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रेलवे गोदाम में आग: जल गए 25 साल पुराने लकड़ी के स्लीपर...14 घंटे बाद लपटों पर काबू, कई पेड़ों को भी नुकसान
Mon, 31 Mar 2025 08:05 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: अरुन पाराशर
Updated Mon, 31 Mar 2025 08:05 PM IST
सार
फिरोजाबाद के टूंडला में रेलवे के पीडब्ल्यूआई के गोदाम में लगी आग में 25 साल पुराने लकड़ी के स्लीपर जल गए। इसके साथ ही कई हरे पेड़ों को भी आग में नुकसान पहुंचा हैं। आग लगने के कारण की जांच के लिए कमेटी बनाई जाएगी।
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लपटों पर काबू पाने में जुटी दमकल।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
टूंडला में रेलवे के पूर्वी यार्ड स्थित पीडब्लूआई गोदाम में लगी आग 14 घंटे बाद बुझ सकी। आग में लाखों रुपये के लकड़ी के स्लीपर जलकर राख हो गए। वहीं प्रांगण में खड़े हरे पेड़ व अन्य सामान भी जल गए। सोमवार सुबह तक दमकल कर्मी आग बुझाने में लगे रहे।
पीडब्ल्यूआई के गोदाम में लगी आग इतनी भीषण थी कि रविवार रात 8.38 बजे से लगी आग सोमवार सुबह 11 बजे बुझाई जा सकी। पांच दमकल गाड़ियां आग बुझाने में जुटी रहीं। चीड़ और शाल की लकड़ी के स्लीपरों से उठती आग से लोहे की रेलिंग तक पिघल गई। डीएफओ सतेंद्र पांडेय ने बताया कि गोदाम में लगी आग पर 11 बजे करीब काबू पाया जा सका। पीडब्ल्यूआई सरफराज अहमद का कहना है कि गोदाम में 25 साल पुराने लकड़ी के स्लीपर रखे थे, जिनमें आग लगी थी। आग में पेड़ भी जले हैं। गोदाम में कबाड़ भी था।
शॉर्ट सर्किट से तो नहीं लगी थी गोदाम में आग
गोदाम में लगी आग को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। गोदाम के चौकीदार के मुताबिक विद्युत पोल पर हुए शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारी से गोदाम में पीपल व अन्य पेड़ों के सूखे पत्तों में आग लग गई। चौकीदार ने आग को बुझाने के लिए बाल्टी से पानी डाला। आग ने थोड़ी ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया।
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राख के ढेर में बच्चों को खोजती रही पिल्लों की मां
रविवार को पीडब्लूआई गोदाम में लगी आग में छह पिल्ले (कुत्ते के बच्चे) भी जलकर मर गए। चौकीदार धीरेंद्र यादव ने बताया कि गोदाम में कुतिया ने छह बच्चों को जन्म दिया था। वह स्लीपरों के बीच ही रहते थे। विद्युत पोल से निकली चिंगारी से लगी आग को बुझाने का प्रयास किया था, तब बच्चे वहीं थे। थोड़ी ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। सोमवार को अपने बच्चों की तलाश में पिल्लों की मां गोदाम के चक्कर लगाती रही।
आग से ओएचई का पोल हो गया था टेढ़ा
गोदाम में लगी आग इतनी भीषण थी कि गोदाम के पास ही लगा लाइन नंबर 9 व 10 का ओएचई खंभा भी टेढ़ा हो गया था। रात में ओएचई विभाग ने लोहे के तारों से ओएचई की लाइन को सहारा दिया और सोमवार सुबह खंभे को बदल दिया।
टूंडला के एईएन रिहान शाहिदी ने बताया कि पीडब्लूआई गोदाम में लगी आग का कारण जानने के लिए कमेटी बनाई जाएगी। जांच के बाद आग लगने का कारण व नुकसान का पता चल सकेगा।
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पीडब्ल्यूआई के गोदाम में लगी आग इतनी भीषण थी कि रविवार रात 8.38 बजे से लगी आग सोमवार सुबह 11 बजे बुझाई जा सकी। पांच दमकल गाड़ियां आग बुझाने में जुटी रहीं। चीड़ और शाल की लकड़ी के स्लीपरों से उठती आग से लोहे की रेलिंग तक पिघल गई। डीएफओ सतेंद्र पांडेय ने बताया कि गोदाम में लगी आग पर 11 बजे करीब काबू पाया जा सका। पीडब्ल्यूआई सरफराज अहमद का कहना है कि गोदाम में 25 साल पुराने लकड़ी के स्लीपर रखे थे, जिनमें आग लगी थी। आग में पेड़ भी जले हैं। गोदाम में कबाड़ भी था।
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शॉर्ट सर्किट से तो नहीं लगी थी गोदाम में आग
गोदाम में लगी आग को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। गोदाम के चौकीदार के मुताबिक विद्युत पोल पर हुए शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारी से गोदाम में पीपल व अन्य पेड़ों के सूखे पत्तों में आग लग गई। चौकीदार ने आग को बुझाने के लिए बाल्टी से पानी डाला। आग ने थोड़ी ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया।
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राख के ढेर में बच्चों को खोजती रही पिल्लों की मां
रविवार को पीडब्लूआई गोदाम में लगी आग में छह पिल्ले (कुत्ते के बच्चे) भी जलकर मर गए। चौकीदार धीरेंद्र यादव ने बताया कि गोदाम में कुतिया ने छह बच्चों को जन्म दिया था। वह स्लीपरों के बीच ही रहते थे। विद्युत पोल से निकली चिंगारी से लगी आग को बुझाने का प्रयास किया था, तब बच्चे वहीं थे। थोड़ी ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। सोमवार को अपने बच्चों की तलाश में पिल्लों की मां गोदाम के चक्कर लगाती रही।
आग से ओएचई का पोल हो गया था टेढ़ा
गोदाम में लगी आग इतनी भीषण थी कि गोदाम के पास ही लगा लाइन नंबर 9 व 10 का ओएचई खंभा भी टेढ़ा हो गया था। रात में ओएचई विभाग ने लोहे के तारों से ओएचई की लाइन को सहारा दिया और सोमवार सुबह खंभे को बदल दिया।
टूंडला के एईएन रिहान शाहिदी ने बताया कि पीडब्लूआई गोदाम में लगी आग का कारण जानने के लिए कमेटी बनाई जाएगी। जांच के बाद आग लगने का कारण व नुकसान का पता चल सकेगा।