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Firozabad News: अब तय कोटे की सिर्फ 80 फीसदी गैस ही मिलेगी रियायती दर पर

Fri, 03 Jul 2026 02:44 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 02:44 AM IST
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FIROJABAD NEWS GASS SUPPLY INDUSTRY
फोटो 25 कांच चूड़ी कारखाने में गैस से सुलगती भट्टी पर काम करते श्रमिक। संवाद - फोटो : Samvad
फिरोजाबाद। शहर के कांच और चूड़ी उद्योग के लिए गैस संकट लगातार बढ़ रहा है। गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) ने एक नया नियम लागू किया है, इससे बड़े कारखानेदारों की चिंता बढ़ गई है। 1 जुलाई से इकाइयों को रियायती दर पर केवल 80 फीसदी गैस मिलेगी, अतिरिक्त खपत पर महंगी दरें लागू होंगी।
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नए फरमान के अनुसार, कांच व चूड़ी इकाइयों को उनके कुल निर्धारित कोटे का 80 प्रतिशत गैस ही रियायती दर पर दी जाएगी। यदि कोई इकाई इससे अधिक गैस का उपयोग करती है, तो उसे अतिरिक्त गैस के लिए बाजार की महंगी स्पॉट आरएलएनजी दर से भुगतान करना होगा। इस नियम से कांच बोतल निर्माण, माउथ ब्लोइंग और टैंक फर्नेश आधारित बड़ी इकाइयों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इससे पहले, ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति बाधित हुई थी। तब गेल ने उद्योग पर अपरिहार्य परिस्थिति नियम लागू किया था। उस समय सितंबर 2025 से फरवरी 2026 तक की छह महीने की औसत खपत के आधार पर 80 प्रतिशत गैस आपूर्ति की व्यवस्था थी। अब 1 जुलाई से लागू नई व्यवस्था में प्रतिदिन के निर्धारित कोटे को आधार बनाया गया है। इस बदलाव ने बड़े उद्यमियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। हालांकि, छोटी और कम गैस खपत वाली इकाइयों को इस नियम से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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पिछली व्यवस्था से अंतर
पहले, ईरान-इजरायल युद्ध के कारण गैस आपूर्ति में बाधा आई थी। तब गेल ने छह महीने की औसत खपत के आधार पर 80 प्रतिशत गैस दी थी। अब यह 80 प्रतिशत आपूर्ति प्रतिदिन के निर्धारित कोटे पर आधारित है। यह बदलाव बड़े उद्यमियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। छोटी इकाइयों को इससे कुछ हद तक लाभ मिल सकता है।
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टैंक फर्नेश और माउथ ब्लोइंग संचालकों में खलबली, संशोधन की मांग
गैस सप्लाई के इस दैनिक कोटे वाले नियम से विशेषकर टैंक फर्नेश और माउथ ब्लोइंग इकाइयों के संचालकों में हड़कंप मच गया है। इन उद्योगों में भट्ठियों को 24 घंटे एक निश्चित तापमान पर चालू रखना पड़ता है, जिससे गैस की खपत कम करना मुमकिन नहीं होता। नए नियमों में संशोधन के लिए कई प्रमुख उद्यमियों ने गेल प्रबंधन को पत्र लिखे हैं। उद्यमियों ने मांग की है कि कांच इकाइयों को उनके तय कोटे के अनुसार शत-प्रतिशत गैस की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जाए। दैनिक कोटे के बजाय गैस सप्लाई का औसत मापने के लिए कम से कम तीन माह की अवधि (त्रैमासिक आधार) तय की जाए।


अधिकारी का पक्ष
गैस सप्लाई और कोटे से संबंधित यह नए विधिक नियम सीधे कॉर्पोरेट मुख्यालय से जारी होते हैं। नया नियम 1 जुलाई से प्रभावी हो चुका है। चूंकि यह नीतिगत निर्णय है, इसलिए इस संबंध में स्थानीय स्तर पर ज्यादा कुछ कहना संभव नहीं है।
- मनमोहन, क्षेत्रीय प्रबंधक ऑपरेशन्स (गेल गैस)
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