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Firozabad News: किशोर का अपहरण कर डाकू को सौंपने के दोषी को उम्रकैद
Fri, 08 Aug 2025 12:22 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Fri, 08 Aug 2025 12:22 AM IST
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फिरोजाबाद। अपर जिला जज अष्टम एवं विशेष जज दस्यु प्रभावित क्षेत्र रमेशचंद्र द्वितीय ने 21 वर्ष पूर्व किशोर का फिरौती के लिए अपहरण कर डाकू अरविंद गुर्जर गैंग को सौंपने के दोषी सिरसागंज क्षेत्र के सूरजपुर दुगमई निवासी सत्यपाल सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 30 हजार का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
मामला 17 जुलाई 2004 को थाना सिरसागंज के गांव सूरजपुर दुगमई का है। राजबहादुर ने पुलिस को तहरीर दी कि उसका नाती रोवी पुत्र सोमेंद्र को गांव के निवासी सत्यपाल तथा एक अन्य बाइक दिलवाने की कहकर सात हजार रुपया लिए थे। मोटरसाइकिल को नहीं दिलवाने पर नाती ने रुपया मांगे तो 17 जुलाई 2004 को मोटर साइकिल दिलवाने की कहकर अपने साथ गांव से लिवा ले गए थे। उन्होंने सभी को इटावा ले जाकर इटावा में दस्यु अरविंद गुर्जर को सुपुर्द करके गैंग से 50 हजार रुपये ले आए।
काफी तलाश करने के बाद नाती कहीं नहीं मिला। अरविंद गुर्जर से वार्ता के बाद तीन लाख की फिरौती देकर उसे छुड़वाकर लाया हूं। उन्होंने कहा कि मेरे नाती ने अरविंद गुर्जर से छूटने के बाद बताया कि सत्यपाल एवं उसका नाबालिग साथी अरविंद गुर्जर के लिए काम करते हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्जकर मामले की विवेचना की। एक नाबालिग होने के कारण उसकी फाइल अलग की गई। पुलिस ने सत्यपाल के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामला सुनवाई को अपर जिला जज अष्टम एवं विशेष जज दस्यु प्रभावी क्षेत्र रमेशचंद्र द्वितीय के न्यायालय में सुनवाई को पहुंचा। शासन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी अजय कुमार शर्मा ने पैरवी करते हुए दोषी को सख्त सजा दिलाने की पहल की। फाइल पर उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर डकैत अरविंद गुर्जर के लिए काम करने वाले सत्यपाल को फिरौती के लिए अपहरण का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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मामला 17 जुलाई 2004 को थाना सिरसागंज के गांव सूरजपुर दुगमई का है। राजबहादुर ने पुलिस को तहरीर दी कि उसका नाती रोवी पुत्र सोमेंद्र को गांव के निवासी सत्यपाल तथा एक अन्य बाइक दिलवाने की कहकर सात हजार रुपया लिए थे। मोटरसाइकिल को नहीं दिलवाने पर नाती ने रुपया मांगे तो 17 जुलाई 2004 को मोटर साइकिल दिलवाने की कहकर अपने साथ गांव से लिवा ले गए थे। उन्होंने सभी को इटावा ले जाकर इटावा में दस्यु अरविंद गुर्जर को सुपुर्द करके गैंग से 50 हजार रुपये ले आए।
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काफी तलाश करने के बाद नाती कहीं नहीं मिला। अरविंद गुर्जर से वार्ता के बाद तीन लाख की फिरौती देकर उसे छुड़वाकर लाया हूं। उन्होंने कहा कि मेरे नाती ने अरविंद गुर्जर से छूटने के बाद बताया कि सत्यपाल एवं उसका नाबालिग साथी अरविंद गुर्जर के लिए काम करते हैं। पुलिस ने मुकदमा दर्जकर मामले की विवेचना की। एक नाबालिग होने के कारण उसकी फाइल अलग की गई। पुलिस ने सत्यपाल के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामला सुनवाई को अपर जिला जज अष्टम एवं विशेष जज दस्यु प्रभावी क्षेत्र रमेशचंद्र द्वितीय के न्यायालय में सुनवाई को पहुंचा। शासन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी अजय कुमार शर्मा ने पैरवी करते हुए दोषी को सख्त सजा दिलाने की पहल की। फाइल पर उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर डकैत अरविंद गुर्जर के लिए काम करने वाले सत्यपाल को फिरौती के लिए अपहरण का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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