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Firozabad News: बच्चों को नहीं मिल रहा पूरा निवाला, कक्षाएं छोड़ राशन के लिए भटक रहे शिक्षक
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फिरोजाबाद। सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को मिलने वाले भोजन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। विभागीय अव्यवस्था और कोटेदारों की मनमानी के चलते नौनिहालों को पूरा निवाला तक नसीब नहीं हो पा रहा है। हालात यह हैं कि अप्रैल से जून तक शिक्षकों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर या उधार का राशन लाकर बच्चों को खाना खिलाना पड़ा। अब जुलाई में शासन ने तीन महीने का राशन आवंटित तो कर दिया, लेकिन स्कूलों तक पूरा अनाज अब भी नहीं पहुंच रहा है।
कई जगहों पर कोटेदारों ने राशन देने से साफ इनकार कर दिया है, तो कुछ स्थानों पर आधा अनाज ही दिया गया। दर्जनों स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें आवंटन के बाद भी एक दाना नहीं मिला है। अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि जब कागजों में राशन आवंटित हो चुका है, तो आखिर वह गया कहां? क्या अनाज का उठान ही नहीं हुआ या फिर सरकारी राशन बीच रास्ते में ही डंप हो गया?
इस पूरी गड़बड़ी का सबसे बड़ा खामियाजा बच्चों की पढ़ाई और सेहत को उठाना पड़ रहा है। शिक्षक कक्षाओं को छोड़कर राशन डीलरों और विभागीय अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, बच्चों को पौष्टिक भोजन न मिलने से उनके स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका गहरा गई है। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द ही इस अव्यवस्था पर लगाम नहीं लगी, तो शिक्षा और बाल स्वास्थ्य दोनों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
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कहीं शून्य तो कहीं मिला आधा अनाज
प्राइमरी स्कूल थरौआ (एका): प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने बताया कि तीन महीने जेब से भोजन बनवाया। अब आवंटन होने के बाद भी एक किलो अनाज नहीं मिला। डीलर का कहना है कि उठान ही नहीं हुआ। थरौआ पंचायत के करीब 30 स्कूलों का यही हाल है।
प्राइमरी स्कूल नायकपुर (खैरगढ़): प्रधानाध्यापक भवनेश यादव के अनुसार 90 किलो गेहूं और 177 किलो चावल आवंटित हुआ था, लेकिन डीलर ने महज 50-50 किलो देकर बाकी राशन के लिए बाद में आने की बात कहकर टहला दिया।
प्राइमरी स्कूल पडरिया: प्रधानाध्यापक नरेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चों का भोजन बंद न हो, इसलिए पहले उधार लेकर एमडीएम बनवाया। अब आवंटन का आधा राशन ही थमाया गया है।
अधिकारी का पक्ष:
हम संबंधित विभाग से वार्ता करेंगे कि आखिर राशन क्यों नहीं मिल रहा है। जितना आवंटन हुआ है, उतना राशन नियमानुसार मिलना चाहिए।
- अनिल कुमार, बीएसए
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कई जगहों पर कोटेदारों ने राशन देने से साफ इनकार कर दिया है, तो कुछ स्थानों पर आधा अनाज ही दिया गया। दर्जनों स्कूल ऐसे हैं, जिन्हें आवंटन के बाद भी एक दाना नहीं मिला है। अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि जब कागजों में राशन आवंटित हो चुका है, तो आखिर वह गया कहां? क्या अनाज का उठान ही नहीं हुआ या फिर सरकारी राशन बीच रास्ते में ही डंप हो गया?
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इस पूरी गड़बड़ी का सबसे बड़ा खामियाजा बच्चों की पढ़ाई और सेहत को उठाना पड़ रहा है। शिक्षक कक्षाओं को छोड़कर राशन डीलरों और विभागीय अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, बच्चों को पौष्टिक भोजन न मिलने से उनके स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका गहरा गई है। शिक्षकों का कहना है कि यदि जल्द ही इस अव्यवस्था पर लगाम नहीं लगी, तो शिक्षा और बाल स्वास्थ्य दोनों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
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कहीं शून्य तो कहीं मिला आधा अनाज
प्राइमरी स्कूल थरौआ (एका): प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने बताया कि तीन महीने जेब से भोजन बनवाया। अब आवंटन होने के बाद भी एक किलो अनाज नहीं मिला। डीलर का कहना है कि उठान ही नहीं हुआ। थरौआ पंचायत के करीब 30 स्कूलों का यही हाल है।
प्राइमरी स्कूल नायकपुर (खैरगढ़): प्रधानाध्यापक भवनेश यादव के अनुसार 90 किलो गेहूं और 177 किलो चावल आवंटित हुआ था, लेकिन डीलर ने महज 50-50 किलो देकर बाकी राशन के लिए बाद में आने की बात कहकर टहला दिया।
प्राइमरी स्कूल पडरिया: प्रधानाध्यापक नरेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चों का भोजन बंद न हो, इसलिए पहले उधार लेकर एमडीएम बनवाया। अब आवंटन का आधा राशन ही थमाया गया है।
अधिकारी का पक्ष:
हम संबंधित विभाग से वार्ता करेंगे कि आखिर राशन क्यों नहीं मिल रहा है। जितना आवंटन हुआ है, उतना राशन नियमानुसार मिलना चाहिए।
- अनिल कुमार, बीएसए