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Firozabad News: उद्यमी राजकुमार मित्तल का गोदाम बनवाने के लिए सीजीएम ने बदल दिए थे रक्षा नियम
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फिरोजाबाद। हजरतपुर स्थित ओईएफ (ऑर्डिनेंस इक्विपमेंट फैक्टरी) की सुरक्षा दीवार के पास हुए अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सीबीआई की तफ्तीश में सामने आया है कि शहर के प्रमुख उद्यमी राजकुमार मित्तल ने ने करीब 40 बीघा जमीन वर्ष 2010 के आसपास खरीदी थी। वर्क्स ऑफ डिफेंस एक्ट के तहत फैक्टरी की बाहरी बाउंड्री के 30 फुट के दायरे में किसी भी तरह का पक्का निर्माण करने पर पूरी तरह रोक थी।
राजकुमार मित्तल यहां गोदाम का निर्माण कराना चाहते थे, जिसमें यह नियम आड़े आ रहा था। आरोप है कि 30 लाख की भारी-भरकम रिश्वत लेने के बाद तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह ने 19 फरवरी 2025 को इस नियम में बदलाव कर दिया और निर्माण-मुक्त दायरे को 30 फुट से घटाकर महज 20 फुट तक सीमित कर दिया। नियम बदलते ही उद्यमी ने उस जमीन पर आरएमसी पिलर के साथ 18 फुट ऊंची और 289 मीटर लंबी बाउंड्रीवाल खड़ी कर ली।
इस पूरे खेल की भनक कारखाने के ही एजीएम सुधीर कुमार मीणा को लग गई थी। उन्होंने इस गंभीर भ्रष्टाचार और सुरक्षा से समझौते की लिखित शिकायत जुलाई 2025 में आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) से की थी। देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील संस्थान का मामला होने के कारण एटीएस ने इसकी प्राथमिक जांच की। मामले की गंभीरता और भारी लेनदेन को देखते हुए बाद में यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।
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राजकुमार मित्तल यहां गोदाम का निर्माण कराना चाहते थे, जिसमें यह नियम आड़े आ रहा था। आरोप है कि 30 लाख की भारी-भरकम रिश्वत लेने के बाद तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह ने 19 फरवरी 2025 को इस नियम में बदलाव कर दिया और निर्माण-मुक्त दायरे को 30 फुट से घटाकर महज 20 फुट तक सीमित कर दिया। नियम बदलते ही उद्यमी ने उस जमीन पर आरएमसी पिलर के साथ 18 फुट ऊंची और 289 मीटर लंबी बाउंड्रीवाल खड़ी कर ली।
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इस पूरे खेल की भनक कारखाने के ही एजीएम सुधीर कुमार मीणा को लग गई थी। उन्होंने इस गंभीर भ्रष्टाचार और सुरक्षा से समझौते की लिखित शिकायत जुलाई 2025 में आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) से की थी। देश की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील संस्थान का मामला होने के कारण एटीएस ने इसकी प्राथमिक जांच की। मामले की गंभीरता और भारी लेनदेन को देखते हुए बाद में यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।
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