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हनुमानगंज और ओमनगर जैन मंदिर में किया जलधारा महोत्सव का आयोजन
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ओम नगर स्थित जैन मंदिर में आयोजित किया गया जलधारा महोत्सव।
- फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। हनुमानगंज स्थित दिगंबर जैन रैमजा मंदिर में मंगलवार को वार्षिक जलधारा महोत्सव का आयोजन किया गया। इंद्रों ने मंत्रोच्चारण के साथ भगवान महावीर की जलधारा की। श्रीजी का संगीतमय पूजन किया गया।
इंद्र बने पुजारी अभिषेक करने नेवज लेने गए। इसके बाद मंत्रों के साथ इंद्रों ने अभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने अभिषेक को मस्तिष्क पर लगाकर स्वयं को धन्य बनाया। इस दौरान वीरेंद्र जैन, पिंकी जैन, मुकेश जैन, विनय जैन, उमेश जैन, राजीव जैन, रतन जैन, सुभाष जैन, पंकज जैन उपस्थित रहे। इधर, ओमनगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में भी जलधारा महोत्सव एवं मां पदमावती का श्रृंगार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान शिवा जैन, सुरेंद्र जैन, अनमोल जैन मौजूद रहे।
चंद्रप्रभु मंदिर में हुआ धर्मसभा का आयोजन
दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर अतिशय क्षेत्र समिति के तत्वावधान में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन भक्ति की धूम रही। दोपहर में आयोजित धर्मसभा में ब्रह्मचारिणी सरिता दीदी ने ग्रंथराज तत्वार्थसूत्र के दसों अध्याय के 357 मूल सूत्रों का वाचन किया। इसके बाद दीदी ने तत्वार्थसूत्र जी के आठवें अध्याय का विस्तृत विवेचन करते हुये कहा कि सांसारिक कार्यों में लगे रहने वाले स्वकल्याण के लिये समय नहीं निकाल पाते।
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मुनि बनना सरल है, लेकिन शुद्ध भाव रखना बहुत कठिन है। धर्म आराधना करने के लिये भोजन करना परम आवश्यक है, मुनि भी इसीलिये एक बार भोजन जरुर करते है। राजा का ताल स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व पर जैन विद्वान डा. विमल कुमार जैन ने त्याग धर्म के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मानव जीवन की बहुमूल्यता को बताते हुए कहा कि मानव जीवन 84 लाख योनियों के बाद बड़े पुण्य प्रभाव से प्रदत्त होता है।
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इंद्र बने पुजारी अभिषेक करने नेवज लेने गए। इसके बाद मंत्रों के साथ इंद्रों ने अभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने अभिषेक को मस्तिष्क पर लगाकर स्वयं को धन्य बनाया। इस दौरान वीरेंद्र जैन, पिंकी जैन, मुकेश जैन, विनय जैन, उमेश जैन, राजीव जैन, रतन जैन, सुभाष जैन, पंकज जैन उपस्थित रहे। इधर, ओमनगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में भी जलधारा महोत्सव एवं मां पदमावती का श्रृंगार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान शिवा जैन, सुरेंद्र जैन, अनमोल जैन मौजूद रहे।
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चंद्रप्रभु मंदिर में हुआ धर्मसभा का आयोजन
दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर अतिशय क्षेत्र समिति के तत्वावधान में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन भक्ति की धूम रही। दोपहर में आयोजित धर्मसभा में ब्रह्मचारिणी सरिता दीदी ने ग्रंथराज तत्वार्थसूत्र के दसों अध्याय के 357 मूल सूत्रों का वाचन किया। इसके बाद दीदी ने तत्वार्थसूत्र जी के आठवें अध्याय का विस्तृत विवेचन करते हुये कहा कि सांसारिक कार्यों में लगे रहने वाले स्वकल्याण के लिये समय नहीं निकाल पाते।
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मुनि बनना सरल है, लेकिन शुद्ध भाव रखना बहुत कठिन है। धर्म आराधना करने के लिये भोजन करना परम आवश्यक है, मुनि भी इसीलिये एक बार भोजन जरुर करते है। राजा का ताल स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व पर जैन विद्वान डा. विमल कुमार जैन ने त्याग धर्म के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मानव जीवन की बहुमूल्यता को बताते हुए कहा कि मानव जीवन 84 लाख योनियों के बाद बड़े पुण्य प्रभाव से प्रदत्त होता है।