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सुहाग नगरी में खुलेआम लगती है मजदूरों की बोली
ब्यूरो, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Sun, 30 Apr 2017 10:57 PM IST
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- फोटो : getty images
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जहां की चूड़ियां देश-विदेश में चमक विखेरती हैं, वही सुहागनगरी श्रमिकों के शोषण के लिए भी बदनाम है। यहां लाखों श्रमिकों को जिम्मेदार अफसर व श्रमिक संगठन भी हक नहीं दिला पा रहे हैं। यहां श्रमिकों की मंडी में श्रम की खुलेआम बोली लगती है। इससे मजदूरों के सुरक्षा और समृद्धि के लिए बनाए कायदे कानून बेमायने साबित हो रहे हैं।
बता दें कि सुहागनगरी के कांच उद्योग में लाखों श्रमिक कार्यरत हैं। इसके बाद भी कारखानों में स्थाई श्रमिक नहीं हैं। कारखानों में कार्य करने के लिए हर रोज शहर में जगह-जगह लगने वाली मंडियों में श्रमिकों को लगाया जाता है। दिनभर काम कराने के बाद शाम को मजदूरी देकर छुट्टी कर दी जाती है।
कांच उद्योग में तीन-चार लाख श्रमिक काम करते हैं। श्रम विभाग में करीब 35 हजार श्रमिक ही पंजीकृत हैं। श्रमिकों को श्रम कानून के नाम पर कोई सुविधा नसीब नहीं हो रही। सेवायोजक व ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं।
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श्रमिकों से जबरन नौ से 10 घंटे कार्य करा रहे हैं। चूड़ी जुड़ाई मजदूरों का व्यापक पैमाने पर शोषण हो रहा है। उन्हें न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है और नहीं जुड़ाई के लिए मिट्टी का तेल।
कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ के मंत्री भूरी सिंह यादव बताते हैं कि श्रमिक संगठन समस्याओं के निदान के लिए शासन-प्रशासन को अवगत कराते हैं लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं आए। यही कारण है कि श्रमिक अपने हक के लिए सड़क पर आने को मजबूर है। सरकार से अपेक्षा है कि वह श्रमिकों की समस्याओं का तत्परता से समाधान कराए। श्रम कानून का सख्ती से पालन कराया जाए।
चूड़ी जुड़ाई मजदूर संघर्ष कमेटी के मंत्री सोमेश गोस्वामी के अनुसार श्रमिकों को उनका हक दिलाने के लिए संगठन द्वारा लगातार संघर्ष किया जा रहा है। श्रमिकों की समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन को मांग पत्र दिए जा रहे हैं। उनका पालन कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार से अपेक्षा है कि वह श्रमिकों को न्यूनतम वेतन दिलाने को ठोस कदम उठाए। सन्निर्माण श्रमिकों की तरह चूड़ी कार्य में लगने श्रमिकों का भी पंजीकरण कराया जाए।
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बता दें कि सुहागनगरी के कांच उद्योग में लाखों श्रमिक कार्यरत हैं। इसके बाद भी कारखानों में स्थाई श्रमिक नहीं हैं। कारखानों में कार्य करने के लिए हर रोज शहर में जगह-जगह लगने वाली मंडियों में श्रमिकों को लगाया जाता है। दिनभर काम कराने के बाद शाम को मजदूरी देकर छुट्टी कर दी जाती है।
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कांच उद्योग में तीन-चार लाख श्रमिक काम करते हैं। श्रम विभाग में करीब 35 हजार श्रमिक ही पंजीकृत हैं। श्रमिकों को श्रम कानून के नाम पर कोई सुविधा नसीब नहीं हो रही। सेवायोजक व ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं।
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श्रमिकों से जबरन नौ से 10 घंटे कार्य करा रहे हैं। चूड़ी जुड़ाई मजदूरों का व्यापक पैमाने पर शोषण हो रहा है। उन्हें न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है और नहीं जुड़ाई के लिए मिट्टी का तेल।
कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ के मंत्री भूरी सिंह यादव बताते हैं कि श्रमिक संगठन समस्याओं के निदान के लिए शासन-प्रशासन को अवगत कराते हैं लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं आए। यही कारण है कि श्रमिक अपने हक के लिए सड़क पर आने को मजबूर है। सरकार से अपेक्षा है कि वह श्रमिकों की समस्याओं का तत्परता से समाधान कराए। श्रम कानून का सख्ती से पालन कराया जाए।
चूड़ी जुड़ाई मजदूर संघर्ष कमेटी के मंत्री सोमेश गोस्वामी के अनुसार श्रमिकों को उनका हक दिलाने के लिए संगठन द्वारा लगातार संघर्ष किया जा रहा है। श्रमिकों की समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन को मांग पत्र दिए जा रहे हैं। उनका पालन कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार से अपेक्षा है कि वह श्रमिकों को न्यूनतम वेतन दिलाने को ठोस कदम उठाए। सन्निर्माण श्रमिकों की तरह चूड़ी कार्य में लगने श्रमिकों का भी पंजीकरण कराया जाए।