{"_id":"58348e974f1c1b282413b67b","slug":"kasht-utha-rahe-kaisa-kaisa-bore-mein-mil-raha-paisa","type":"story","status":"publish","title_hn":"कष्ट उठा रहे कैसा-कैसा, बोरे में मिल रहा पैसा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कष्ट उठा रहे कैसा-कैसा, बोरे में मिल रहा पैसा
ब्यूरो, अमर उजाला,फीरोजाबाद
Updated Thu, 24 Nov 2016 12:25 AM IST
विज्ञापन
कैश
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी के बाद बैंकों पर उमड़ रही भीड़ मंगलवार को कुछ कम तो हुई लेकिन अधिकतर बैंकों में कैश दोपहर 12 बजे ही खत्म हो गया। दो दिन से जिले को आरबीआई से कैश नहीं मिला है। कैश खत्म होने के बाद बैंकों ने अधिकांश ग्राहकों को सिक्के के रूप में भुगतान किया। एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्कों की थैली लेने वाले लेाग थोड़े असहज दिखाई दिए।
सर्विस रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर सुबह से नोटिस चस्पा कर दिया गया कि बैंक परिसर के अंदर केवल उन ही लोगों को पासबुक होनेे पर प्रवेश दिया जाएगा जो बैंक के ग्राहक हैं। दीवार पर यह भी बोर्ड लगा था कि बैंक में केवल दो हजार का ही नोट है। बस स्टैंड के सामने एक्सिस बैंक पर करेंसी एक्सचेंज नहीं की जा रही। दोपहर करीब दो बजे आईडीबीआई बैंक के बाहर लगे लोगों का कहना था कि अंदर केवल उन ही लोगों को रुपये दिए जा रहे हैं, जो बैंक कर्मचारियों के परिचित है। इस दौरान उनकी पुलिस से नोकझोक भी हुई।
पिता के इलाज को तीन दिन से लगा रहा चक्कर
हाथवंत के समीप बसे गांव नगला किरु निवासी अतेंद्र कुमार का कहना है कि वह दस हजार रुपये निकालने के लिए तीन दिनों से आईडीबीआई बैंक के चक्कर लगा रहा है। पिता का इलाज आगरा के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। सुबह लाइन में लगता है, जब नंबर आता है तो बैंक कर्मचारी कैश न होने की बात कह कर लौटा देते हैं। पिता की हालत भी गंभीर होती जा रही है। दवा के लिए पैसे नहीं है।
विज्ञापन
शादी के लिए भी नहीं दे रहे पैसे
आसफाबाद भारत टाकीज के पीछे निवास करने वाले राजवीर सिंह का कहना है कि उसके बेटे का लगन टीका 24 नवंबर को है। वह 2.50 लाख रुपये निकालने के लिए पिछले दो दिनों से बैंक के चक्कर काट रहा है। हाथ में शादी कार्ड भी है। फिर भी शाखा प्रबंधक रुपये देने से इनकार कर रहे है।
बहन हम तो हस्ताक्षरों न कर पा रहे
समय करीब डेढ़ बजे। स्थान सुहागनगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक। एक दुकान के बाहर लाइन में लगी महिलाएं। आपस में बातचीत कर रही थीं, तुम पैसे निकालने के लिए आई हो बहन जी। हां का करें। कुछ मिल जाए तो कम से कम रोज को खर्च तो चले। हस्ताक्षर तो कर लेती होगी। नहीं बहन अंगूठा लगात हैं। चलो यह ठीक है। चों की हम तो हस्ताक्षर करत हैं। लेकिन खाते के हस्ताक्षर से मिलान न है पा रहो। जा कारण पिछले तीन दिन से चक्कर लगा रहे है।
वृद्ध महिला नहीं उठा सकी सिक्कों के पैकेट
बैंकों में नोट की कमी के चलते सिक्क्कों की बोरियां थमाई जा रही हैं। आसफाबाद निवासी प्रवीन कुमार जब ढ़ाई हजार रुपये विजया बैंक से निकालने के लिए पहुंचा तो उसे सिक्कों का पैकेट थमा दिया। एक बुजुर्ग महिला पांच हजार रुपये लेने पहुंची तो उसे सिक्कों की दो पैकेट थमा दिए। बुजुर्ग महिला दूसरों की मदद लेकर उस वजनी पैकेटों को बाहर ले आई। सिक्कों के पैकेट उठाने के लिए उसने घर से अपने नाती को फोन करके बुलाया।
चार घंटे बाद आया नंबर, बैंककर्मी लौटाने लगे
बैंकों में अलग-अलग नियम चल रहे हैं। तिलक नगर निवासी निशि शर्मा को 50 हजार रुपये से ज्यादा नगदी विजया बैंक में जमा करनी थी। वह चार घंटे लाइन में लगकर पेनकार्ड के साथ खिड़की तक पहुंची। बैंककर्मी ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि आज पैनकार्ड दे जाओ। उसे फीड करने के बाद कल फिर जमा करने आना। इस पर उनकी नोकझोक भी हुई। उनका कहना था कि अन्य बैंकों में तो पैन कार्ड के साथ लाखों की नगदी जमा की जा रही है।
