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Firozabad News: हस्तशिल्प कारोबार को राहत,ग्लास डेकोरेटर्स के हाथ खाली
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कांच आयटम।
फिरोजाबाद। केंद्र की ओर से जीएसटी स्लैब में किये बदलाव पर फिरोजाबाद के कांच उद्योग जगत ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। हस्तशिल्प आयटम को पांच प्रतिशत जीएसटी स्लैब में रखे जाने का फिरोजाबाद के कांच उद्यमियों ने स्वागत योग्य कदम बताया है। वहीं, प्रेस ग्लास (माउथ ब्लोइंग) आयटम पर जीएसटी कम नहीं करने से कांच कारोबारी निराश हैं।
जीएसटी स्लैब में बदलाव से पूर्व फिरोजाबाद के कांच निर्यातक कारोबार की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी हैं। हालांकि केंद्र की ओर से फ्लावर पॉट, कैंडिल जैसे कांच हस्तशिल्प आयटम को 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब से हटाकर पांच प्रतिशत जीएसटी वाले स्लैब में शामिल किया है। वहीं, गत्ता पैकिंग वाले आयटम पर भी अब पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा। जीएसटी स्लैब में किये ताजा बदलाव से देश के घरेलू बाजारों में कांच आयटम की डिमांड बढ़ेगी। खास तौर पर मध्यम वर्ग व अल्प आय वर्ग में कांच निर्मित डायनिंग टेबल और कांच की मूर्ति आदि आयटम की मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि केंद्र सरकार ने प्रेस ग्लास के नाम से बिकने वाले माउथ ब्लोइंग आयटम पर 18 प्रतिशत जीएसटी बरकरार रखी है। इससे कांच उद्यमी निराश हैं।जानकारी के अनुसार माउथ ब्लोइंग कांच आयटम और खुर्जा के सिरेमिक आयटम की निर्माण प्रक्रिया एक जैसी है। दोनों उद्योग भी एमएसएमई की तर्ज पर संचालित हैं।
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विदेशी आयात पर लगेगा ब्रेक,निर्यात बढ़ने की उम्मीद-
जीएसटी स्लैब में हुए फेरबदल का बड़ा असर देश में एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कारोबार पर भी दिखेगा। हस्तशिल्प आयटम के अलावा हैंगिंग लाइट आदि पर विदेशी निर्भरता कम होगी। जबकि स्वदेशी उत्पादों को बाजार में पकड़ बनाना आसान होगा।
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फैंसी ग्लास डेकोरेशन कारोबार की उम्मीदें नहीं हुईं पूरी-
शहर में फैंसी ग्लास डेकोरेशन कारोबार खास तौर पर कांच के ग्लास,कटोरी,कांच के जार,कप-प्लेट आदि आयटम माउथ ब्लोइंग इकाइयों में बनते हैं। इन आयटम पर हस्तशिल्प के जरिये फैंसी लुक दिया जाता है। फैंसी ग्लास डेकोरेटर्स को जीएसटी स्लैब में राहत की उम्मीद थीं। लेकिन केंद्र द्वारा माउथ ब्लोइंग उत्पादों को 18 प्रतिशत जीएसटी के स्लैब में रख कर डेकोरेटरर्स की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
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कारोबारियों की बात-
केंद्रीय घोषणा स्वागत योग्य है। इससे घरेलू बाजारों में कांच आयटम की पकड़ मजबूत होगी। खास तौर गत्ता पैकिंग को पांच प्रतिशत जीएसटी दायरे में लाने से कांच आयटम की दरें भी प्रभावित होंगी। - हेमंत अग्रवाल बल्लू अध्यक्ष लघु उद्योग भारती
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प्रेस ग्लास खास तौर पर माउथ ब्लोइंग आयटम को भी पांच प्रतिशत जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए था। हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार पुन: विचार करेगी। ताकि हजारों को आजीविका देने वाला फैंसी ग्लास डेकोरेशन कारोबार बचा रहे। - संदीप चतुर्वेदी अध्यक्ष फिरोजाबाद ग्लास बिजनेसमैन वेलफेयर
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जीएसटी स्लैब में बदलाव से पूर्व फिरोजाबाद के कांच निर्यातक कारोबार की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी हैं। हालांकि केंद्र की ओर से फ्लावर पॉट, कैंडिल जैसे कांच हस्तशिल्प आयटम को 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब से हटाकर पांच प्रतिशत जीएसटी वाले स्लैब में शामिल किया है। वहीं, गत्ता पैकिंग वाले आयटम पर भी अब पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा। जीएसटी स्लैब में किये ताजा बदलाव से देश के घरेलू बाजारों में कांच आयटम की डिमांड बढ़ेगी। खास तौर पर मध्यम वर्ग व अल्प आय वर्ग में कांच निर्मित डायनिंग टेबल और कांच की मूर्ति आदि आयटम की मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि केंद्र सरकार ने प्रेस ग्लास के नाम से बिकने वाले माउथ ब्लोइंग आयटम पर 18 प्रतिशत जीएसटी बरकरार रखी है। इससे कांच उद्यमी निराश हैं।जानकारी के अनुसार माउथ ब्लोइंग कांच आयटम और खुर्जा के सिरेमिक आयटम की निर्माण प्रक्रिया एक जैसी है। दोनों उद्योग भी एमएसएमई की तर्ज पर संचालित हैं।
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विदेशी आयात पर लगेगा ब्रेक,निर्यात बढ़ने की उम्मीद-
जीएसटी स्लैब में हुए फेरबदल का बड़ा असर देश में एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कारोबार पर भी दिखेगा। हस्तशिल्प आयटम के अलावा हैंगिंग लाइट आदि पर विदेशी निर्भरता कम होगी। जबकि स्वदेशी उत्पादों को बाजार में पकड़ बनाना आसान होगा।
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फैंसी ग्लास डेकोरेशन कारोबार की उम्मीदें नहीं हुईं पूरी-
शहर में फैंसी ग्लास डेकोरेशन कारोबार खास तौर पर कांच के ग्लास,कटोरी,कांच के जार,कप-प्लेट आदि आयटम माउथ ब्लोइंग इकाइयों में बनते हैं। इन आयटम पर हस्तशिल्प के जरिये फैंसी लुक दिया जाता है। फैंसी ग्लास डेकोरेटर्स को जीएसटी स्लैब में राहत की उम्मीद थीं। लेकिन केंद्र द्वारा माउथ ब्लोइंग उत्पादों को 18 प्रतिशत जीएसटी के स्लैब में रख कर डेकोरेटरर्स की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
कारोबारियों की बात-
केंद्रीय घोषणा स्वागत योग्य है। इससे घरेलू बाजारों में कांच आयटम की पकड़ मजबूत होगी। खास तौर गत्ता पैकिंग को पांच प्रतिशत जीएसटी दायरे में लाने से कांच आयटम की दरें भी प्रभावित होंगी। - हेमंत अग्रवाल बल्लू अध्यक्ष लघु उद्योग भारती
प्रेस ग्लास खास तौर पर माउथ ब्लोइंग आयटम को भी पांच प्रतिशत जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए था। हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार पुन: विचार करेगी। ताकि हजारों को आजीविका देने वाला फैंसी ग्लास डेकोरेशन कारोबार बचा रहे। - संदीप चतुर्वेदी अध्यक्ष फिरोजाबाद ग्लास बिजनेसमैन वेलफेयर