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ओपीडी में डॉक्टरों की कमी, मरीज इलाज को परेशान
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जिला अस्पताल में पर्चा बनवाते लोग।
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। जिला अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सकों की कमी से मरीज परेशान हैं। यहां 29 चिकित्सक होने चाहिए, लेकिन महज 14 चिकित्सक ही तैनात हैं। इनमें से भी कई ओपीडी से इतर अलग ड्यूटी पर लगाए जाते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन नहीं हैं। चर्म रोग, नेत्र रोग और नाक-कान गला रोग के विशेषज्ञ दो-दो के स्थान पर एक ही हैं।
जब इनकी ड्यूटी अन्य कार्यों में लगाई जाती है तो मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 800 मरीज उपचार के लिए आते हैं। ओपीडी कक्षों के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगे जाती हैं।
ट्रॉमा सेंटर में भी खलती है चिकित्सकों की कमी
अस्पताल परिसर में बने सरकारी ट्रॉमा सेंटर में भी चिकित्सकों की कमी खलती है। यहां सात चिकित्सकों के अलावा दो ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) होने चाहिए, लेकिन यहां मात्र दो चिकित्सकों की तैनात हैं। अक्सर यहां जिला अस्पताल के चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाती है। इसके चलते जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी हो जाती है।
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डॉक्टरों के हो गए तबादले
फिजीशियन डॉ. मनोज को मेडिकल कॉलेज में एचओडी बना दिया है। बाल रोग विशेष डॉ. एलके गुप्ता को भी मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। आरए शर्मा का तबादला हो गया है। ऐसे में बच्चों का इलाज नहीं हो पा रहा है। निश्चेतक डॉ. आलोक का भी स्थानांतरण शिकोहाबाद हो गया है।
मेडिसिन विभाग में एक चिकित्सक
सोमवार को मेडिसिन विभाग की ओपीडी में मरीजों की लाइन लगी थी। यहां मौजूद डॉ. अजय सिंह मरीजों को देख रहे थे। एक कक्ष में स्वास्थ्य कर्मचारी मरीजों के पर्चे आदि की एंट्री कर रहे थे। चर्मरोग विभाग में भी एक-एक करके मरीजों को प्रवेश दिया जा रहा था। काफी मरीज धूप में लाइन लगाकर खड़े थे।
मरीजों का दर्द
खुजली के कारण बेटी काफी समय से परेशान है। सुबह नौ बजे आए थे, लेकिन भीड़ इतनी है कि लाइन में लगने की हिम्मत नहीं हो रही। ढाई घंटे से अधिक समय हो गया। कोई जान पहचान का मिल जाए तो उससे कहकर डाक्टर साहब को दिखवा लें।
मीरा देवी, सुहागनगर।
बेटे के पूरे शरीर में दाने हो गए हैं। शुक्रवार को चिकित्सक नहीं मिले तो लौट गए। सुबह सात बजे के बाहर बैठे हैं। भीड़ के कारण अभी तक नंबर नहीं आया। तीन घंटे से अधिक का समय बीत गया।
जैनब, कोहिनूर रोड।
भाई को दिखाने के लिए सुबह आठ बजे लाइन में लगे हैं। 11 बजे प्रवेश मिल सका। उसके बाद भी चिकित्सक का इंतजार करना पड़ा। इस बीच तीन घंटे का समय हो गया। इस बीच काफी दिक्कत हुई।
परवेज खां, बाजेवाली गली।
मुझसे पहले यहां सीएमओ रहे डॉ. एसके दीक्षित ने डॉक्टरों की कमी के संबंध में शासन को पत्र भेजा था। हमने भी शासन को रिमाइंडर भेजा है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से मरीजों को परेशानी होती है।
- डॉ. नीता कुलश्रेष्ठ, सीएमओ।
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जब इनकी ड्यूटी अन्य कार्यों में लगाई जाती है तो मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 800 मरीज उपचार के लिए आते हैं। ओपीडी कक्षों के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगे जाती हैं।
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ट्रॉमा सेंटर में भी खलती है चिकित्सकों की कमी
अस्पताल परिसर में बने सरकारी ट्रॉमा सेंटर में भी चिकित्सकों की कमी खलती है। यहां सात चिकित्सकों के अलावा दो ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल आफिसर) होने चाहिए, लेकिन यहां मात्र दो चिकित्सकों की तैनात हैं। अक्सर यहां जिला अस्पताल के चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाती है। इसके चलते जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी हो जाती है।
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डॉक्टरों के हो गए तबादले
फिजीशियन डॉ. मनोज को मेडिकल कॉलेज में एचओडी बना दिया है। बाल रोग विशेष डॉ. एलके गुप्ता को भी मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। आरए शर्मा का तबादला हो गया है। ऐसे में बच्चों का इलाज नहीं हो पा रहा है। निश्चेतक डॉ. आलोक का भी स्थानांतरण शिकोहाबाद हो गया है।
मेडिसिन विभाग में एक चिकित्सक
सोमवार को मेडिसिन विभाग की ओपीडी में मरीजों की लाइन लगी थी। यहां मौजूद डॉ. अजय सिंह मरीजों को देख रहे थे। एक कक्ष में स्वास्थ्य कर्मचारी मरीजों के पर्चे आदि की एंट्री कर रहे थे। चर्मरोग विभाग में भी एक-एक करके मरीजों को प्रवेश दिया जा रहा था। काफी मरीज धूप में लाइन लगाकर खड़े थे।
मरीजों का दर्द
खुजली के कारण बेटी काफी समय से परेशान है। सुबह नौ बजे आए थे, लेकिन भीड़ इतनी है कि लाइन में लगने की हिम्मत नहीं हो रही। ढाई घंटे से अधिक समय हो गया। कोई जान पहचान का मिल जाए तो उससे कहकर डाक्टर साहब को दिखवा लें।
मीरा देवी, सुहागनगर।
बेटे के पूरे शरीर में दाने हो गए हैं। शुक्रवार को चिकित्सक नहीं मिले तो लौट गए। सुबह सात बजे के बाहर बैठे हैं। भीड़ के कारण अभी तक नंबर नहीं आया। तीन घंटे से अधिक का समय बीत गया।
जैनब, कोहिनूर रोड।
भाई को दिखाने के लिए सुबह आठ बजे लाइन में लगे हैं। 11 बजे प्रवेश मिल सका। उसके बाद भी चिकित्सक का इंतजार करना पड़ा। इस बीच तीन घंटे का समय हो गया। इस बीच काफी दिक्कत हुई।
परवेज खां, बाजेवाली गली।
मुझसे पहले यहां सीएमओ रहे डॉ. एसके दीक्षित ने डॉक्टरों की कमी के संबंध में शासन को पत्र भेजा था। हमने भी शासन को रिमाइंडर भेजा है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से मरीजों को परेशानी होती है।
- डॉ. नीता कुलश्रेष्ठ, सीएमओ।