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जैन मुनि विनम्र सागर ससंघ का मंगल प्रवेश
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 10 Jul 2016 10:57 PM IST
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आचार्य विनम्र सागर जी महाराज ने रविवार को ससंघ मंगल प्रवेश किया
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सुहागनगरी का वातावरण पूरी तरह धर्ममयी नजर आया। जैन मुनि विनम्र सागर महाराज ससंघ के स्वागत करने के लिए काफी संख्या में जैन समाज के लोग सीएल जैन डिग्री कालेज पर पहुंच गए। जैसे ही मुनि ससंघ के सुहागनगरी में कदम रखे अहिंसा के जयकारे गूंज उठे। कदम-कदम पर पाद प्रक्षाल एवं आरती उतार कर मुनि ससंघ का स्वागत किया गया।
चतुर्मास करने के लिए जैन मुनि विनम्र सागर महाराज 10 पिच्छिकाओं के साथ सुहागनगरी में विराजमान हुए। छह मुनि और माताजी भी मुनि ससंघ में शामिल हैं। रविवार को सुबह साढे़ छह बजे से लोग जैन मुनि ससंघ का स्वागत करने के लिए सीएल जैन डिग्री कॉलेज में बैंडबाजों के साथ पहुंच गए। मुनि प्रयत्न सागर महाराज ने मुनि ससंघ की अगुवाई की। मुनि ससंघ बैंडबाजों के साथ गणेश नगर, जैन नगर खेड़ा होते हुए छदामीलाल जैन मंदिर पहुंचे। विभिन्न स्थानों पर मुनिश्री की आरती और पाद प्रक्षालन हुआ। मुनि ससंघ ने श्रीजी के अभिषेक के बाद धर्मसभा में उद्बोधन दिया। प्रवचन सभा की शुरुआत मंगलाचरण के साथ की गई। मुनि विन्रम सागर महाराज द्वारा लिखित भजन ‘जीवन है पानी की बूंद सब मिट जाएगा’ का अर्थ समझाया। मुनि महाराज ने कहा कि मैं सुहागनगरी में तीन चीजें लेकर आया हूं। प्रेम, प्यार और वात्सल्य। प्यार छोटों के लिए। वात्सल्य बूढ़ों के लिए लेकर आया हूं। कहा कि मैं णमोकार और भक्तांबर का पाठ सिखाउंगा और उसकी महिमा बताउंगा। 1986 में मुनि विमल सागर महाराज के चतुर्मास के बाद अब 10 पिच्छिकाओं का मंगल प्रवेश इस धर्मनगरी में हुआ है। समिति संयोजक अरुण जैन, अध्यक्ष विजय जैन, महामंत्री मनोज जैन, डॉ महेंद्र जैन, मीडिया प्रभारी अजय जैन, अजय जैन एडवोकेट, राहुल जैन, महावीर जैन, अनूपचंद्र जैन एडवोकेट, शैलेंद्र जैन शैली, अनुज जैन आदि लोग उपस्थित रहे।
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चतुर्मास करने के लिए जैन मुनि विनम्र सागर महाराज 10 पिच्छिकाओं के साथ सुहागनगरी में विराजमान हुए। छह मुनि और माताजी भी मुनि ससंघ में शामिल हैं। रविवार को सुबह साढे़ छह बजे से लोग जैन मुनि ससंघ का स्वागत करने के लिए सीएल जैन डिग्री कॉलेज में बैंडबाजों के साथ पहुंच गए। मुनि प्रयत्न सागर महाराज ने मुनि ससंघ की अगुवाई की। मुनि ससंघ बैंडबाजों के साथ गणेश नगर, जैन नगर खेड़ा होते हुए छदामीलाल जैन मंदिर पहुंचे। विभिन्न स्थानों पर मुनिश्री की आरती और पाद प्रक्षालन हुआ। मुनि ससंघ ने श्रीजी के अभिषेक के बाद धर्मसभा में उद्बोधन दिया। प्रवचन सभा की शुरुआत मंगलाचरण के साथ की गई। मुनि विन्रम सागर महाराज द्वारा लिखित भजन ‘जीवन है पानी की बूंद सब मिट जाएगा’ का अर्थ समझाया। मुनि महाराज ने कहा कि मैं सुहागनगरी में तीन चीजें लेकर आया हूं। प्रेम, प्यार और वात्सल्य। प्यार छोटों के लिए। वात्सल्य बूढ़ों के लिए लेकर आया हूं। कहा कि मैं णमोकार और भक्तांबर का पाठ सिखाउंगा और उसकी महिमा बताउंगा। 1986 में मुनि विमल सागर महाराज के चतुर्मास के बाद अब 10 पिच्छिकाओं का मंगल प्रवेश इस धर्मनगरी में हुआ है। समिति संयोजक अरुण जैन, अध्यक्ष विजय जैन, महामंत्री मनोज जैन, डॉ महेंद्र जैन, मीडिया प्रभारी अजय जैन, अजय जैन एडवोकेट, राहुल जैन, महावीर जैन, अनूपचंद्र जैन एडवोकेट, शैलेंद्र जैन शैली, अनुज जैन आदि लोग उपस्थित रहे।
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