{"_id":"592c1eb34f1c1bdf15bdb3dc","slug":"light-hearted-lamp-of-success-in-compulsion","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुफलिसी-मजबूरी में भी रोशन रखा सफलता का दीपक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुफलिसी-मजबूरी में भी रोशन रखा सफलता का दीपक
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Mon, 29 May 2017 11:33 PM IST
विज्ञापन
डिब्बों की पैकिंग करता मेधावी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुदड़ी के लाल ने सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में सफलता हासिल की है। ये गुदड़ी के लाल मजबूरी के आगे भी नहीं टिके। कामकाज कर परिवार का खर्चा भी चलाया। साथ में पढ़ाई भी जारी रखी। अच्छे अंकों के साथ सफलता पाकर अभिभावकों का नाम गौरवांन्वित भी कर दिखाया।
सुहागनगर निवासी अमन गुप्ता ने कक्षा 12वीं(कामर्स) में 94.2 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। छात्र ने पढ़ाई अमरदीप कालेज से की है। अमन के पिता रविंद्र कुमार गुप्ता को कैंसर हो गया तो चिकित्सकों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी। कामकाज ठप हो गया तो परिवार को आर्थिक तंगी जूझने लगी। अमन और मां संगीता गुप्ता ने घर पर ही चूड़ी की पैकिंग और नग लगाने का कार्य शुरू किया। अमन स्कूल से आने के बाद काम में जुट जाता। रात्रि में पढ़ाई करता। अमित ने सीए बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अमित कहता है कि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बिना पैसों के मुश्किलें तो आएंगी, लेकिन फिर भी हम हिम्मत नहीं हारेंगे।
ट्यूशन पढ़ाकर निकालता था पढ़ाई का खर्चा
स्वामी बच्चूबाबा सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र विशाल यादव ने कक्षा 12वीं में 93.2 प्रतिशत अंक हासिल किए। विशाल के पिता खेती एवं मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। किंतु पढ़ाई का खर्चा अधिक होने के कारण विशाल ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। विशाल के घर लाइट की व्यवस्था न होने के कारण छात्र ने लैंप की रोशनी में मेहनत कर अपनी प्रतिभा को निखारा। छात्र चिकित्सक बनना चाहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुहागनगर निवासी अमन गुप्ता ने कक्षा 12वीं(कामर्स) में 94.2 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। छात्र ने पढ़ाई अमरदीप कालेज से की है। अमन के पिता रविंद्र कुमार गुप्ता को कैंसर हो गया तो चिकित्सकों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी। कामकाज ठप हो गया तो परिवार को आर्थिक तंगी जूझने लगी। अमन और मां संगीता गुप्ता ने घर पर ही चूड़ी की पैकिंग और नग लगाने का कार्य शुरू किया। अमन स्कूल से आने के बाद काम में जुट जाता। रात्रि में पढ़ाई करता। अमित ने सीए बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। अमित कहता है कि लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बिना पैसों के मुश्किलें तो आएंगी, लेकिन फिर भी हम हिम्मत नहीं हारेंगे।
विज्ञापन
ट्यूशन पढ़ाकर निकालता था पढ़ाई का खर्चा
स्वामी बच्चूबाबा सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र विशाल यादव ने कक्षा 12वीं में 93.2 प्रतिशत अंक हासिल किए। विशाल के पिता खेती एवं मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। किंतु पढ़ाई का खर्चा अधिक होने के कारण विशाल ने ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। विशाल के घर लाइट की व्यवस्था न होने के कारण छात्र ने लैंप की रोशनी में मेहनत कर अपनी प्रतिभा को निखारा। छात्र चिकित्सक बनना चाहता है।
विज्ञापन