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Firozabad News: भूमाफियाओं का फर्जीवाड़ाः जिंदा लोगों को मारकर जमीन हड़पने की कोशिश, चार गिरफ्तार
Sun, 16 Nov 2025 12:16 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sun, 16 Nov 2025 12:16 AM IST
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सदर उप निबंधक कार्यालय से दक्षिण थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार फर्जीवाड़े के आरोपी। स्रोतः पुलिस
- फोटो : सदर उप निबंधक कार्यालय से दक्षिण थाना पुलिस द्वारा गिरफ्तार फर्जीवाड़े के आरोपी। स्रोतः पुलिस
फिरोजाबाद। सदर तहसील के उप-निबंधक (रजिस्ट्रार) प्रथम कार्यालय से शनिवार को एक संगठित फर्जी बैनामा गैंग के चार सदस्यों को दक्षिण थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया। गिरोह लाखों की संपत्ति हड़पने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और कूटरचित दस्तावेज पेश कर बैनामा कराने पहुंचा था। रजिस्ट्रार जंग बहादुर शुक्ल की तहरीर पर चारों आरोपियों थाना दक्षिण में केस दर्ज हुआ है। आज इनको कोर्ट में पेश कर जेल भेजा जाएगा।
एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह गिरोह मोहम्मदगंज-हाजीपुरा मोहल्ले में स्थित एक मकान का बैनामा कराने पहुंचा था। गिरोह के सदस्यों ने यह साबित करने की कोशिश की कि संपत्ति का मूल मालिक मृत हो चुका है, जिसके लिए उन्होंने जाली मृत्यु प्रमाण पत्र, जो कि नगर निगम द्वारा दर्शाया बताया और बैनामा में 2,80,100 मूल्य का एक फर्जी ई-स्टाम्प लगाया गया था। फर्जी वारिसान प्रमाणपत्रों के साथ-साथ विक्रेता, क्रेता और गवाहों के फर्जी आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज भी इस्तेमाल किए गए थे। रजिस्ट्रार जंग बहादुर शुक्ल ने इन दस्तावेजों की पहचान की। थाना दक्षिण इंस्पेक्टर योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि आरोपी नूर इस्लाम निवासी गालिब नगर गली-1, ने फर्जी कागजात के सहारे मकान खरीदने की कोशिश की। शादमा निवासी हाजीपुरा, ने मृत व्यक्ति की पत्नी बनकर संपत्ति बेचने का प्रयास किया। शाकेब खान निवासी हाजीपुरा, ने मृत व्यक्ति का बेटा बनकर संपत्ति बेचने का प्रयास किया। मोहर सिंह निवासी अंबेडकर पार्क सैलई, ने गवाह के तौर पर बैनामे की प्रक्रिया में कूट रचित दस्तावेजों को प्रमाणित करने की कोशिश की। प्रदीप कुमार निवासी जाफराबाद सरहूपुर, शिकोहाबाद, भी फर्जी गवाह था, इसने फर्जीवाड़े के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। पुलिस बैनामे में लिखे चेक नंबरों और अन्य विवरणों के संबंध में बैंक की संलिप्तता की दृष्टि से भी जांच कर रही है, ताकि इस अंतरराज्यीय रैकेट की जड़ों तक पहुंचा जा सके। इन पर गैंगस्टर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई भी होगी।
निगम पर खड़े हुए सवाल, क्या बन रहे हैं फर्जी दस्तावेज
फर्जी बैनामा दाखिल करने वाले आरोपियों ने एक कूट रचित मृत्यु प्रमाण पत्र संख्या डी0-2023: 90184-001634 नगर निगम फिरोजाबाद द्वारा जारी प्रमाण पत्र के रूप में पेश किया था, जिससे संपत्ति के असली मालिक को मृत दिखाया जा सके। पुलिस मान रही है कि यह तो या तो किसी जालसाज द्वारा निगम के असली सांचों का इस्तेमाल करके बनाया गया है, या फिर इस रैकेट में निगम के अंदरूनी कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं।
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एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह गिरोह मोहम्मदगंज-हाजीपुरा मोहल्ले में स्थित एक मकान का बैनामा कराने पहुंचा था। गिरोह के सदस्यों ने यह साबित करने की कोशिश की कि संपत्ति का मूल मालिक मृत हो चुका है, जिसके लिए उन्होंने जाली मृत्यु प्रमाण पत्र, जो कि नगर निगम द्वारा दर्शाया बताया और बैनामा में 2,80,100 मूल्य का एक फर्जी ई-स्टाम्प लगाया गया था। फर्जी वारिसान प्रमाणपत्रों के साथ-साथ विक्रेता, क्रेता और गवाहों के फर्जी आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज भी इस्तेमाल किए गए थे। रजिस्ट्रार जंग बहादुर शुक्ल ने इन दस्तावेजों की पहचान की। थाना दक्षिण इंस्पेक्टर योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि आरोपी नूर इस्लाम निवासी गालिब नगर गली-1, ने फर्जी कागजात के सहारे मकान खरीदने की कोशिश की। शादमा निवासी हाजीपुरा, ने मृत व्यक्ति की पत्नी बनकर संपत्ति बेचने का प्रयास किया। शाकेब खान निवासी हाजीपुरा, ने मृत व्यक्ति का बेटा बनकर संपत्ति बेचने का प्रयास किया। मोहर सिंह निवासी अंबेडकर पार्क सैलई, ने गवाह के तौर पर बैनामे की प्रक्रिया में कूट रचित दस्तावेजों को प्रमाणित करने की कोशिश की। प्रदीप कुमार निवासी जाफराबाद सरहूपुर, शिकोहाबाद, भी फर्जी गवाह था, इसने फर्जीवाड़े के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। पुलिस बैनामे में लिखे चेक नंबरों और अन्य विवरणों के संबंध में बैंक की संलिप्तता की दृष्टि से भी जांच कर रही है, ताकि इस अंतरराज्यीय रैकेट की जड़ों तक पहुंचा जा सके। इन पर गैंगस्टर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई भी होगी।
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निगम पर खड़े हुए सवाल, क्या बन रहे हैं फर्जी दस्तावेज
फर्जी बैनामा दाखिल करने वाले आरोपियों ने एक कूट रचित मृत्यु प्रमाण पत्र संख्या डी0-2023: 90184-001634 नगर निगम फिरोजाबाद द्वारा जारी प्रमाण पत्र के रूप में पेश किया था, जिससे संपत्ति के असली मालिक को मृत दिखाया जा सके। पुलिस मान रही है कि यह तो या तो किसी जालसाज द्वारा निगम के असली सांचों का इस्तेमाल करके बनाया गया है, या फिर इस रैकेट में निगम के अंदरूनी कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं।
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