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धर्म बचाओ आंदोलन में सड़कों पर उतरेगा जैन समाज
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Fri, 21 Aug 2015 10:50 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा जैन धर्म में होने वाली संथारा-संलेखना प्रथा को आत्मदाह की श्रेणी में रखकर रोक लगाने से समाज के लोग आक्रोशित हैं। पूरे देश के जैन समाज ने 24 अगस्त को धर्म बचाओ आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जैन मंदिरों सभाओं का दौर चलता रहा। अहिंसक आंदोलन की रणनीति समाज के प्रबुद्धजनों ने बनाई।
जैन धर्म की संथारा-संलेखना पर हाईकोर्ट की रोक विवाद का विषय बन गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इसे आत्मदाह की श्रेणी में रखा है। जबकि जैन समाज इस प्रथा को महत्वपूर्ण मानते हैं। इस रोक को हटाने की मांग को लेकर जैन समाज के लोगों ने 24 अगस्त को मौन जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई है। साथ ही राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपने की बात कही है। जैन नगर मंदिर, नसियाजी मंदिर और चंद्रप्रभु मंदिर में बैठकों का आयोजन किया गया। जिसमें प्रबुद्धजन और भारी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
सफेद-केसरिया रंग में दिखेंगे समाज के लोग
प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश जैन ने बताया कि जैन समाज धर्म बचाओ आंदोलन करेगा। जिसमें सफेद वस्त्र पहनकर पुरुष और केसरिया वस्त्र में महिलाएं शामिल होंगी। उन्होंने बताया कि जुलूस निकाला जाएगा। जिसमें कोई नारेबाजी नहीं होगी। जुलूस के बाद समाज के लोग राजस्थान कोर्ट, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देंगे।
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सोशल मीडिया पर भारी विरोध
सोशल मीडिया पर भी संथारा-संलेखना पर रोक का विरोध देखने को मिल रहा है। फेसबुक और व्हाट्सएप पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। यहां तक कि जैन धर्म बचाओ महाआंदोलन को सफल बनाने की अपील करते हुए प्रोफाइल पर तस्वीर लगा ली हैं।
क्या कहते हैं समाज के प्रबुद्धजन
धर्म के नाम पर हो रही पशु हत्या को न्याय संगत और आत्म कल्याण के लिए किए गए अहिंसक कृत्य को गलत बताया जा रहा है। न्यायपालिका का तर्क न्याय संगत नहीं है।
जैनमुनि अमित सागर महाराज
जब कोई असाध्य बीमारी हो जाए, दवाएं काम करना बंद दें। लगने लगे कि अब मृत्यु को हर्ष के साथ निमंत्रण देना है। इसे आत्मदाह नहीं सकते हैं। जहां कषाय होती है, वहां आत्मदाह होती है। यह प्रथा हजारों साल पुरानी है। जिसे हाईकोर्ट ने जल्दबाजी में रोक दिया।
प्राचार्य नरेंद्रप्रकाश जैन
संथारा-संलेखना की प्रक्रिया से समाधिमरण लेने की प्रक्रिया है। यह जैन धर्म की अलग प्रक्रिया है। इसे समाधि महोत्सव का नाम दिया है। आत्मदाह करने पर शोक होता है। जैन समाज हाईकोर्ट के आदेश का विरोध नहीं कर रहा है। बल्कि इस आदेश की असहमति जता रहा है।
अनूपचंद्र जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता
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जैन धर्म की संथारा-संलेखना पर हाईकोर्ट की रोक विवाद का विषय बन गई है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इसे आत्मदाह की श्रेणी में रखा है। जबकि जैन समाज इस प्रथा को महत्वपूर्ण मानते हैं। इस रोक को हटाने की मांग को लेकर जैन समाज के लोगों ने 24 अगस्त को मौन जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई है। साथ ही राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपने की बात कही है। जैन नगर मंदिर, नसियाजी मंदिर और चंद्रप्रभु मंदिर में बैठकों का आयोजन किया गया। जिसमें प्रबुद्धजन और भारी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए।
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सफेद-केसरिया रंग में दिखेंगे समाज के लोग
प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश जैन ने बताया कि जैन समाज धर्म बचाओ आंदोलन करेगा। जिसमें सफेद वस्त्र पहनकर पुरुष और केसरिया वस्त्र में महिलाएं शामिल होंगी। उन्होंने बताया कि जुलूस निकाला जाएगा। जिसमें कोई नारेबाजी नहीं होगी। जुलूस के बाद समाज के लोग राजस्थान कोर्ट, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देंगे।
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सोशल मीडिया पर भारी विरोध
सोशल मीडिया पर भी संथारा-संलेखना पर रोक का विरोध देखने को मिल रहा है। फेसबुक और व्हाट्सएप पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। यहां तक कि जैन धर्म बचाओ महाआंदोलन को सफल बनाने की अपील करते हुए प्रोफाइल पर तस्वीर लगा ली हैं।
क्या कहते हैं समाज के प्रबुद्धजन
धर्म के नाम पर हो रही पशु हत्या को न्याय संगत और आत्म कल्याण के लिए किए गए अहिंसक कृत्य को गलत बताया जा रहा है। न्यायपालिका का तर्क न्याय संगत नहीं है।
जैनमुनि अमित सागर महाराज
जब कोई असाध्य बीमारी हो जाए, दवाएं काम करना बंद दें। लगने लगे कि अब मृत्यु को हर्ष के साथ निमंत्रण देना है। इसे आत्मदाह नहीं सकते हैं। जहां कषाय होती है, वहां आत्मदाह होती है। यह प्रथा हजारों साल पुरानी है। जिसे हाईकोर्ट ने जल्दबाजी में रोक दिया।
प्राचार्य नरेंद्रप्रकाश जैन
संथारा-संलेखना की प्रक्रिया से समाधिमरण लेने की प्रक्रिया है। यह जैन धर्म की अलग प्रक्रिया है। इसे समाधि महोत्सव का नाम दिया है। आत्मदाह करने पर शोक होता है। जैन समाज हाईकोर्ट के आदेश का विरोध नहीं कर रहा है। बल्कि इस आदेश की असहमति जता रहा है।
अनूपचंद्र जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता