्मिल्ला खां सहित अन्य शहीदों के परिवारों की तलाश कर शहीदों की जीवनी लिखीं। उनका मकसद शहीदों और उनके परिवारों को देश में सम्मान दिलाना था। उनके परिवारों को फिरोजाबाद बुलाकर सम्मान दिलाया था। उन्होंने कोलकाता में रविंद्रनाथ टैगोर के सानिध्य में शिक्षा हासिल की। महात्मा गांधी ने 1921 में गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की तो उनके आदेश पर पंडित चतुर्वेदी अपनी सेवाएं अर्पित करने वहां चले गए। पंडित चतुर्वेदी गणेश शंकर विद्यार्थी को महात्मा गांधी के बाद अपने पत्रकारीय जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा मानते थे, जिनकी उन्होंने जीवनी भी लिखी है। उन्होंने कई विदेशयात्राएं कीं और देश-विदेश में अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक व साहित्यिक संस्थाओं और प्रतिभाओं को योगदान दिया। उनकी स्मृति में हर साल संगोष्ठी सुहाग नगरी और अन्य शहरों में गोष्ठी आयोजित होती हैं। बुजुर्ग अवस्था में सेवानिवृत्त होकर चौबान मोहल्ला स्थित घर में निवास करने लगे।
विज्ञापन

इन साहित्य प्रमुख रहे
साहित्य और जीवन, रेखाचित्र, संस्मरण, सत्यनारायण कविरत्न, भारत भक्त एंड्रयूज, केशवचन्द्र सेन, प्रवासी भारतवासी, फिजी में भारतीय, फिजी की समस्या, हमारे आराध्य और सेतुबंध’ जैसी रचनाएं प्रमुख थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

विदेशमंत्री के दौरान अटल बिहारी भी घर आए थे मिलने
साहित्यकार पं. बनारसी दास चतुर्वेदी से मिलने तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी बाजपेई भी मिलने आए थे। वह बनारसी दास से मिलने उनके घर भी गए थे। उन्होंने कई प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा भी की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed