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गैस कीमतों में एक अप्रैल से हो सकती है बढ़ोत्तरी
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Mon, 21 Mar 2016 11:13 PM IST
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एक अप्रैल से गेल गैस की कीमतों में बढोत्तरी कर सकती है
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नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन कांच उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। गेल गैस लि. द्वारा एक अप्रैल से गैस की दरों में भारी वृद्धि की जा सकती है। गैस की दरों में वृद्धि को लेकर कांच उद्यमियों में खासी बेचैनी है।
सुहागनगरी का सुप्रसिद्ध कांच उद्योग लंबे समय से समस्याओं के भंवरजाल में फंसा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांच उद्योग की तरक्की का जो सपना दिखाया था, वह बहुत दूर नजर आ रहा है। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद भी कांच उद्योग को कोई राहत नहीं मिली, अपितु आए दिन जारी होने वाले फरमान उद्यमियों की नींद उड़ा रहे हैं। कांच उद्योग को संचालित करने के लिए गेल गैस लि. द्वारा एपीएम और आरएलएनजी की खपत के आधार पर गैस की रेट वसूली जा रही है।
वर्तमान में गेल द्वारा करीब 16 रुपये तक गैस की कीमत वसूली जा रही है। वहीं उद्यमी लंबे समय से सस्ती गैस देने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने सस्ती गैस देने का आजतक कोई एलान नहीं किया अपितु उद्योग जगत को बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार द्वारा गैस की दरों में 60 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करने की तैयारी कर ली है। गैस की दरों में भारी भरकम वृद्धि होने की आहट से उद्यमियों की नींद उड़ी हुई है। उद्यमी केंद्रीय मंत्रियों, गेल अफसरों को संपर्क कर इसकी जानकारी जुटाने में लगे हैं। उद्यमियों की मानें तो यदि 60 प्रतिशत तक गैस की कीमतें बढ़ी तो कांच उद्योग की हालत खस्ता हो जाएगी।
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कांच उद्योग को भारी पड़ सकती है गैस वृद्धि
केंद्र सरकार द्वारा गैस की कीमत में प्रस्तावित 60 प्रतिशत बढ़ोत्तरी से कांच उद्योग को खासा नुकसान हो सकता है। वर्तमान में कांच उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है। आए दिन होने वाली प्राकृतिक आपदा, बड़े आंदोलन के साथ मार्केट में घटती मांग भी कांच उद्योग के लिए समस्याएं खड़ी कर रहे हैं। दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट अध्यक्ष हनुमान प्रसाद गर्ग का कहना है कि वर्तमान में कांच उद्योग तमाम मुसीबतों से जूझ रहा है। ऐसे में यदि गैल द्वारा गैस की दरों में 60 प्रतिशत तक वृद्धि की गई तो कांच इंडस्ट्रीज पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
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सुहागनगरी का सुप्रसिद्ध कांच उद्योग लंबे समय से समस्याओं के भंवरजाल में फंसा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांच उद्योग की तरक्की का जो सपना दिखाया था, वह बहुत दूर नजर आ रहा है। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद भी कांच उद्योग को कोई राहत नहीं मिली, अपितु आए दिन जारी होने वाले फरमान उद्यमियों की नींद उड़ा रहे हैं। कांच उद्योग को संचालित करने के लिए गेल गैस लि. द्वारा एपीएम और आरएलएनजी की खपत के आधार पर गैस की रेट वसूली जा रही है।
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वर्तमान में गेल द्वारा करीब 16 रुपये तक गैस की कीमत वसूली जा रही है। वहीं उद्यमी लंबे समय से सस्ती गैस देने की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने सस्ती गैस देने का आजतक कोई एलान नहीं किया अपितु उद्योग जगत को बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार द्वारा गैस की दरों में 60 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करने की तैयारी कर ली है। गैस की दरों में भारी भरकम वृद्धि होने की आहट से उद्यमियों की नींद उड़ी हुई है। उद्यमी केंद्रीय मंत्रियों, गेल अफसरों को संपर्क कर इसकी जानकारी जुटाने में लगे हैं। उद्यमियों की मानें तो यदि 60 प्रतिशत तक गैस की कीमतें बढ़ी तो कांच उद्योग की हालत खस्ता हो जाएगी।
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कांच उद्योग को भारी पड़ सकती है गैस वृद्धि
केंद्र सरकार द्वारा गैस की कीमत में प्रस्तावित 60 प्रतिशत बढ़ोत्तरी से कांच उद्योग को खासा नुकसान हो सकता है। वर्तमान में कांच उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है। आए दिन होने वाली प्राकृतिक आपदा, बड़े आंदोलन के साथ मार्केट में घटती मांग भी कांच उद्योग के लिए समस्याएं खड़ी कर रहे हैं। दि ग्लास इंडस्ट्रियल सिंडीकेट अध्यक्ष हनुमान प्रसाद गर्ग का कहना है कि वर्तमान में कांच उद्योग तमाम मुसीबतों से जूझ रहा है। ऐसे में यदि गैल द्वारा गैस की दरों में 60 प्रतिशत तक वृद्धि की गई तो कांच इंडस्ट्रीज पूरी तरह खत्म हो जाएगी।