बिस्कुट, समोसे पहुंचाते रहे परिजन
बैंक की लाइन में लगने के लिए सुबह से लोग घरों से निकल आते हैं। बैंक के अंदर भी कई-कई घंटे लग जाते हैं। ऐसे में परिजन बैंक की खिड़की से अपने घरवालों को बिस्कुट, समोसे खिड़की से पहुंचाते रहे।
विज्ञापन
सर्विस रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक के बाहर सुबह से नोटिस चस्पा कर दिया गया कि बैंक परिसर के अंदर केवल उन ही लोगों को पासबुक होनेे पर प्रवेश दिया जाएगा जो बैंक के ग्राहक हैं। दीवार पर यह भी बोर्ड लगा था कि बैंक में केवल दो हजार का ही नोट है। बस स्टैंड के सामने एक्सिस बैंक पर करेंसी एक्सचेंज नहीं की जा रही। दोपहर करीब दो बजे आईडीबीआई बैंक के बाहर लगे लोगों का कहना था कि अंदर केवल उन ही लोगों को रुपये दिए जा रहे हैं, जो बैंक कर्मचारियों के परिचित है। इस दौरान उनकी पुलिस से नोकझोक भी हुई।
विज्ञापन
पिता के इलाज को तीन दिन से लगा रहा चक्कर
हाथवंत के समीप बसे गांव नगला किरु निवासी अतेंद्र कुमार का कहना है कि वह दस हजार रुपये निकालने के लिए तीन दिनों से आईडीबीआई बैंक के चक्कर लगा रहा है। पिता का इलाज आगरा के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। सुबह लाइन में लगता है, जब नंबर आता है तो बैंक कर्मचारी कैश न होने की बात कह कर लौटा देते हैं। पिता की हालत भी गंभीर होती जा रही है। दवा के लिए पैसे नहीं है।
विज्ञापन
शादी के लिए भी नहीं दे रहे पैसे
आसफाबाद भारत टाकीज के पीछे निवास करने वाले राजवीर सिंह का कहना है कि उसके बेटे का लगन टीका 24 नवंबर को है। वह 2.50 लाख रुपये निकालने के लिए पिछले दो दिनों से बैंक के चक्कर काट रहा है। हाथ में शादी कार्ड भी है। फिर भी शाखा प्रबंधक रुपये देने से इनकार कर रहे है।
बहन हम तो हस्ताक्षरों न कर पा रहे
समय करीब डेढ़ बजे। स्थान सुहागनगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक। एक दुकान के बाहर लाइन में लगी महिलाएं। आपस में बातचीत कर रही थीं, तुम पैसे निकालने के लिए आई हो बहन जी। हां का करें। कुछ मिल जाए तो कम से कम रोज को खर्च तो चले। हस्ताक्षर तो कर लेती होगी। नहीं बहन अंगूठा लगात हैं। चलो यह ठीक है। चों की हम तो हस्ताक्षर करत हैं। लेकिन खाते के हस्ताक्षर से मिलान न है पा रहो। जा कारण पिछले तीन दिन से चक्कर लगा रहे है।
वृद्ध महिला नहीं उठा सकी सिक्कों के पैकेट
बैंकों में नोट की कमी के चलते सिक्क्कों की बोरियां थमाई जा रही हैं। आसफाबाद निवासी प्रवीन कुमार जब ढ़ाई हजार रुपये विजया बैंक से निकालने के लिए पहुंचा तो उसे सिक्कों का पैकेट थमा दिया। एक बुजुर्ग महिला पांच हजार रुपये लेने पहुंची तो उसे सिक्कों की दो पैकेट थमा दिए। बुजुर्ग महिला दूसरों की मदद लेकर उस वजनी पैकेटों को बाहर ले आई। सिक्कों के पैकेट उठाने के लिए उसने घर से अपने नाती को फोन करके बुलाया।
चार घंटे बाद आया नंबर, बैंककर्मी लौटाने लगे
बैंकों में अलग-अलग नियम चल रहे हैं। तिलक नगर निवासी निशि शर्मा को 50 हजार रुपये से ज्यादा नगदी विजया बैंक में जमा करनी थी। वह चार घंटे लाइन में लगकर पेनकार्ड के साथ खिड़की तक पहुंची। बैंककर्मी ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि आज पैनकार्ड दे जाओ। उसे फीड करने के बाद कल फिर जमा करने आना। इस पर उनकी नोकझोक भी हुई। उनका कहना था कि अन्य बैंकों में तो पैन कार्ड के साथ लाखों की नगदी जमा की जा रही है।
बिस्कुट, समोसे पहुंचाते रहे परिजन
बैंक की लाइन में लगने के लिए सुबह से लोग घरों से निकल आते हैं। बैंक के अंदर भी कई-कई घंटे लग जाते हैं। ऐसे में परिजन बैंक की खिड़की से अपने घरवालों को बिस्कुट, समोसे खिड़की से पहुंचाते रहे।